• January 20, 2026

मायावती का 70वां जन्मदिन: ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मना रही बसपा, योगी-अखिलेश सहित दिग्गजों ने दी बधाई

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की नई इबारत लिखने वाली और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती आज अपना 70वां जन्मदिन मना रही हैं। भारतीय राजनीति में ‘आयरन लेडी’ के नाम से मशहूर और चार बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती का जन्मदिन बसपा कार्यकर्ताओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। इस अवसर पर पार्टी मुख्यालय से लेकर प्रदेश के कोने-कोने में उत्साह का माहौल है। बसपा इस दिन को पारंपरिक रूप से ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मना रही है, जिसका उद्देश्य दलितों, पिछड़ों और वंचित समाज के बीच पार्टी की विचारधारा को पुनः जीवित करना और आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है।

मायावती के इस 70वें जन्मदिन के मौके पर राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखते हुए पक्ष-विपक्ष के तमाम दिग्गजों ने उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तक ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। यह राजनीतिक शिष्टाचार उत्तर प्रदेश की सियासत में एक सकारात्मक संदेश दे रहा है, जहाँ वैचारिक मतभेदों के बावजूद नेतृत्व के प्रति सम्मान की परंपरा आज भी जीवित है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की दीर्घायु की कामना

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुबह सवेरे ही अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से मायावती को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में उनके स्वास्थ्य और लंबी आयु की प्रार्थना की। योगी आदित्यनाथ ने लिखा, “बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। प्रभु श्री राम से आपके लिए दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना है।”

मुख्यमंत्री का यह संदेश न केवल एक औपचारिक बधाई थी, बल्कि इसमें उत्तर प्रदेश के विकास में पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मायावती के योगदान के प्रति सम्मान भी झलका। राजनीतिक गलियारों में सीएम योगी की इस सक्रियता को एक सौहार्दपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के साथ-साथ यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मायावती को बधाई दी। मौर्य ने अपने संदेश में लिखा, “उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु की कामना करता हूं।”

अखिलेश यादव का संदेश: संघर्ष और अधिकारों की ललकार

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मायावती को उनके 70वें जन्मदिन पर भावपूर्ण और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बधाई दी। अखिलेश यादव का संदेश केवल शुभकामनाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने मायावती के जीवनभर के संघर्षों को भी रेखांकित किया। अखिलेश ने लिखा, “आदरणीय मायावती जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। उनको स्वस्थ, स्वतंत्र जीवन और सार्थक सक्रियता के लिए अनंत शुभकामनाएं।”

अखिलेश यादव ने अपने संदेश में आगे जोड़ा कि मायावती ने जीवन भर प्रभुत्ववादियों के खिलाफ जाकर शोषित, वंचित, उत्पीड़ित, उपेक्षित और अपमानित समाज के मान-सम्मान और अधिकारों के लिए जो अनवरत संघर्ष किया है, वह प्रेरणादायक है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस तरह मायावती ने संविधान विरोधी ताकतों को ललकारा है, वह सिलसिला निरंतर जारी रहे। अखिलेश यादव की यह बधाई राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ गई है, क्योंकि इसमें उन्होंने दलितों और वंचितों के प्रति मायावती के समर्पण की खुलकर प्रशंसा की है।

बसपा का ‘जनकल्याणकारी दिवस’: मिशन 2027 और शक्ति प्रदर्शन

बहुजन समाज पार्टी ने मायावती के जन्मदिन को ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार, आज पूरे उत्तर प्रदेश के हर मंडल मुख्यालय पर भव्य जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन सभाओं का मुख्य उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करना और उन्हें बसपा की मूल विचारधारा ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ की याद दिलाना है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए बसपा आगामी चुनावों के लिए अपनी ताकत का प्रदर्शन करेगी।

बसपा के रणनीतिकारों के लिए मायावती का यह जन्मदिन एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। पार्टी हाल के वर्षों में चुनावी मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए जन्मदिन के इस अवसर को एक राजनीतिक आंदोलन में बदलने की कोशिश की जा रही है। मंडलों में होने वाली इन सभाओं में मायावती के कार्यकाल के दौरान किए गए विकास कार्यों, कानून-व्यवस्था के मॉडल और दलित सशक्तिकरण के कदमों की चर्चा की जा रही है। कार्यकर्ताओं को संदेश दिया जा रहा है कि पार्टी एक बार फिर अपने पुराने वैभव को प्राप्त करने के लिए तैयार है।

मायावती की राजनीतिक विरासत और संघर्षमयी सफर

मायावती का 70वां जन्मदिन उनकी राजनीतिक यात्रा के सात दशकों के अनुभव का प्रतीक है। दिल्ली के एक साधारण परिवार में जन्मी मायावती ने कांशीराम के मार्गदर्शन में राजनीति की शुरुआत की थी। 1995 में जब वे पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने इतिहास रच दिया था। वे भारत के किसी भी राज्य की मुख्यमंत्री बनने वाली पहली दलित महिला थीं। उनके चार मुख्यमंत्रित्व काल के दौरान उत्तर प्रदेश में प्रशासन की सख्ती और दलित चेतना के उदय को आज भी याद किया जाता है।

मायावती ने अपने कार्यकाल में स्मारकों, पार्कों और मूर्तियों के माध्यम से दलित महापुरुषों को वह सम्मान दिलाया, जो दशकों तक उपेक्षित रहा था। उनकी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ की नीति ने 2007 में बसपा को पूर्ण बहुमत की सरकार तक पहुँचाया था, जहाँ उन्होंने ब्राह्मण और दलित समीकरण को सफलतापूर्वक साधा था। आज उनके 70वें जन्मदिन पर उनके समर्थक उन्हें ‘बहन जी’ के रूप में याद करते हुए उनके संघर्षों को नमन कर रहे हैं।

जन्मदिन पर सादगी और सेवा का संदेश

यद्यपि बसपा कार्यकर्ता पूरे उत्साह के साथ जन्मदिन मना रहे हैं, लेकिन मायावती ने अक्सर अपने जन्मदिन को सादगी से मनाने और गरीब-जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया है। ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के तहत पार्टी कार्यकर्ता आज अस्पतालों में फल वितरण, गरीबों को कंबल और वस्त्र दान करने जैसे सामाजिक कार्य भी कर रहे हैं। लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय को फूलों और झंडों से सजाया गया है, जहाँ सुबह से ही समर्थकों का तांता लगा हुआ है।

मायावती आज अपने जन्मदिन के मौके पर प्रेस वार्ता के माध्यम से देश और प्रदेश की जनता को संबोधित भी कर सकती हैं। माना जा रहा है कि अपने संबोधन में वे देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, गठबंधन की राजनीति और बसपा की भविष्य की योजनाओं पर अपना रुख स्पष्ट करेंगी। उनके समर्थकों को उम्मीद है कि वे इस अवसर पर किसी बड़ी घोषणा के साथ कार्यकर्ताओं में नया संचार करेंगी।

निष्कर्ष: भारतीय राजनीति का एक अनिवार्य स्तंभ

मायावती का 70वां जन्मदिन भारतीय लोकतंत्र की उस विविधता और संघर्ष का उत्सव है, जहाँ एक साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर एक महिला देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता के शिखर तक पहुँचती है। उत्तर प्रदेश की राजनीति का कोई भी समीकरण मायावती की चर्चा के बिना अधूरा है। आज जब भाजपा और सपा जैसी बड़ी शक्तियां मैदान में हैं, तब भी मायावती का ‘कोर वोट बैंक’ और उनकी प्रशासनिक छवि उन्हें एक अनिवार्य खिलाड़ी बनाए रखती है।

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव की बधाइयां इस बात की तस्दीक करती हैं कि मायावती का कद दलीय सीमाओं से ऊपर है। 70 साल की आयु में भी उनकी सक्रियता और पार्टी पर उनकी पकड़ यह दर्शाती है कि आने वाले समय में वे एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका में नजर आ सकती हैं। बसपा समर्थकों के लिए आज का दिन केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि अपने हक और हुकूक की लड़ाई को और तेज करने के संकल्प का दिन है।

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