अधिवक्ताओं ने मार्च निकाल की अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम की मांग
हापुड़ और गाजियाबाद कांड के विरोध में वकीलों ने शुक्रवार को अधिवक्ता मार्च निकाल अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने की मांग की। कहा गया कि पुलिस तानाशाह हो चुकी है और अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है। अधिवक्ताओं के हित में संघर्ष जारी रहेगा।
लायर्स एसोसिएशन अध्यक्ष पंडित रवीन्द्र शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्तागण बार एसोसिएशन गेट पर एकत्र हुए। वहां से अधिवक्ता सम्मान के खातिर, हम सब मिलकर साथ चलेंगे, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करो लागू करो आदि नारे लगाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। रवीन्द्र शर्मा ने कहा कि हापुड़ में पुलिस का अधिवक्ताओं पर जानलेवा हमला न्यायव्यवस्था पर हमला है जिसमें तमाम अधिवक्ता और महिला अधिवक्ता घायल हुई। ये पुलिसिया बर्बरता का प्रमाण है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जगह अधिवक्ताओं के खिलाफ ही एफआईआर लिखा जाना अत्यंत निंदनीय है। हापुड़ कांड के दोषियों पर कार्रवाई न होने से अपराधियों के हौसले बुलंद हुए और उन्होंने गाजियाबाद में अधिवक्ता मनोज चौधरी की न्यायालय परिसर के चेंबर में घुसकर हत्या कर दी।
मुख्यमंत्री द्वारा तत्काल हत्यारों के विरुद्ध त्वरित न्याय के आधार पर कठोरतम कार्रवाई करते हुए दिवंगत अधिवक्ता के परिजनों को एक करोड़ रूपया मुआवजा दिया जाये। हत्याओं के क्रम में कुछ दिन पूर्व सुल्तानपुर के आजाद अहमद अलीगढ़ के अब्दुल मुगीश की गोली मार हत्या कर दी गई। अधिवक्ता और अधिवक्ता परिवारों पर हमलों और उत्पीड़न के क्रम में घाटमपुर थाने के सामने अधिवक्ता रोहित मिश्र के परिवार की जमीन पर अवैध कब्जे और वसूली के उद्देश्य से जानलेवा हमले का प्रयास हुआ जिसकी रिपोर्ट के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
रवीन्द शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अधिवक्ता और अधिवक्ता परिवारों की सुरक्षा के लिए तत्काल अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू किया जाना समय की मांग है। जिलाधिकारी की प्रतिनिधि तनु प्रिया ने मुख्यंमंत्री को संबोधित प्रतिवेदन प्राप्त किया। इस दौरान बृज नारायण निषाद, पवन अवस्थी, रविन्द्र भूषण सिंह, मधुर साहू, सचिन अवस्थी, अनुराग यादव, अविनाश कुशवाहा, संजीव कपूर आदि मौजूद रहें।


