• January 19, 2026

अयोध्या में मकर संक्रांति की धूम: रामलला को अर्पित की गई पतंग, सरयू के तट पर उमड़ा आस्था का सैलाब

अयोध्या धाम: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में मकर संक्रांति का पर्व अभूतपूर्व हर्षोल्लास और आध्यात्मिक जीवंतता के साथ मनाया जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के इस पवित्र अवसर पर पूरी रामनगरी ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गुंजायमान है। 15 जनवरी की भोर से ही सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा, जो कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद पूरी श्रद्धा के साथ आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। इस वर्ष मकर संक्रांति का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद यह एक विशेष उत्सव के रूप में उभर रहा है, जहाँ परंपरा और आधुनिक श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

प्रशासनिक अनुमान के अनुसार, आज मकर संक्रांति के मुख्य पर्व पर अयोध्या में लाखों की संख्या में भक्तों के आने की संभावना है। मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन ने भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन की व्यवस्था को चाक-चौबंद किया है। मकर संक्रांति का यह पर्व न केवल ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत में दान-पुण्य और सेवा भाव के महत्व को भी रेखांकित करता है।

सरयू तट पर आस्था की डुबकी और दान का विधान

मकर संक्रांति के पर्व पर स्नान का विशेष महत्व माना गया है, और जब बात अयोध्या की हो, तो सरयू स्नान का पुण्य फल और भी बढ़ जाता है। गुरुवार तड़के 4:00 बजे से ही नया घाट, राम की पैड़ी और गुप्तार घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। घने कोहरे और गिरते पारे के बीच भी भक्तों की आस्था कम नहीं हुई। सरयू की पवित्र जलधारा में डुबकी लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने तट पर ही पुरोहितों के सानिध्य में सूर्य देव की उपासना की।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, खिचड़ी, ऊनी वस्त्र और अन्न के दान का विशेष महत्व है। स्नान के पश्चात घाटों पर दान-पुण्य का सिलसिला शुरू हुआ, जहाँ श्रद्धालुओं ने अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य अर्जित किया। सरयू तट का दृश्य अत्यंत मनोहारी था, जहाँ एक ओर वैदिक मंत्रों का जाप हो रहा था, तो दूसरी ओर भजन-कीर्तन की मधुर स्वरलहरियां वातावरण को भक्तिमय बना रही थीं।

रामलला को अर्पित की गई पतंग: एक अनूठी परंपरा

इस वर्ष मकर संक्रांति पर राम मंदिर में एक बहुत ही सुंदर और भावनात्मक दृश्य देखने को मिला। मकर संक्रांति के अवसर पर रामलला को विशेष रूप से पतंग भेंट की गई। भारतीय संस्कृति में, विशेषकर उत्तर भारत में, मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसी परंपरा को जीवंत करते हुए, राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों की ओर से रामलला को रंग-बिरंगी पतंगें अर्पित की गईं। माना जाता है कि पतंगें खुशी और नई शुरुआत का प्रतीक हैं, और भगवान को इन्हें भेंट करना भक्तों के अटूट प्रेम और समर्पण को दर्शाता है।

मंदिर के मुख्य पुजारी के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। रामलला का भव्य श्रृंगार किया गया और उन्हें उत्तरायण के उपलक्ष्य में विशेष वस्त्र धारण कराए गए। इस दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्तों ने अपनी आँखों से इस दृश्य को निहारा और ‘जय श्री राम’ के नारे लगाकर समूचे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार, रामलला के दरबार में लोक परंपराओं का समावेश करना समाज को एकजुट करने का एक माध्यम है।

विशेष भोग और खिचड़ी का प्रसाद

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर रामलला को विशेष व्यंजनों का भोग लगाया गया। भगवान के भोग में मुख्य रूप से तिल और गुड़ से बने पकवान, रेवड़ी और गजक को शामिल किया गया। इसके साथ ही, पारंपरिक रूप से तैयार की गई खिचड़ी का भोग भी अर्पित किया गया। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन खिचड़ी का सेवन और दान ग्रहों के दोषों को दूर करता है और स्वास्थ्य प्रदान करता है।

मंदिर दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं को भी प्रसाद के रूप में खिचड़ी और तिल-गुड़ वितरित किया गया। अयोध्या के विभिन्न मठ-मंदिरों और आश्रमों में भी विशाल भंडारों का आयोजन किया गया है, जहाँ श्रद्धालुओं को भोजन और प्रसाद उपलब्ध कराया जा रहा है। राम नगरी की गलियों में खिचड़ी की खुशबू और भक्तों का उत्साह यह बयां कर रहा है कि अयोध्या के लिए यह केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासनिक मुस्तैदी

श्रद्धालुओं की भारी आमद को देखते हुए अयोध्या प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। सरयू घाटों पर जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि स्नान के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। इसके अलावा, राम मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है और यातायात को नियंत्रित करने के लिए डायवर्जन लागू किया गया है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम ने अलाव की व्यवस्था की है और रैन बसेरों को सुसज्जित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अलर्ट पर हैं और विभिन्न स्थानों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की गई हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को रामलला के दर्शन करने और सरयू स्नान करने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

अयोध्या की बदली तस्वीर और बढ़ता पर्यटन

पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या का जो कायाकल्प हुआ है, उसका प्रभाव इस बार की मकर संक्रांति पर साफ दिखाई दे रहा है। सुगम सड़कें, आधुनिक घाट और भव्य राम मंदिर के कारण पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। न केवल उत्तर भारत, बल्कि दक्षिण और पश्चिम भारत से भी बड़ी संख्या में लोग मकर संक्रांति मनाने अयोध्या पहुंचे हैं।

स्थानीय व्यवसायियों के लिए भी यह उत्सव बड़े लाभ का अवसर लेकर आया है। धार्मिक सामग्री, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। अयोध्या अब न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह विश्व स्तरीय पर्यटन मानचित्र पर भी तेजी से उभर रही है। मकर संक्रांति का यह उल्लास इस बात का प्रमाण है कि अयोध्या की विरासत और विकास एक साथ कदम बढ़ा रहे हैं।

निष्कर्ष: आस्था और विश्वास का विजय पर्व

अयोध्या में मकर संक्रांति का यह महापर्व हमें अपनी जड़ों और परंपराओं के प्रति सम्मान सिखाता है। रामलला के चरणों में पतंग अर्पित करना और सरयू की गोद में आस्था की डुबकी लगाना, यह दर्शाता है कि आधुनिकता के इस युग में भी हमारी सनातन आस्था उतनी ही अटूट है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश समाज में नई ऊर्जा, प्रकाश और समरसता का संचार करे, इसी प्रार्थना के साथ अयोध्या के संत-महंतों ने देशवासियों को आशीर्वाद दिया है।

मकर संक्रांति का यह दिन अयोध्या के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। जैसे-जैसे सूर्य की किरणें सरयू के जल को स्वर्णिम आभा दे रही हैं, भक्तों का संकल्प और भी दृढ़ हो रहा है। राम नगरी से उठा यह भक्ति का ज्वार पूरे देश को एकता और भाईचारे के सूत्र में पिरोने का कार्य कर रहा है।

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