• January 2, 2026

National Security Debate: संसद में गूंजी मस्जिद-मदरसे में कैमरे लगाने की आवाज, अरुण गोविल की मांग पर गरमाई सियासी गलियाँ।

देश की सुरक्षा व्यवस्था और संवेदनशील धार्मिक स्थलों (Religious Sites) की निगरानी को लेकर एक नई सियासी बहस छिड़ गई है। इस बहस की शुरुआत उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मेरठ (Meerut) लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अरुण गोविल (Arun Govil) ने की है, जिन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के दौरान मस्जिदों और मदरसों (Mosques and Madrasas) में CCTV कैमरे लगाने की मांग उठाई। उनका तर्क है कि जब देश के लगभग सभी सार्वजनिक स्थान और अन्य धर्मों के पूजा स्थल पहले से ही कैमरे की निगरानी में हैं, तो इन संस्थानों को इससे अलग क्यों रखा जाए। उन्होंने अपनी मांग के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) को मुख्य आधार बताया है, जिसने सियासी गलियारों से लेकर धार्मिक संगठनों तक चर्चा का दौर शुरू कर दिया है। आखिर इस मांग के पीछे सांसद ने क्या तर्क दिए, सऊदी अरब का उदाहरण क्यों दिया गया और इसका राजनीतिक एवं सामाजिक असर क्या होगा, जानते हैं विस्तार से…

संसद में उठी समान निगरानी तंत्र की मांग

संसद के शीतकालीन सत्र (Winter Session) के दौरान मेरठ (Meerut) से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अरुण गोविल (Arun Govil) ने मस्जिदों और मदरसों में CCTV कैमरे लगाने के मुद्दे को केंद्रीय चर्चा में ला दिया। उन्होंने संसद में अपनी बात रखते हुए कहा कि आज देश के अधिकांश सार्वजनिक स्थल जैसे अस्पताल (Hospitals), बाज़ार (Markets), रेलवे स्टेशन (Railway Stations) और यहाँ तक कि मंदिरों (Temples), गुरुद्वारों (Gurdwaras) और चर्चों (Churches) में भी CCTV कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। इन कैमरों का प्राथमिक उद्देश्य अपराध नियंत्रण (Crime Control), पारदर्शिता (Transparency) सुनिश्चित करना और सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) बनाए रखना है। उन्होंने इसी संदर्भ में सवाल उठाया कि मस्जिदों और मदरसों में इस प्रकार की निगरानी व्यवस्था क्यों लागू नहीं हो पाई है, जबकि सुरक्षा के लिहाज़ से इन स्थानों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना आवश्यक है।

सऊदी अरब का उदाहरण और सुरक्षा तर्क

सांसद अरुण गोविल (Arun Govil) ने अपनी मांग को बल देने के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण पेश किया। उन्होंने सऊदी अरब (Saudi Arabia) के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों मक्का (Mecca) और मदीना (Medina) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म के इन प्रमुख और पवित्र केंद्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने के लिए CCTV कैमरे व्यापक रूप से लगाए गए हैं। गोविल (Arun Govil) ने संसद (Parliament) में यह तर्क रखा कि जब सऊदी अरब (Saudi Arabia) जैसे इस्लामिक देश में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक (Technology) का उपयोग किया जा सकता है, तो भारत (India) में राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऐसा करने में कोई संकोच क्यों होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग किसी धर्म विशेष के ख़िलाफ़ नहीं है, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा (Internal Security) और अपराध नियंत्रण से जुड़ी एक आवश्यक पहल है।

मदरसों को लेकर पहले से चल रहा राजनीतिक विवाद

मस्जिदों और खासकर मदरसों (Madrasas) को लेकर देश में पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस (Political and Social Debate) जारी है। हाल ही में दिल्ली (Delhi) ब्लास्ट जैसी घटनाओं के बाद कुछ हलकों में मदरसों की जांच की मांग तेज़ हुई थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने राज्य भर के मदरसों की जांच के आदेश दिए और कई कथित अवैध मदरसों को सील करने की कार्रवाई भी की गई। इस संवेदनशील माहौल के बीच अरुण गोविल (Arun Govil) का CCTV वाला बयान एक नया विवाद खड़ा कर रहा है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेता पहले भी मदरसों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके हैं, जिसे विपक्षी दल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण (Communal Polarization) की कोशिश करार देते रहे हैं। ऐसे में यह मांग सुरक्षा की ज़रूरत है या महज़ सियासी रणनीति, इस पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं।

नीतिगत बदलाव और सरकार के निर्णय का इंतजार

फिलहाल, मस्जिदों और मदरसों में CCTV कैमरे लगाने के संबंध में केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से कोई भी औपचारिक निर्णय (Formal Decision) सामने नहीं आया है। हालांकि, सांसद अरुण गोविल (Arun Govil) द्वारा संसद में यह मुद्दा उठाए जाने के बाद, यह अब नीति-निर्माण (Policy Making) के स्तर तक पहुंच चुका है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मत है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो देश के सभी धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए एक समान और एकीकृत निगरानी तंत्र (Integrated Surveillance Mechanism) विकसित करना होगा। वहीं, इस मुद्दे पर मुस्लिम धार्मिक संगठनों (Religious Organizations) की प्रतिक्रिया भी सरकार के अगले कदम पर निर्भर करेगी। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह इस संवेदनशील विषय पर गहन बहस होने की संभावना है। यह देखना अहम होगा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव (Social Harmony) के बीच संतुलन साधते हुए क्या कदम उठाती है।

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