सीबीएसई का छात्रों को बड़ा अवसर: UPU 2026 अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता शुरू, विजेता को मिलेंगे 50,000 रुपये
नई दिल्ली: डिजिटल युग में जहां संदेश भेजने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है, वहां कलम और कागज की महत्ता को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक शानदार पहल की है। सीबीएसई ने देशभर के छात्रों को ‘UPU 2026 अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता’ में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किया है। यह प्रतियोगिता न केवल छात्रों की रचनात्मक लेखन क्षमता को निखारेगी, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकद पुरस्कार और पदक जीतने का सुनहरा मौका भी प्रदान करेगी।
यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) द्वारा आयोजित इस वैश्विक स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए डाक विभाग और सीबीएसई मिलकर काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले छात्र को 50,000 रुपये का भारी-भरकम नकद पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही, देश का सबसे बेहतरीन पत्र स्विट्जरलैंड में होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए भेजा जाएगा।
प्रतियोगिता का विषय: डिजिटल युग में मानवीय संवेदनाओं की तलाश
इस वर्ष की प्रतियोगिता के लिए बेहद प्रासंगिक और विचारोत्तेजक विषय चुना गया है। छात्रों को इस विषय पर अपनी लेखनी चलानी होगी कि “डिजिटल दुनिया में मानवीय जुड़ाव क्यों महत्वपूर्ण है”। आज के समय में जब लोग सोशल मीडिया और तकनीकी उपकरणों के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, तब वास्तविक मानवीय स्पर्श, सहानुभूति और आमने-सामने के संवाद की कमी महसूस की जा रही है।
प्रतिभागियों को इस विषय पर अपने किसी मित्र को पत्र लिखना होगा। इस पत्र के माध्यम से छात्रों को यह समझाना होगा कि तकनीक के विस्तार के बावजूद मानवीय रिश्तों की गर्माहट और भावनात्मक जुड़ाव का कोई विकल्प क्यों नहीं हो सकता। यह विषय छात्रों को उनकी सोच को गहराई देने और सामाजिक संबंधों के प्रति उनकी समझ को विकसित करने का अवसर देगा।
भागीदारी के नियम और आयु सीमा: कौन कर सकता है आवेदन?
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए सख्त नियम और पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए हैं। सीबीएसई के निर्देशानुसार, यह प्रतियोगिता 9 से 15 साल तक की आयु वाले सभी बच्चों के लिए खुली है। आयु की गणना के लिए एक विशेष मानक रखा गया है—कोई भी छात्र जो 5 मई 2026 तक 16 वर्ष की आयु पूरी कर रहा है, वह इसमें भाग लेने के लिए पात्र नहीं होगा।
उम्र की पुष्टि के लिए छात्रों को जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड या स्कूल द्वारा जारी आधिकारिक प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल वही छात्र इसमें शामिल हो सकते हैं जो निर्धारित आयु सीमा के भीतर आते हैं, ताकि प्रतियोगिता का स्तर और निष्पक्षता बनी रहे।
पुरस्कारों की बौछार: सर्किल से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सम्मान
प्रतियोगिता को अधिक आकर्षक बनाने के लिए पुरस्कारों को विभिन्न स्तरों पर विभाजित किया गया है। सबसे पहले सर्किल स्तर पर मूल्यांकन होगा, जहाँ प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले को 25,000 रुपये, दूसरे स्थान के लिए 10,000 रुपये और तीसरे स्थान के लिए 5,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
इसके बाद असली मुकाबला राष्ट्रीय स्तर पर होगा। राष्ट्रीय स्तर के विजेताओं के लिए पुरस्कार राशि को दोगुना कर दिया गया है। यहाँ प्रथम पुरस्कार विजेता को 50,000 रुपये और एक प्रमाण पत्र मिलेगा। द्वितीय पुरस्कार के रूप में 25,000 रुपये और तृतीय पुरस्कार के रूप में 10,000 रुपये की राशि तय की गई है। यह राशि सीधे तौर पर छात्र की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय गौरव: स्विट्जरलैंड की यात्रा और पदक जीतने का मौका
राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ घोषित किए गए पत्र को भारत सरकार की ओर से आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) को भेजा जाएगा। स्विट्जरलैंड के बर्न में स्थित UPU मुख्यालय में दुनिया भर से आए पत्रों के बीच शीर्ष विजेताओं का चयन किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजेताओं को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के साथ-साथ विशेष प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
सबसे बड़ी उपलब्धि स्वर्ण पदक जीतने वाले छात्र के लिए होगी। नियमों के मुताबिक, स्वर्ण पदक विजेता को स्विट्जरलैंड के बर्न स्थित UPU मुख्यालय जाने का गौरव प्राप्त हो सकता है। यदि किन्हीं कारणों से यह यात्रा संभव नहीं होती है, तो UPU द्वारा कोई अन्य मूल्यवान वैकल्पिक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। यह किसी भी छात्र के लिए एक वैश्विक मंच पर अपने देश का नाम रोशन करने का सबसे बड़ा मौका है।
आयोजन की प्रक्रिया: स्कूलों के लिए समय-सीमा
सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे अपने परिसर में इस प्रतियोगिता का आयोजन सुनिश्चित करें। पत्र लेखन की यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑफलाइन होगी। स्कूलों को छात्रों द्वारा लिखे गए सर्वश्रेष्ठ पत्रों को 20 मार्च 2026 तक अपने संबंधित डाक सर्किल कार्यालयों में भेजना होगा।
इसके बाद सर्किल कार्यालय इन पत्रों की गहन जांच करेंगे और प्रत्येक सर्किल से तीन सर्वश्रेष्ठ पत्रों का चयन करेंगे। इन चयनित पत्रों को आगे की प्रक्रिया के लिए 31 मार्च 2026 तक डाक निदेशालय को भेजा जाना अनिवार्य है। बोर्ड ने कड़ाई से सूचित किया है कि किसी भी व्यक्ति या स्कूल द्वारा सीधे निदेशालय को भेजे गए पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे; उन्हें उचित चैनल (सर्किल कार्यालय) के माध्यम से ही आना होगा।
लेखन के तकनीकी दिशा-निर्देश: 800 शब्दों की मर्यादा
प्रतियोगिता में शामिल होने वाले छात्रों को कुछ तकनीकी नियमों का पालन करना होगा। पत्र को पूरी तरह से पारंपरिक पत्र के प्रारूप (Format) में होना चाहिए, जिसमें पता, दिनांक, संबोधन और अंत जैसे सभी अंग शामिल हों। पत्र अनिवार्य रूप से हाथ से लिखा (Handwritten) होना चाहिए। टाइप किए गए पत्रों को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
शब्द सीमा को लेकर सीबीएसई ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा है। पत्र की अधिकतम लंबाई 800 शब्द तय की गई है। यदि कोई छात्र 800 शब्दों से अधिक लिखता है, तो उसके पत्र का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा। भाषा के चयन में छात्रों को काफी स्वतंत्रता दी गई है। वे अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी आधिकारिक भाषा (जैसे हिंदी, बंगाली, तमिल, मराठी आदि) में अपना पत्र लिख सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज
इच्छुक प्रतिभागियों को एक विस्तृत आवेदन पत्र भरना होगा, जिसमें उनका पूरा नाम, माता-पिता का नाम, घर और स्कूल का पूरा पता, जन्म तिथि, लिंग और केंद्र का नाम जैसी जानकारी शामिल होगी। आवेदन पत्र के साथ छात्रों को अपनी तीन नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो और आयु प्रमाण पत्र की एक छायाप्रति संलग्न करनी होगी।
यह आवेदन पत्र दो प्रतियों में संबंधित डाक सर्किल के नोडल अधिकारी के पास जमा करना होगा। जमा किए गए आवेदन की एक प्रति छात्र के पास रहेगी, जो प्रतियोगिता वाले दिन ‘हॉल टिकट’ के रूप में काम आएगी। हालांकि उत्तर पुस्तिका स्कूल या विभाग द्वारा प्रदान की जाएगी, लेकिन छात्रों को अपनी कलम या पेंसिल स्वयं लानी होगी।
निष्कर्ष: तकनीक के बीच परंपरा का संगम
UPU 2026 पत्र लेखन प्रतियोगिता केवल एक स्पर्धा नहीं है, बल्कि यह नई पीढ़ी को उनकी जड़ों और लेखन की कला से जोड़ने का एक प्रयास है। ऐसे समय में जब संचार केवल ई-मेल और इंस्टेंट मैसेजिंग तक सिमट गया है, हाथ से लिखे गए पत्र की भावना और उसकी गंभीरता को समझना छात्रों के लिए एक अनूठा अनुभव होगा। सीबीएसई की यह पहल युवाओं को डिजिटल दुनिया की चुनौतियों पर विचार करने और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखने के लिए प्रेरित करेगी।