• March 11, 2026

जोशीमठ के आपदा प्रभावितों ने दिया धरना, लगाया वादा खिलाफी का आरोप

 जोशीमठ के आपदा प्रभावितों ने दिया धरना, लगाया वादा खिलाफी का आरोप

चमोली जिले के जोशीमठ आपदा प्रभावितों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया था कि जल्द की उनकी समस्याओं का समाधान कर लिया जाएगा, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी अभी तक उनकी समस्या जस की तस बनी हुई है।

सोमवार को आपदा प्रभावितों ने एक दिवसीय धरना देते हुए उप जिलाधिकारी जोशीमठ के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेज कर उनकी समस्याओं का शीघ्र निस्तारण करने की मांग की है।

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के प्रवक्ता कमल रतूड़ी और संयोजक अतुल सती ने कहा कि जोशीमठ के आपदा प्रभावितों ने तीन माह तक आंदोलन किया जिसके बाद बीते आठ अप्रैल को मुख्यमंत्री से मुलाकात करने पर उन्होंने संघर्ष समिति की 11 सूत्री मांगों पर समाधान किये जाने का आश्वासन दिया था, लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी उनकी मांग पूरी नहीं की गई है। जिससे गुस्साये प्रभावितों ने सोमवार को एक दिवसीय धरने के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजकर उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है।

इस मौके पर कमल रतूड़ी, अतुल सती, मनोज कुमार, हरीश सती, जमूना शर्मा, सरिता देवी, दीपा देवी, पूजा, सुनीता देवी, भुवनेश्वरी देवी, गुड्डी सती, सुशीला जैन, सीमा शाह, दमयंती आदि मौजूद थे।

प्रभावितों की मांग-

सीएम को भेजे गये ज्ञापन में जोशीमठ संघर्ष समिति ने मांग की है कि संपूर्ण जोशीमठ को आपदा प्रभावित घोषित करते हुए प्रभावित वर्गों को हुए नुकसान की भरपाई की जाये। इसमें दूध व्यवसायियों, दैनिक मजदूरों, पर्यटन पर निर्भर लोगों, कृषकों के नुकसान की भरपाई की जाए।

जोशीमठ की आपदा के संदर्भ में देश की शीर्ष आठ संस्थाओं ने सर्वेक्षण/ अध्ययन किया गया है। उनके अध्ययन की रिपोर्ट को शीघ्र सार्वजनिक किया जाना चाहिए। जिससे लोगों में व्याप्त तमाम आशंकाओं का समाधान हो सके।

जोशीमठ में बहुत सी बेनामी भूमि पर लोग काबिज हैं। जिससे इस आपदा काल में लोगों के सामने भूमिहीन होने का संकट खड़ा हो गया है। अतः स्थानीय स्तर पर भू बन्दोबती कर लोगों के खातों में भूमि दर्ज की जाए।

स्थानीय निवासियों की सेना को गयी भूमि का भुगतान करवाया जाय, जिससे इस आपदा काल में लोगों को आर्थिक सहायता हो सके। सरकार की ओर से घोषित मुआवजा नीति में होम स्टे को व्यावसायिक श्रेणी से हटाया जाये।

बेघर हुए प्रभावितों की स्थाई विस्थापन पुनर्वास की व्यवस्था न होने तक वैकल्पिक व्यवस्था कम से कम साल भर तक की जाए। तपोवन विष्णुगाढ़ जल विद्युत परियोजना की निर्मात्री एनटीपीसी कंपनी के साथ हुए 2010 के समझौते को लागू किया जाये।

तपोवन विष्णुगाड़ परियोजना एवम हेलंग मारवाड़ी बाईपास पर स्थाई रोक लगे। जोशीमठ के स्थायीकरण और नव निर्माण के कार्यों की मॉनिटरिंग के लिये कमेटी बने, जोशीमठ बचाओ संघर्ष समीति इस कमेटी में शामिल की जाए।

सरकार की ओर से अभी दिये जा रहे भवनों के मुआवजा देने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए। जोशीमठ में विस्थापन और पुनर्वास के लिए एक स्थाई कार्यालय शीघ्र प्रारंभ किया जाए।

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