• March 11, 2026

बकरीद को लेकर सजे बकरे के बाजार,जमकर की गई खरीददारी

 बकरीद को लेकर सजे बकरे के बाजार,जमकर की गई खरीददारी

ईद-उल-अजहा अर्थात बकरीद को लेकर कुर्बानी के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सजे बाजार में जमकर बकरे की बिक्री हुई। सुबह से ही खरीददार अररिया,जोकीहाट,फारबिसगंज, सिमराहा एवं बथनाहा में बकरे की खरीददारी में मोलभाव करते देखे गए।बकरीद पर्व को लेकर शहरी सहित ग्रामीणों इलाकों का हाट बाजार बकरों से पटा रहा।

उल्लेखनीय है कि मुस्लिम समुदाय के द्वारा गुरुवार 29 जून को बकरीद का पर्व मनाया जायेगा।जिसको लेकर बाजारों में तैयारियां जोरों पर रही। अररिया और फारबिसगंज में बकरीद में बिकने वाले बकरों के दाम इस साल आसमान छू रहे हैं। हर साल 20 से 25 हजार में बिकने वाले बकरों के दाम इस साल 40 से 50 हजार रूपये तक चले गये हैं। मंडियों मे देसी नस्‍ल के बकरों की मांग सबसे अधिक रही। बेहतरीन लंबाई और चुस्त-दुरुस्त बकरों को लेने के लिए ग्राहकों की भीड़ हाट बाज़ारों में सुबह से ही लगी रही।

फारबिसगंज के फैंसी मार्केट, मियां हाट,मार्केटिंग यार्ड इलाके के पास हर साल की तरह इस साल भी बकरा का बाजार सजा। बाजार में एक साल से लेकर 4 साल तक के बकरे उपलब्ध हैं। यहां पर पिछले दो साल से अपने बकरे की बिक्री को लेकर आ रहे मो.ताजुद्दीन ने बताया कि इस बार बाजार में बीस से पच्चीस हजार में सामान्यत्य बकरे बिक रहे है। उन्होंने कहा कि उसने दस हजार से लेकर पच्चीस हजार तक के मूल्य के बकरे की बिक्री की है।काफी समय के बाद बकरीद को लेकर बकरे का बाजार इस साल बढ़िया रहा। बाजार में बकरों को बिक्री के लिए लेकर आने वाले लोगों का कहना है कि वह बकरों को अपने परिवार के सदस्य की तरह से पालते हैं।

ये बकरे हरा चारा के अलावे चोकड़,चिप्स, चना बहुत चाव से खाते हैं। शहर के फैंसी मार्केट में तमाम ऐसे अच्छी नस्ल के कई बकरे मौजूद हैं। जिनकी कीमत 40 से 50 हजार तक रखी गई है। इन बकरों के मालिकों का कहना है कि पूरे एक साल से अधिक समय तक इन बकरों की सेवा करने के बाद वह कुर्बानी लायक तैयार हुए हैं। इन पर हर रोज सैकड़ों रुपयों का खर्च आता है। जिसकी वजह से मार्केट में आने पर इनकी लागत बढ़ जाती है।

बकरीद के अवसर पर पूरे जिले में बकरों की खूब डिमांड रहती है और दूर दराज के गांवों और दूसरे जिलों से भी बकरे फारबिसगंज के विभिन्न हाट बाज़ारों में लाये जाते हैं। जो बकरा जितना अच्‍छा साफ सुथरा और सेहतमंद रहता है, उसके दाम उतने ही आसमान छूते हैं। खरीददार बकरों के दांतो को गिनकर भी उनकी उम्र का पता लगा लेते हैं और सबसे अधिक डिमांड एक साल की बकरों की होती है। हालांकि इन बकरों के दामों में खरीददारों और बकरे के मालिकों में खूब मोलभाव होता है और दाम पटने पर बकरे को बेचा जाता है।

खरीददारों का कहना है कि इस साल बकरों के दाम में काफी इजाफा हुआ है, लेकिन बकरा खरीदना है तो दाम से समझौता करना पड़ रहा है।

युवा कारोबारी व समाजसेवी वाहिद अंसारी,शमसाद अंसारी,मो.कलीमुद्दीन, मुबारक हुसैन का कहना है कि बकरीद के दिन बकरों की कुर्बानी दिये जाने का रिवाज है। माना जाता है की जो बकरा जितना सेहतमंद और सुंदर होता है, उसकी कुर्बानी उतनी ही अच्‍छी होती है। यही वजह है कि लोग बिना वजन और दाम की परवाह किये बकरों को खरीदते हैं। अच्‍छी नस्‍ल के बकरों के दीवानों की कमीं नहीं है और लोग मुंहमांगी कीमत पर कुर्बानी के इन बकरों को खरीद रहे हैं।

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