• January 31, 2026

केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना (CGHS) में बड़ा बदलाव: अब परामर्श के लिए देने होंगे 700 और 350 रुपये, मंत्रालय ने जारी किया स्पष्टीकरण

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी महत्वाकांक्षी योजना ‘सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम’ (CGHS) के ओपीडी (OPD) परामर्श शुल्क की दरों में महत्वपूर्ण संशोधन और स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय के ईएचएस (EHS) अनुभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के अनुसार, अब सीजीएचएस के लगभग 47 लाख लाभार्थियों को ओपीडी परामर्श के लिए नई निर्धारित दरों के आधार पर भुगतान करना होगा। यह कदम पिछले साल की दरों में हुए संशोधन के बाद उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति को समाप्त करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ओपीडी शुल्क को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 700 रुपये और 350 रुपये। यह दरें डॉक्टर की योग्यता, विशेषज्ञता और अस्पताल की श्रेणी के आधार पर तय की गई हैं। इस बदलाव का सीधा असर उन लाखों परिवारों पर पड़ेगा जो अपनी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पूरी तरह से सीजीएचएस नेटवर्क पर निर्भर हैं।

क्यों पड़ी दरें स्पष्ट करने की आवश्यकता?

पिछले वर्ष स्वास्थ्य मंत्रालय ने सीजीएचएस दरों में एक व्यापक संशोधन किया था, ताकि बढ़ती चिकित्सा लागतों और निजी अस्पतालों की मांगों के बीच संतुलन बनाया जा सके। हालांकि, इस संशोधन के बाद लाभार्थियों और पैनल में शामिल (Empanelled) अस्पतालों के बीच परामर्श शुल्क को लेकर भारी भ्रम की स्थिति बन गई थी। कई अस्पतालों द्वारा गलत तरीके से उच्च शुल्क वसूले जाने की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, वहीं लाभार्थी यह समझ नहीं पा रहे थे कि किस डॉक्टर के पास जाने पर उन्हें कितनी फीस देनी होगी।

मंत्रालय को लगातार ऐसे प्रश्न प्राप्त हो रहे थे कि 700 रुपये की उच्च दर वास्तव में किन परिस्थितियों में लागू होगी और 350 रुपये की दर किसके लिए है। इसी अस्पष्टता को दूर करने के लिए मंत्रालय ने पिछले सप्ताह सभी मंत्रालयों और विभागों को एक आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किया, जिसमें विस्तार से बताया गया है कि नई दरें कब और कैसे लागू होंगी।

सुपर स्पेशलिस्ट परामर्श के लिए अब 700 रुपये का शुल्क

नए दिशा-निर्देशों के तहत, सबसे महत्वपूर्ण बदलाव ‘सुपर स्पेशलिस्ट’ (Super Specialist) डॉक्टरों के परामर्श शुल्क में किया गया है। अब सीजीएचएस द्वारा सूचीबद्ध सभी निजी अस्पतालों में यदि कोई लाभार्थी सुपर स्पेशलिस्ट से ओपीडी परामर्श लेता है, तो उसे 700 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि, मंत्रालय ने इसके लिए कड़ी शर्तें निर्धारित की हैं। यह 700 रुपये का शुल्क केवल तभी मान्य होगा जब परामर्श देने वाला डॉक्टर डीएम (DM) या एमसीएच (MCh) जैसी मान्यता प्राप्त सुपर-स्पेशलिटी योग्यता रखता हो।

इसके अतिरिक्त, यह भी अनिवार्य है कि वह चिकित्सक उसी विशिष्ट सुपर-स्पेशलिटी क्षेत्र में परामर्श दे रहा हो जिसके लिए उसने डिग्री हासिल की है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई डॉक्टर कार्डियोलॉजी में डीएम है, तो वह केवल हृदय संबंधी परामर्श के लिए ही 700 रुपये का शुल्क ले सकेगा। यदि कोई सामान्य विशेषज्ञ या बिना डीएम/एमसीएच डिग्री वाला डॉक्टर सेवाएं दे रहा है, तो वह यह उच्च शुल्क वसूलने का पात्र नहीं होगा।

सामान्य विशेषज्ञ परामर्श के लिए 350 रुपये की दर

उन मामलों में जहां लाभार्थी किसी विशेषज्ञ डॉक्टर (Specialist) से परामर्श लेता है, जिसके पास सुपर-स्पेशलिस्ट (DM/MCh) की योग्यता नहीं है, वहां ओपीडी परामर्श शुल्क 350 रुपये निर्धारित किया गया है। यह दर उन सभी सूचीबद्ध अस्पतालों पर लागू होगी जहां विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अधिकांश सामान्य परामर्शों के लिए यही दर प्रभावी रहेगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उच्च शुल्क केवल उन्हीं सेवाओं के लिए लिया जाए जहां उच्च स्तर की चिकित्सा विशेषज्ञता शामिल है। लाभार्थियों को सलाह दी गई है कि वे अस्पताल में भुगतान करने से पहले डॉक्टर की योग्यता और विशेषज्ञता की जांच अवश्य कर लें, ताकि उनसे अधिक शुल्क न वसूला जा सके।

इन-पेशेंट (IPD) सेवाओं के लिए पुराने नियम रहेंगे बरकरार

ओपीडी शुल्क में बदलाव के साथ-साथ मंत्रालय ने अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों यानी इन-पेशेंट डिपार्टमेंट (IPD) के परामर्श नियमों पर भी स्थिति साफ की है। आईपीडी मामलों में सीजीएचएस के मौजूदा मानदंडों को ही यथावत रखा गया है। नए आदेश के मुताबिक, अस्पताल में भर्ती मरीज के लिए प्रति विशेषज्ञ, प्रति दिन अधिकतम दो परामर्श ही स्वीकार्य होंगे।

इसका अर्थ यह है कि यदि कोई मरीज अस्पताल में भर्ती है, तो एक विशेषज्ञ डॉक्टर दिन में अधिकतम दो बार के दौरे (Visits) का शुल्क ही सीजीएचएस के तहत क्लेम कर सकता है। इससे अधिक परामर्श होने पर उसका भार योजना के मानदंडों के अनुसार अस्पताल या मरीज को वहन करना होगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आईपीडी के इन नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, केवल ओपीडी दरों के आधार पर परामर्श की गिनती को पुन: स्पष्ट किया गया है।

लाभार्थियों और अस्पतालों पर इस बदलाव का प्रभाव

इस नई दर प्रणाली के लागू होने से सीजीएचएस के 47 लाख लाभार्थियों पर मिश्रित प्रभाव पड़ने की संभावना है। एक ओर जहां दरों के स्पष्ट होने से अस्पतालों द्वारा की जाने वाली ओवर-बिलिंग पर लगाम लगेगी, वहीं सुपर-स्पेशलिस्ट परामर्श के लिए जेब से अधिक खर्च करना पड़ सकता है (उन मामलों में जहां प्रतिपूर्ति बाद में होती है)।

सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के लिए भी यह एक स्वागत योग्य कदम माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से परामर्श शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अस्पतालों का तर्क था कि पुरानी दरों पर अनुभवी सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की सेवाएं प्रदान करना आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं था। अब 700 रुपये की दर निर्धारित होने से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टर सीजीएचएस पैनल वाले अस्पतालों में सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिसका अंततः लाभ मरीजों को ही मिलेगा।

मंत्रालय की निगरानी और भविष्य की तैयारी

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपने ज्ञापन में यह भी संकेत दिया है कि वह सभी सूचीबद्ध अस्पतालों द्वारा इन दरों के कार्यान्वयन की कड़ी निगरानी करेगा। यदि कोई अस्पताल बिना आवश्यक योग्यता (DM/MCh) के 700 रुपये का शुल्क वसूलता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें पैनल से बाहर करना या जुर्माना लगाना शामिल है।

यह संशोधन डिजिटल इंडिया अभियान के तहत सीजीएचएस के आधुनिकीकरण का भी हिस्सा है। मंत्रालय अब सभी लाभार्थियों के डेटा और परामर्श को ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ट्रैक कर रहा है, जिससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस डॉक्टर ने किस श्रेणी के तहत परामर्श दिया है।

अंततः, सरकार का लक्ष्य सीजीएचएस लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खजाने और लाभार्थियों पर बोझ भी तर्कसंगत रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि ओपीडी शुल्क को डॉक्टर की डिग्री से जोड़ना एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण है, जो निजी क्षेत्र में भी प्रचलित है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।

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