छांगुर बाबा की आलीशान कोठी ढहाई, अब 8.55 लाख रुपये का बुलडोजर खर्च भी वसूलेगा प्रशासन
बलरामपुर: उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा की अवैध रूप से बनी आलीशान कोठी को प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। अब योगी सरकार ने इस कार्रवाई का खर्च, यानी 8 लाख 55 हजार रुपये, छांगुर बाबा से वसूलने के लिए नोटिस जारी किया है।
क्यों हुई कार्रवाई?
छांगुर बाबा पर सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण कर कोठी बनाने और धर्मांतरण के गंभीर आरोप हैं। प्रशासन ने बताया कि यह कोठी मधपुर गांव में नीतू उर्फ नसरीन के नाम थी, जिसे एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। कोठी की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ रुपये थी, और इसे कथित तौर पर धर्मांतरण के धंधे से कमाए गए धन से बनाया गया था।
बुलडोजर कार्रवाई की पृष्ठभूमि
7 जुलाई 2025 को प्रशासन ने कोठी पर नोटिस चस्पा कर एक सप्ताह में खाली करने का आदेश दिया था। हालांकि, अगले ही दिन 8 जुलाई को पांच बुलडोजरों के साथ कोठी का बड़ा हिस्सा जमींदोज कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान सोलर पैनल से करंट का खतरा होने के कारण कुछ समय के लिए काम रोका गया था, लेकिन केबल हटाने के बाद ध्वस्तीकरण पूरा किया गया।
आरोप और जांच
छांगुर बाबा पर हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने और मानव तस्करी का आरोप है। एक मुस्लिम सहयोगी की शिकायत के बाद, जिसने पीएमओ को पत्र लिखा था, प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया। जांच में सामने आया कि छांगुर बाबा ने कथित तौर पर गरीब और भोले-भाले लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया और इस धंधे से करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की।
प्रशासन का कड़ा रुख
योगी सरकार ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए न केवल कोठी को ध्वस्त किया, बल्कि कार्रवाई का खर्च भी वसूलने का फैसला किया है। यह कदम अवैध निर्माण और धर्मांतरण जैसे गंभीर मामलों में प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति को दर्शाता है।
सियासी और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई ने बलरामपुर में सियासी हलचल मचा दी है। सोशल मीडिया पर लोग इसे योगी सरकार की ‘लव जिहाद’ और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त नीति के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, कुछ लोग इसे धार्मिक आधार पर कार्रवाई के रूप में भी देख रहे हैं, जिससे इस मामले में बहस छिड़ गई है। बलरामपुर प्रशासन अब आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई में जुटा है, और इस मामले पर नजर बनाए हुए है।