इजरायल-ईरान जंग के बीच पीएम मोदी साइप्रस रवाना: एयर इंडिया-1 का रास्ता बदला
PM Modi Cyprus Visit: मध्य-पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच 13 जून 2025 से शुरू हुआ सैन्य संघर्ष तीसरे दिन भी जारी है, जिसने पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। इजरायल के “ऑपरेशन राइजिंग लायन” ने ईरान के नतांज परमाणु सुविधा, साउथ पार्स गैस फील्ड, और सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिसमें 78 लोग मारे गए, जिनमें छह परमाणु वैज्ञानिक और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर हुसैन सलामी शामिल हैं। जवाब में, ईरान ने तेल अवीव, यरुशलम, और हाइफा पर 150 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे इजरायल में 7-13 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोग घायल हुए। इस बीच, 15 जून को सुबह 7:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली से साइप्रस के लिए रवाना हुए, जहां वे राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद वे क्रोएशिया और कनाडा में जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, लेकिन मध्य-पूर्व के तनाव ने इसे जटिल बना दिया है।
हवाई क्षेत्र पर असर और वैकल्पिक मार्ग
इजरायल-ईरान संघर्ष ने पश्चिम एशिया के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है। ईरान, इजरायल, इराक, सीरिया, और लेबनान ने नागरिक उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए, जिससे एयर इंडिया-1, पीएम का विशेष बोइंग 777 विमान, को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है। सामान्य तौर पर, दिल्ली से साइप्रस का रास्ता पाकिस्तान, ईरान, इराक, और इजरायल के हवाई क्षेत्र से होकर जाता है, लेकिन अब यह सऊदी अरब, मिस्र, और भूमध्य सागर के ऊपर से लंबा मार्ग लेगा। यह बदलाव उड़ान के समय को 5-6 घंटे से बढ़ाकर 8-9 घंटे कर सकता है, और उड़ान लागत में 15-20% की वृद्धि हुई है। सैटेलाइट तस्वीरों में नतांज में नष्ट सेंट्रीफ्यूज, साउथ पार्स में आग, और तेल अवीव में जली हुई इमारतें दिखीं, जो इस संघर्ष की तीव्रता को दर्शाती हैं। इस स्थिति ने न केवल पीएम की यात्रा, बल्कि भारत-यूरोप की सभी उड़ानों को प्रभावित किया है।
भारत की तटस्थ नीति और नागरिकों की सुरक्षा
भारत ने इजरायल-ईरान संघर्ष में तटस्थ रुख अपनाया है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। विदेश मंत्रालय ने ईरान और इजरायल में फंसे भारतीय छात्रों और कामगारों को निकालने की योजना शुरू की है। भारत, जो इजरायल से 1.6 अरब डॉलर का आयात और ईरान से कच्चा तेल मंगाता है, इस संघर्ष से आर्थिक रूप से प्रभावित हो सकता है। तेल की कीमतों में वृद्धि भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रही है। साइप्रस यात्रा भारत की भूमध्य सागर क्षेत्र में रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगी, और जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी वैश्विक आर्थिक और सामरिक मुद्दों पर भारत का पक्ष रखेंगे। इस यात्रा से भारत की कूटनीतिक स्थिति को बल मिलेगा, लेकिन मध्य-पूर्व का तनाव इसे चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
एयर इंडिया पर दबाव: हाल का हादसा
यह स्थिति तब और जटिल हो गई है, जब एयर इंडिया पहले ही 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए बोइंग 787-8 क्रैश के कारण जांच के दायरे में है। इस हादसे में 279 लोग मारे गए, और एकमात्र बचे यात्री, विश्वकुमार रमेश, से पीएम मोदी ने 13 जून को मुलाकात की थी। इस हादसे ने भारत में एविएशन सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, और सभी बोइंग 787 की जांच के आदेश दिए गए हैं। एयर इंडिया-1 की सुरक्षा और री-रूटिंग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि पीएम की यात्रा निर्बाध और सुरक्षित रहे। इस संदर्भ में, वैकल्पिक मार्गों पर ईंधन और तकनीकी स्टॉप की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
निष्कर्ष: कूटनीति और सुरक्षा की दोहरी चुनौती
इजरायल-ईरान जंग ने मध्य-पूर्व को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है, जिसका असर पीएम मोदी की साइप्रस, क्रोएशिया, और जी-7 यात्रा पर पड़ा है। एयर इंडिया-1 का सऊदी अरब और मिस्र के रास्ते वैकल्पिक मार्ग सुरक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन यह उड़ान समय और लागत को बढ़ाता है। भारत की तटस्थ नीति और नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान इस संकट में उसकी रणनीति को दर्शाता है। साइप्रस में द्विपक्षीय वार्ता और जी-7 में भारत की उपस्थिति वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को मजबूत करेगी। हालांकि, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और हाल के एविएशन हादसे भारत के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। जैसे-जैसे स्थिति विकसित हो रही है, भारत को अपनी कूटनीति और सुरक्षा रणनीति में संतुलन बनाना होगा।
इजरायल-ईरान जंग ने मध्य-पूर्व को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है, जिसका असर पीएम मोदी की साइप्रस, क्रोएशिया, और जी-7 यात्रा पर पड़ा है। एयर इंडिया-1 का सऊदी अरब और मिस्र के रास्ते वैकल्पिक मार्ग सुरक्षा सुनिश्चित करता है, लेकिन यह उड़ान समय और लागत को बढ़ाता है। भारत की तटस्थ नीति और नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान इस संकट में उसकी रणनीति को दर्शाता है। साइप्रस में द्विपक्षीय वार्ता और जी-7 में भारत की उपस्थिति वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका को मजबूत करेगी। हालांकि, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव और हाल के एविएशन हादसे भारत के लिए कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। जैसे-जैसे स्थिति विकसित हो रही है, भारत को अपनी कूटनीति और सुरक्षा रणनीति में संतुलन बनाना होगा।