• February 12, 2026

पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी कार्रवाई, ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। आयोग ने 2026 की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से 58 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। ये सभी नाम वर्ष 2025 की मतदाता सूची में शामिल थे, लेकिन अब स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत इन्हें हटाया गया है। मंगलवार सुबह चुनाव आयोग ने उन मतदाताओं की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दी, जिनके नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर किए गए हैं।

चुनाव आयोग के इस फैसले ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह कदम सीधे तौर पर आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा हुआ है। पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव 2026 की शुरुआत में संभावित हैं और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो रहा है।

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 के तहत कार्रवाई

चुनाव आयोग के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2026 का हिस्सा है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, पारदर्शी और अद्यतन बनाना है। आयोग के सूत्रों ने बताया कि इस प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक SIR फॉर्म ‘अनकलेक्टेबल’ पाए गए। इसका अर्थ है कि इन फॉर्मों को या तो संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाया नहीं जा सका या फिर उनका सत्यापन संभव नहीं हो पाया।

आयोग का कहना है कि जिन मामलों में मतदाता का अस्तित्व, पता या स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई, उन्हें ड्राफ्ट रोल से हटाना अनिवार्य हो गया था। यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत की गई है।

नाम हटाए जाने के प्रमुख कारण

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाताओं के नाम हटाने के पीछे कई ठोस कारण हैं। इनमें प्रमुख रूप से निम्न कारण सामने आए हैं:

  1. पते पर मतदाता का न मिलना – बड़ी संख्या में मतदाता अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं पाए गए।

  2. स्थायी रूप से स्थान परिवर्तन – कई मतदाता दूसरे क्षेत्रों या राज्यों में स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके हैं।

  3. मृत्यु – ऐसे मतदाता जिनका निधन हो चुका है, लेकिन जिनके नाम अब तक सूची में बने हुए थे।

  4. डुप्लीकेट नाम – कुछ मामलों में एक ही मतदाता का नाम एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज पाया गया।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में इस तरह की विसंगतियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं, इसलिए इन्हें दूर करना जरूरी था।

आयोग ने दी राहत की व्यवस्था

चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल से हटाए गए हैं, उनके पास दावा और आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। आयोग के अनुसार, ड्राफ्ट रोल जारी होने के बाद प्रभावित मतदाता फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करा सकते हैं।

आयोग ने नागरिकों से अपील की है कि वे आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम जरूर जांचें। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन कर सकता है।

चुनाव से पहले मतदाता सूची की अहमियत

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची हमेशा से एक संवेदनशील मुद्दा रही है। पिछले चुनावों में भी फर्जी मतदाता, बाहरी वोटर और डुप्लीकेट नामों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे में आयोग का यह कदम मतदाता सूची को अधिक भरोसेमंद बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 58 लाख से ज्यादा नामों को हटाना एक बड़ी संख्या है और इसका असर चुनावी गणित पर पड़ सकता है। हालांकि, आयोग का तर्क है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल गलत या अमान्य नामों को हटाना है, न कि किसी वर्ग या समुदाय को नुकसान पहुंचाना।

राजनीतिक प्रतिक्रियाओं की संभावना

हालांकि अभी तक इस मुद्दे पर प्रमुख राजनीतिक दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इसे लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो सकती है। विपक्षी दल इस कदम को संदेह की नजर से देख सकते हैं, जबकि चुनाव आयोग लगातार यह दोहराता रहा है कि वह निष्पक्ष और स्वतंत्र संस्था है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव से पहले मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हमेशा राजनीतिक बहस का विषय बनते हैं। इसलिए आयोग के लिए यह जरूरी होगा कि वह पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखे और नागरिकों को पर्याप्त जानकारी दे।

अगले साल होने हैं विधानसभा चुनाव

पश्चिम बंगाल विधानसभा में कुल 294 सीटें हैं। मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल मई 2026 तक है, ऐसे में मार्च-अप्रैल 2026 में चुनाव कराए जाने की संभावना है। चुनाव आयोग पहले से ही तैयारियों में जुटा हुआ है और मतदाता सूची का शुद्धिकरण उसी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

आयोग का कहना है कि एक साफ और सटीक मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव होती है। इससे न केवल निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होते हैं, बल्कि मतदाताओं का भरोसा भी मजबूत होता है।

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