• March 7, 2026

उत्तर प्रदेश में मौसम का यू-टर्न: दो दिन की धूप के बाद फिर लौटेगी हाड़ कंपाने वाली ठंड, पश्चिमी यूपी में शीतलहर और तराई में कोहरे का ऑरेंज अलर्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश समेत समूचे उत्तर भारत में मौसम एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। पिछले दो दिनों से मिल रही गुनगुनी धूप की राहत अब खत्म होने वाली है। मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक, सोमवार से प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ का असर पूरी तरह समाप्त हो जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप पहाड़ों से आने वाली बर्फीली पछुआ हवाएं मैदानी इलाकों में दस्तक देंगी। इससे न केवल तापमान में भारी गिरावट आएगी, बल्कि गलन बढ़ने से लोगों को एक बार फिर कंपकंपा देने वाली सर्दी का सामना करना पड़ेगा। आने वाले तीन दिनों में पारा 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर सकता है, जिससे शीतलहर जैसे हालात बनने की प्रबल संभावना है।

धूप की क्षणिक राहत के बाद पछुआ हवाओं का प्रहार

बीता रविवार उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों के लिए काफी राहत भरा रहा। राजधानी लखनऊ सहित राज्य के कई हिस्सों में खिली धूप के कारण अधिकतम और न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। कोहरे की चादर भी कुछ हद तक छंटी थी, जिससे यातायात और सामान्य जनजीवन पटरी पर लौटता दिखाई दे रहा था। लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह राहत मात्र एक ‘इंटरवल’ की तरह थी। सोमवार से हवाओं का रुख बदलते ही उत्तरी-पछुआ हवाएं अपनी तीव्रता बढ़ाएंगी, जिससे गलन और ठिठुरन का नया दौर शुरू होगा।

आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बाद अब वातावरण में नमी कम होगी और शुष्क बर्फीली हवाएं सीधे मैदानी इलाकों में प्रवेश करेंगी। इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई के क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। हालांकि, दिन के समय आसमान साफ रहने और धूप खिलने की संभावना है, लेकिन शाम ढलते ही कड़ाके की ठंड अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी, जो सुबह तक जारी रहेगी।

पश्चिमी यूपी के 6 जिलों में शीतलहर और तराई में ‘ऑरेंज अलर्ट’

मौसम विभाग ने विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों—गाजियाबाद, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली और संभल—के लिए शीतलहर की चेतावनी जारी की है। इन जिलों में रात का तापमान सामान्य से काफी नीचे जा सकता है। इसके साथ ही, तराई और नेपाल सीमा से सटे 15 जिलों में घने कोहरे को लेकर ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में दृश्यता (Visibility) शून्य से 50 मीटर तक रह सकती है, जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित होने की आशंका है।

कोहरे की मार झेलने वाले प्रमुख जिलों में गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, हापुड़ और बिजनौर शामिल हैं। इन इलाकों में सुबह के समय दृश्यता बेहद कम रहने के कारण वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वहीं, प्रदेश के अन्य 23 जिलों में भी हल्के से मध्यम कोहरे की संभावना जताई गई है।

पड़ोसी राज्यों में भी ठंड का कहर: दिल्ली में 13 साल का रिकॉर्ड टूटा

उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी ठंड ने अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पालम इलाके में सोमवार सुबह न्यूनतम तापमान 3.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 2013 के बाद इस क्षेत्र का सबसे कम तापमान है। दिल्ली में शीत लहर और घने कोहरे के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

राजस्थान के कई हिस्सों में तो तापमान शून्य से नीचे (माइनस) चला गया है। प्रतापगढ़ में न्यूनतम तापमान -2 डिग्री और बाड़मेर में -1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे वहां फसलों पर पाला पड़ने की संभावना बढ़ गई है। पंजाब और हरियाणा में भी स्थिति गंभीर है। पंजाब का बठिंडा 1.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा, जबकि हरियाणा के हिसार में पारा 2.2 डिग्री तक लुढ़क गया। अमृतसर और रोहतक जैसे शहरों में भी ‘कोल्ड डे’ की स्थिति बनी हुई है, जहाँ दिन का तापमान भी सामान्य से काफी कम है।

पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और आगामी तीन दिनों का पूर्वानुमान

हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बर्फबारी ही मैदानी इलाकों में इस कड़ाके की ठंड का मुख्य कारण है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में न्यूनतम तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे बना हुआ है। कश्मीर के कई हिस्सों में जमने वाली ठंड (Freezing Cold) के कारण जल स्रोत भी जमने लगे हैं। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और असम सहित आठ राज्यों में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है।

मौसम विभाग की सलाह है कि अगले 72 घंटों तक बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गलन बढ़ने के कारण हृदय और सांस के रोगियों की समस्याएं बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने भी नगर निगमों को अलाव जलाने और रैन बसेरों में पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे पाले से फसलों को बचाने के लिए सिंचाई और अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं। उत्तर भारत के लिए आने वाला एक सप्ताह कड़ाके की सर्दी की चुनौतियों से भरा रहने वाला है।

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