• January 19, 2026

सेना दिवस 2026: राष्ट्र के प्रहरी जवानों के शौर्य और निस्वार्थ सेवा को देश का नमन

नई दिल्ली: आज पूरा भारत अपनी सेना के पराक्रम, बलिदान और अटूट संकल्प का उत्सव मना रहा है। 15 जनवरी, भारतीय सैन्य इतिहास का वह गौरवशाली दिन है जब हमारी सेना को अपना पहला भारतीय नेतृत्व मिला था। इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री सहित देश के तमाम शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय सेना के वीर जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की है। सेना दिवस का यह आयोजन न केवल सीमाओं पर तैनात प्रहरियों के अदम्य साहस को याद करने का अवसर है, बल्कि यह राष्ट्र की संप्रभुता और अखंडता के प्रति हमारे सामूहिक संकल्प को दोहराने का भी दिन है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार सुबह भारतीय सेना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारी सेना निस्वार्थ सेवा का एक वैश्विक प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सैनिक दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और दुर्गम क्षेत्रों में भी जिस दृढ़ संकल्प के साथ मां भारती की रक्षा करते हैं, वह अद्वितीय है। सेना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह उस विश्वास का उत्सव है जो हर भारतीय अपने सैनिकों पर रखता है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश: वीरता और अटूट प्रतिबद्धता को नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक संबोधन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से सेना के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की कर्तव्यपरायणता देश के भीतर सुरक्षा और अटूट विश्वास की भावना जगाती है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन वीर सपूतों को याद किया जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने कहा कि देश उन लोगों को अत्यंत सम्मान और गौरव के साथ याद करता है जिन्होंने अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

पीएम मोदी के अनुसार, भारतीय सेना की सबसे बड़ी विशेषता उनका ‘राष्ट्र प्रथम’ का भाव है। चाहे वह तपता हुआ रेगिस्तान हो, बर्फ से ढकी हिमालय की चोटियां हों या घने जंगल, भारतीय सैनिक कभी विचलित नहीं होते। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि सैनिकों का अदम्य साहस ही वह आधार है जिस पर आधुनिक और विकसित भारत की नींव टिकी है। उन्होंने सेना के परिवारों के धैर्य और बलिदान की भी सराहना की, जो परोक्ष रूप से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देते हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सराहा सेना का ‘राष्ट्र प्रथम’ भाव

देश की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने भी इस गौरवपूर्ण अवसर पर अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय सेना देश की एकता, संप्रभुता और अखंडता की रक्षा में सदैव एक चट्टान की तरह अडिग रही है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों की भूमिका केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं है। सीमाओं की सुरक्षा के साथ-साथ, प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय संकटों और शांति अभियानों के दौरान भारतीय सेना ने जिस संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य किया है, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

राष्ट्रपति ने सेना के ‘राष्ट्र प्रथम’ के दर्शन को हर नागरिक के लिए मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में सेना का अनुशासन और मानवीय सेवा का दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि देश का हर नागरिक सुरक्षित महसूस करे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सेना के मूल्यों ने देश की लोकतांत्रिक जड़ों को और भी मजबूती प्रदान की है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: आत्मनिर्भर और आधुनिक सेना का संकल्प

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के पेशेवर कौशल और वैश्विक स्तर पर अर्जित किए गए सम्मान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सीमाओं पर निरंतर सतर्कता बरतने वाली हमारी सेना ने अपने अनुशासन और तकनीकी दक्षता के माध्यम से पूरी दुनिया में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। राजनाथ सिंह ने सैनिकों के अदम्य साहस को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र उनकी अटूट प्रतिबद्धता के कारण ही चैन की नींद सोता है।

रक्षा मंत्री ने सरकार के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार एक ऐसी सेना के निर्माण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है जो ‘आत्मनिर्भर’ और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो। उन्होंने रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण और आधुनिक हथियारों के समावेश का जिक्र करते हुए कहा कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने सैनिकों के साथ एकजुट होकर खड़ा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सेना के आधुनिकीकरण में संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी, ताकि वे किसी भी शत्रु के दांत खट्टे करने में सदैव सक्षम रहें।

उपराष्ट्रपति ने दी वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सेना दिवस पर देश की सुरक्षा में तैनात सभी सैन्य अधिकारियों, जवानों और पूर्व सैनिकों को अपनी श्रद्धांजलि और शुभकामनाएं अर्पित कीं। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अटूट साहस और अनुशासन हर भारतीय नागरिक के लिए एक आदर्श है। उपराष्ट्रपति ने विशेष रूप से कर्तव्य पथ पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि भारत की एकता और अखंडता के प्रति सेना की निस्वार्थ सेवा ही वह सूत्र है जो देश को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक जोड़े रखता है। उपराष्ट्रपति ने पूर्व सैनिकों के योगदान को भी सराहा, जिन्होंने अपनी युवावस्था देश की सेवा में समर्पित कर दी और आज भी समाज में अनुशासन का उदाहरण पेश कर रहे हैं।

क्यों मनाया जाता है 15 जनवरी को सेना दिवस?

भारतीय सेना के इतिहास में 15 जनवरी की तारीख एक महान उपलब्धि की प्रतीक है। दरअसल, साल 1949 में इसी दिन फील्ड मार्शल के.एम. कारियाप्पा (जो उस समय लेफ्टिनेंट जनरल थे) ने ब्रिटिश कमांडर-इन-चीफ जनरल सर फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। यह क्षण भारतीय सेना के पूर्णत: भारतीयकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम था। कारियाप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने थे।

इस ऐतिहासिक हस्तांतरण की याद में हर साल 15 जनवरी को सेना दिवस मनाया जाता है। यह दिन ब्रिटिश औपनिवेशिक विरासत से निकलकर एक स्वतंत्र राष्ट्र की अपनी संप्रभु सेना के उदय का प्रतीक है। तब से लेकर आज तक, भारतीय सेना ने कई युद्धों और ऑपरेशनों में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है और आज यह दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेनाओं में से एक मानी जाती है।

वैश्विक परिदृश्य में भारतीय सेना की बढ़ती धमक

आज जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं, भारतीय सेना का महत्व और भी बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों (UN Peacekeeping Missions) में भारतीय सैनिकों का योगदान सर्वोपरि रहा है। विदेशी सेनाओं के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास और मानवीय सहायता के वैश्विक मिशनों ने भारतीय सेना को एक ‘परोपकारी शक्ति’ के रूप में स्थापित किया है।

प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री के नेतृत्व में सेना अब ‘नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर’ और ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ जैसी आधुनिक तकनीकों को अपना रही है। सेना दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों और परेडों में भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का प्रदर्शन भी देखने को मिला, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम कर रहा है।

निष्कर्ष: शौर्य और समर्पण की अटूट गाथा

अंततः, सेना दिवस केवल भाषणों और परेडों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बलिदान के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है जो एक सैनिक और उसका परिवार हर क्षण देता है। प्रधानमंत्री मोदी से लेकर राष्ट्रपति तक, सभी ने एक स्वर में सेना की उस भावना को नमन किया है जो ‘स्वयं से पहले सेवा’ (Service Before Self) के सिद्धांत पर आधारित है।

देश की सुरक्षा और समृद्धि के बीच सीधा संबंध है और भारतीय सेना उस सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल है। सेना दिवस पर पूरा देश गर्व के साथ जय हिंद के नारे लगा रहा है और यह सुनिश्चित कर रहा है कि हमारे वीरों की गाथाएं आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी।

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