• January 19, 2026

मकर संक्रांति 2026: अयोध्या की पावन सरयू में आस्था का उफान, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

अयोध्या धाम: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पूरी तरह भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। सूर्य के उत्तरायण होने और मकर राशि में प्रवेश के इस पावन पर्व पर रामनगरी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि हर तरफ ‘जय श्री राम’ और ‘हर-हर सरयू’ के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। बुधवार की मध्यरात्रि से ही सरयू के तट पर भक्तों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था, जो गुरुवार भोर होते-होते लाखों की भीड़ में तब्दील हो गया। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट के शुरुआती आकलन के अनुसार, इस पवित्र दिन पर लगभग पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने की संभावना है।

अत्यधिक ठंड और शीतलहर के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सुबह के समय सरयू के विभिन्न घाटों, विशेषकर नयाघाट और राम की पैड़ी पर तिल रखने की जगह नहीं बची है। न केवल अयोध्या बल्कि आसपास के जनपदों जैसे सुल्तानपुर, बाराबंकी, गोंडा, बस्ती और अंबेडकरनगर से भी लोग बड़ी संख्या में निजी वाहनों, बसों और ट्रेनों के जरिए रामनगरी पहुंचे हैं। उदया तिथि की मान्यता के कारण आज का दिन दान और स्नान के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है।

स्नान का मुहूर्त और आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष शास्त्र और अयोध्या के स्थानीय विद्वानों के अनुसार, मकर संक्रांति का मुख्य उत्सव आज बृहस्पतिवार को ही मनाया जा रहा है। पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि यद्यपि सूर्य देव ने बुधवार दोपहर 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश कर लिया था, लेकिन अयोध्या की परंपरा के अनुसार उदया तिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को ही पर्व के लिए मान्य माना जाता है।

पंडित वर्धन के अनुसार, आज सुबह 4:51 बजे से लेकर 5:44 बजे तक का समय स्नान के लिए विशेष पुण्यदायी रहा। ब्रह्म मुहूर्त में सरयू जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने का आध्यात्मिक महत्व वेदों और पुराणों में वर्णित है। माना जाता है कि इस समय स्नान करने से न केवल शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलती है, बल्कि मानसिक शांति और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक विश्वास के चलते हजारों श्रद्धालु भोर की पहली किरण से पहले ही बर्फीले जल में डुबकी लगाते नजर आए।

रामलला और हनुमानगढ़ी के दरबार में भारी भीड़

सरयू स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं का रेला सीधे कनक भवन, हनुमानगढ़ी और भव्य राम जन्मभूमि मंदिर की ओर प्रस्थान कर रहा है। बुधवार को एकादशी के पावन अवसर पर भी भारी भीड़ देखी गई थी, लेकिन आज मकर संक्रांति पर यह संख्या कई गुना बढ़ गई है। हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों से लेकर राम पथ तक भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई हैं।

रामलला के दरबार में आज का दिन विशेष है। परंपरा के अनुसार, आज भगवान को खिचड़ी का विशेष भोग लगाया जा रहा है। अयोध्या के लगभग सभी प्रमुख मठों और मंदिरों में भगवान को तिल, गुड़ और नए अनाज से बनी खिचड़ी अर्पित की गई है। श्रद्धालुओं के बीच भी ‘खिचड़ी’ प्रसाद का वितरण बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। राम जन्मभूमि परिसर में सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था को लेकर ट्रस्ट ने विशेष सतर्कता बरती है ताकि वृद्ध और दिव्यांग श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।

नगर निगम की ‘हाईटेक’ सफाई और प्रबंधन

लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अयोध्या नगर निगम ने इस बार अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने के लिए 24 घंटे सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए 960 नियमित मेला कर्मियों के अलावा 528 अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। सफाई व्यवस्था को तीन पालियों में बांटा गया है, जिससे दिन-रात निरंतर स्वच्छता बनी रहे।

इस बार अयोध्या की सफाई व्यवस्था में आधुनिक तकनीक का भी समावेश किया गया है। बीएमएस (ब्रूम मशीन सिस्टम) और मैकेनाइज्ड सफाई मशीनों के जरिए सड़कों को चकाचक किया जा रहा है। धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एंटी स्मॉग गन का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, पीए सिस्टम (पब्लिक एड्रेस सिस्टम) के माध्यम से श्रद्धालुओं को स्वच्छता बनाए रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए निरंतर जागरूक किया जा रहा है।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के पुख्ता इंतजाम

भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए नयाघाट पर एक अत्याधुनिक मेला कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। यहाँ से सीसीटीवी कैमरों के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही, खोया-पाया कैंप को भी सक्रिय कर दिया गया है, जो पूरे माघ मेला अवधि तक काम करता रहेगा।

श्रद्धालुओं के लिए 15 प्रमुख स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है ताकि शहर के भीतर यातायात बाधित न हो। पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए मेला क्षेत्र में दर्जनों वाटर पॉइंट बनाए गए हैं। नगर निगम ने 19 मोबाइल टॉयलेट और कई सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया है ताकि खुले में शौच की समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सके। महिलाओं के लिए सरयू घाटों पर पर्याप्त संख्या में चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं।

कड़ाके की ठंड से राहत के लिए अलाव और हीटर की व्यवस्था

जनवरी की भीषण ठंड को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं को गर्मी प्रदान करने के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। अयोध्या धाम के सार्वजनिक स्थलों पर 345 चिन्हित स्थानों पर नियमित रूप से अलाव जलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, इस बार एक नई पहल करते हुए 36 प्रमुख स्थलों पर ‘गैस हीटर अलाव’ की व्यवस्था की गई है, जो पारंपरिक अलाव की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रभावी हैं। रैन बसेरों में भी अतिरिक्त बिस्तरों और हीटरों का इंतजाम किया गया है ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे न सोना पड़े।

निराश्रित गोवंशों के लिए विशेष अभियान

नगर निगम ने इस बार श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ-साथ पशु कल्याण पर भी ध्यान दिया है। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार के अनुसार, मेला क्षेत्र में निराश्रित गोवंशों के कारण किसी श्रद्धालु को चोट न पहुंचे और गोवंश भी सुरक्षित रहें, इसके लिए तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें 24 घंटे सक्रिय हैं और आवारा गोवंशों को पकड़कर सुरक्षित गोशालाओं में पहुंचा रही हैं। यह कदम विशेष रूप से उन संकरी गलियों के लिए उठाया गया है जहाँ भीड़ अत्यधिक होती है।

निष्कर्ष: आस्था और आधुनिक प्रबंधन का संगम

अयोध्या में आज मकर संक्रांति का पर्व प्राचीन परंपराओं और आधुनिक प्रबंधन के सुंदर मेल के रूप में उभरा है। जहाँ एक ओर श्रद्धालु सदियों पुरानी मान्यताओं के अनुसार सरयू में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन हाईटेक मशीनों और डिजिटल प्रणालियों के जरिए उनकी यात्रा को सुगम बना रहा है। राम नगरी में उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रतीक है कि अयोध्या अब न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि वैश्विक स्तर के तीर्थाटन के लिए पूरी तरह तैयार है। शाम तक दान-पुण्य और दर्शन का यह सिलसिला जारी रहेगा, जिससे पूरी अयोध्या नगरी दिव्य और अलौकिक आभा से दमकती रहेगी।

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