फास्ट फूड का घातक शौक: अमरोहा की नीट छात्रा की दिमाग में गांठें बनने से मौत, डॉक्टरों ने पत्ता गोभी के कीड़े को बताया जिम्मेदार
अमरोहा/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां फास्ट फूड के प्रति दीवानगी एक होनहार छात्रा के लिए जानलेवा साबित हुई। नीट (NEET) की तैयारी कर रही 19 वर्षीय छात्रा इलमा कुरैशी की दिल्ली के राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार, इलमा के दिमाग में 20 से अधिक गांठें बन गई थीं, जिसका मुख्य कारण फास्ट फूड, विशेषकर बर्गर और नूडल्स में इस्तेमाल होने वाली पत्ता गोभी में मौजूद एक सूक्ष्म कीड़ा बताया जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर अनहाइजीनिक फास्ट फूड और अधपकी सब्जियों के सेवन से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों की ओर सबका ध्यान खींचा है।
सिरदर्द से शुरू हुआ सफर और 20 गांठों का खुलासा
अमरोहा के चुचैला कलां गांव की रहने वाली इलमा कुरैशी एक मेधावी छात्रा थी और डॉक्टर बनने का सपना संजोए नीट की तैयारी कर रही थी। इलमा के पिता नदीम कुरैशी, जो नोएडा में कबाड़ का व्यवसाय करते हैं, ने बताया कि करीब एक महीने पहले इलमा ने पहली बार सिर में तेज दर्द की शिकायत की थी। शुरुआती इलाज से उसे कुछ राहत मिली, लेकिन जल्द ही दर्द दोबारा शुरू हो गया। हालत बिगड़ती देख परिजन उसे नोएडा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने एमआरआई (MRI) और सीटी स्कैन कराने की सलाह दी।
जांच रिपोर्ट आने पर परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। रिपोर्ट में इलमा के दिमाग में कई छोटी-छोटी गांठें दिखाई दीं। 18 दिसंबर को एक पारिवारिक शादी में शामिल होने गांव आई इलमा की तबीयत अचानक फिर बिगड़ गई, जिसके बाद उसे दिल्ली ले जाया गया। निजी अस्पतालों का खर्च वहन न कर पाने के कारण पिता ने उसे दिल्ली के सरकारी राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया। वहां जांच के दौरान पता चला कि संक्रमण इतनी तेजी से फैला था कि दिमाग में गांठों की संख्या बढ़कर 20 से अधिक हो गई थी। सोमवार दोपहर इलाज के दौरान इलमा ने दम तोड़ दिया।
पत्ता गोभी का कीड़ा: मौत की अदृश्य वजह
इलमा का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने परिजनों को जो जानकारी दी, वह चौंकाने वाली थी। डॉक्टरों के मुताबिक, फास्ट फूड जैसे बर्गर, मोमोज और नूडल्स में कच्ची या अधपकी पत्ता गोभी का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। पत्ता गोभी में ‘टीनिया सोलियम’ (Tapeworm) नामक एक परजीवी के अंडे या सूक्ष्म कीड़े हो सकते हैं। यह कीड़ा इतना छोटा होता है कि साधारण आंखों से दिखाई नहीं देता और धोने पर भी आसानी से नहीं निकलता।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति इस संक्रमित पत्ता गोभी का सेवन करता है, तो यह कीड़ा आंतों के रास्ते रक्त प्रवाह में शामिल होकर दिमाग तक पहुंच जाता है। दिमाग के ऊतकों में पहुंचकर यह कीड़ा गांठें बनाना शुरू कर देता है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘न्यूरोसिस्टिक सर्कोसिस’ (Neurocysticercosis) कहा जाता है। इलमा को भी बर्गर और नूडल्स खाने का शौक था, जिसके जरिए यह संक्रमण उसके मस्तिष्क तक पहुंच गया और अंततः उसकी मौत का कारण बना।
चिकित्सा विशेषज्ञों की चेतावनी और सावधानी
इस दुखद घटना पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. राहुल कुमार ने विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पत्ता गोभी में मौजूद यह परजीवी न केवल शाकाहारियों बल्कि मांसाहारियों के लिए भी उतना ही खतरनाक है। कुछ पशुओं के मांस में भी इस तरह के कीड़े पाए जाते हैं, जो ठीक से न पकाए जाने पर इंसान के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। डॉ. कुमार ने सलाह दी कि किसी भी सब्जी, विशेषकर पत्ता गोभी और फूलगोभी को इस्तेमाल करने से पहले उसे गर्म पानी और नमक से अच्छी तरह धोना चाहिए और हमेशा पूरी तरह पकाकर ही खाना चाहिए।
अमरोहा में यह इस तरह का पहला मामला नहीं है। 15 साल पहले मंडी धनौरा के एक युवक के दिमाग में भी इसी तरह कीड़े होने की पुष्टि हुई थी। हालांकि, समय पर सही इलाज मिल जाने के कारण उसकी जान बच गई थी, लेकिन उसे दो महीने तक अस्पताल में संघर्ष करना पड़ा था। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सिरदर्द के साथ चक्कर आना, दौरे पड़ना या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
फास्ट फूड संस्कृति और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही
इलमा की मौत ने फास्ट फूड संस्कृति के काले पक्ष को उजागर किया है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आजकल बर्गर, नूडल्स और मोमोज जैसे खाद्य पदार्थ युवाओं की पहली पसंद बन गए हैं। रेहड़ी-पटरी और छोटे स्टालों पर सफाई का ध्यान रखे बिना इन सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर स्वाद के चक्कर में पत्ता गोभी को क्रिस्पी रखने के लिए उसे कच्चा ही छोड़ दिया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए ‘स्लो पॉइजन’ साबित हो रहा है।
इलमा के गांव में मातम पसरा हुआ है। एक पिता की आंखों में अपनी बेटी को डॉक्टर बनते देखने का सपना था, लेकिन आज वह उसकी मौत के लिए उस फास्ट फूड को जिम्मेदार मान रहे हैं जिसे उनकी बेटी बड़े शौक से खाती थी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे बाहर के खुले और असुरक्षित खाने से परहेज करें और घर पर भी सब्जियों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।