संसार में रहकर भी सन्यास को उपलब्ध हो सकता है मनुष्य : स्वामी आनंद एकांत
फ्रेंडस ऑफ ओशो के तत्वावधान में शुक्रवार को ओशो, ध्यान, भक्ति, उत्सव साधना शिविर का शुभारम्भ किया गया। यह उत्सव सीपरी बाजार स्थित एक होटल में स्वामी आनंद एकांत, चांपा (छत्तीसगढ़) ने कीर्तन कराकर किया। 04 दिवसीय शिविर में ओशो के विभिन्न ध्यान प्रयोग कराये जाएंगे। शिविर में 20 प्रदेशों से आये काफी संख्या में ओशो ध्यान प्रेमी भाग ले रहे हैं।
यह शिविर 01 सितम्बर से 04 सितम्बर तक चलेगा। पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी आनंद एकांत ने बताया कि ओशो ने एक नये मनुष्य की अवधारणा की है, जो संसार में रहकर भी सन्यास को उपलब्ध हो सकता है। ओशो मनुष्य जीवन की चेतना के रूपांतरण प्रक्रिया ही उनकी ध्यान विधियां है। ओशो सत्य के साथ जीवन के सभी पक्षों को स्वीकारने की बात करते हैं। स्वामी आनंद एकांत के अनुसार ओशो का कहना है कि जीवन के भोग का त्याग नहीं वरन जागरण होना चाहिए। उससे ही हम मुक्त हो सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वामी ध्यान साक्षी, स्वामी संबोध निताष, स्वामी सैनी, स्वामी प्रेम समर्पण, जय प्रकाश, मां लक्ष्मी, माँ कशिश, स्वामी आनंद प्रवीण,मां प्रेम हास्या, मां प्रेम वर्षा, मां मृदुला आदि उपस्थित रहे। अंत में डॉ. रमेश चन्द्र कुशवाहा ने सभी का आभार व्यक्त किया।



