• March 3, 2026

KMCLU 7th International Confrence Conclude: ‘थिंक ग्लोबली, एक्ट लोकली’ के मंत्र के साथ भाषा विवि में संपन्न हुआ 7वां अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस!

KMCLU 7th International Confrence Conclude: लखनऊ (Lucknow) स्थित ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Chishti Language University) में भाषा विश्वविद्यालय (Bhasha University) और जीईएसए (GESA – Glocal Environment and Social Association) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सातवें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस (International Conference) का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय ‘क्लाइमेट चेंज: मिटिगेशन एंड एनवायरमेंटल एथिक्स फॉर ह्यूमन वेल बीइंग’ था। इस महत्त्वपूर्ण आयोजन ने न केवल पर्यावरणीय संकट पर वैश्विक चर्चा (Global Discussion) को आगे बढ़ाया, बल्कि समाज और शिक्षा जगत (Education Sector) की भूमिका पर भी गहन विमर्श किया। समापन समारोह में वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को मानव अस्तित्व की मूलभूत शर्त बताया। इस दौरान शोध पत्रों (Research Papers) और प्रस्तुतियों के विजेताओं की घोषणा की गई। चलिए जानते हैं पूरे कार्यक्रम की झलकियाँ और विमर्श के महत्त्वपूर्ण बिंदु क्या रहे…

पर्यावरणीय नैतिकता पर केंद्रित वैश्विक विमर्श

ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (Khwaja Moinuddin Chishti Language University) में सातवें अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का समापन समारोह विश्वविद्यालय के अटल सभागार (Atal Auditorium) में आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य ‘क्लाइमेट चेंज: मिटिगेशन एंड एनवायरमेंटल एथिक्स फॉर ह्यूमन वेल बीइंग’ जैसे महत्त्वपूर्ण विषय पर शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं को एक मंच पर लाना था। कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में कार्यक्रम की संयोजक डॉ. नलिनी मिश्रा (Dr. Nalini Mishra) ने सभी अतिथियों का स्वागत किया, जिसके बाद आगंतुक अतिथियों को शॉल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आरम्भ से लेकर समापन तक के कार्य वृत्त (Summary of Proceedings) का संकलन विधि संकाय (Faculty of Law) की सहायक प्रोफेसर डॉ. श्वेता त्रिवेदी (Dr. Shweta Trivedi) ने प्रस्तुत किया, जिसने पूरे कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा को स्पष्ट किया।

कुलपति प्रो. अजय तनेजा का ‘एक्ट लोकली’ का आह्वान

समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए, विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा (Prof. Ajay Taneja) ने अपने समापन भाषण में पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) को मानव अस्तित्व (Human Existence) की मूलभूत शर्त बताया। प्रो. तनेजा ने शिक्षा संस्थानों (Educational Institutions) को पर्यावरणीय संवेदनशीलता (Environmental Sensitivity) के साथ वैचारिक नेतृत्व (Ideological Leadership) प्रदान करने वाले मंच तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कॉन्फ्रेंस में आए सभी प्रतिभागियों को ‘थिंक ग्लोबली और एक्ट लोकली’ (Think Globally and Act Locally) के मंत्र को अपनाने पर ज़ोर दिया। प्रो. तनेजा ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण में सरकार की भूमिका सीमित है, और इसे पूर्ण रूप से ठीक करने के लिए दिल से जागरूक कार्य करने होंगे। उन्होंने ओजोन लेयर (Ozone Layer) की चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा।

नैतिक प्रश्न और मौलिक शोध पर ज़ोर

समापन सत्र को संबोधित करते हुए कई वक्ताओं ने महत्त्वपूर्ण विचार साझा किए। वैज्ञानिक डॉ. वाईपी गौतम (Dr. Y.P. Gautam), नरौरा (Narora) ने सामाजिक उत्तरदायित्व (Social Responsibility) और पर्यावरण अध्ययन को जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को जोड़ने वाला सेतु बताया। डॉ. संदीप सिंह (Dr. Sandeep Singh), चेयरमैन, ईसीआरडी रिसर्च एंड एजुकेशन काउंसिल, हरियाणा (ECRD Research and Education Council, Haryana) ने शोध में मौलिकता (Originality) बनाए रखने और कट, कॉपी, पेस्ट (Cut, Copy, Paste) से बचने की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. एके वर्मा (Dr. A.K. Verma), सदस्य, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) प्रयागराज (Prayagraj) ने कहा कि पर्यावरणीय संकट केवल एक वैज्ञानिक चुनौती नहीं है, बल्कि एक नैतिक प्रश्न (Ethical Question) भी है। उन्होंने प्रकृति को संसाधन (Resource) के बजाय सह-अस्तित्व (Co-existence) के रूप में देखने वाले समाज की आवश्यकता बताई।

400 से अधिक शोध पत्र और विजेताओं की घोषणा

कॉन्फ्रेंस में कुल 400 से अधिक शोध पत्र (Research Papers) प्राप्त हुए, जो इस विषय की महत्ता और व्यापक भागीदारी को दर्शाते हैं। समापन समारोह के अवसर पर, कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अंकिता (Dr. Ankita) ने किया। प्रतिभागियों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे पूरे परिसर में जागरूकता और रचनात्मक ऊर्जा (Creative Energy) का वातावरण बना रहा। समारोह समापन के अवसर पर डॉ. उधम सिंह (Dr. Udham Singh), डॉ. लक्ष्मण सिंह (Dr. Laxman Singh), डॉ. मनीष कुमार (Dr. Manish Kumar), डॉ. राहुल मिश्रा (Dr. Rahul Mishra) और डॉ. मूसी रज़ा (Dr. Moosi Raza) सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, प्रतिभागी और विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे।

विजेताओं की सूची (Results Announcement):

  • ऑनलाइन वाचिक प्रस्तुति (Online Oral Presentation): प्रथम स्थान: अरुणिमा सिंह (Arunima Singh), द्वितीय स्थान: डॉ. विनायक के. एस. (Dr. Vinayak K. S.), तृतीय स्थान: दिव्या चौधरी (Divya Choudhary)

  • पोस्टर प्रस्तुति (Poster Presentation): प्रथम स्थान (संयुक्त): सुश्री जेन डेन (Ms. Jane Den) (आई.टी. कॉलेज, लखनऊ) और डॉ. सुदीप्ति आर. श्रीवास्तव (Dr. Sudipti R. Srivastava) (के.जी.एम.यू., लखनऊ), द्वितीय स्थान: सुश्री नेहा शुक्ला (Ms. Neha Shukla) (आई.टी. कॉलेज, कानपुर), तृतीय स्थान: सुश्री स्नेह त्रिवेदी (Ms. Sneh Trivedi) (डी.जी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर)। सांत्वना पुरस्कार: गुलाम अहमद सिद्दीकी (Ghulam Ahmad Siddiqui) और स्वाति पटेल (Swati Patel)

  • ऑफलाइन वाचिक प्रस्तुति (Offline Oral PPT): प्रथम स्थान (संयुक्त): सुश्री फातिमा खुर्शीद (Ms. Fatima Khurshid) और सुश्री वाग्मी सिंह (Ms. Vaghmi Singh), द्वितीय स्थान: अदिति बरनवाल (Aditi Barnwal), तृतीय स्थान (संयुक्त): रवती सिंह (Ravati Singh) और शशवत सिंह (Shashwat Singh)। सांत्वना पुरस्कार: मेंका श्रीवास्तव (Menka Srivastava) और निशात फातिमा (Nishat Fatima)

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