• January 19, 2026

महाराष्ट्र निकाय चुनाव: भाजपा की प्रचंड बढ़त से बदला मुंबई का सियासी भूगोल, विपक्ष ने लगाया धांधली का आरोप

महाराष्ट्र की राजनीति के लिए आज का दिन एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) समेत राज्य की 29 नगर पालिकाओं के चुनाव परिणाम आज घोषित किए जा रहे हैं। शुरुआती रुझानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगी दल ‘महायुति’ ने राज्य के शहरी निकायों में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। विशेष रूप से मुंबई में, भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उन क्षेत्रों में भी सेंधमारी की है, जिन्हें दशकों से शिवसेना (यूबीटी) का अभेद्य गढ़ माना जाता था। इन रुझानों ने महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, जहां एक ओर भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए धांधली के आरोप लगाए हैं।

बीएमसी चुनाव के ये नतीजे न केवल स्थानीय प्रशासन के भविष्य को तय करेंगे, बल्कि यह आगामी विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा संकेत माने जा रहे हैं। रुझानों के मुताबिक, भाजपा कई नगर निगमों में पूर्ण बहुमत की ओर अग्रसर है, जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को अपने सबसे मजबूत गढ़ मुंबई में ही अस्तित्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। इस परिणाम ने यह साबित कर दिया है कि मुंबई का मतदाता अब भावनात्मक नारों से आगे बढ़कर विकास और बुनियादी ढांचे की राजनीति की ओर रुख कर रहा है।

संजय राउत का पलटवार: मतदाता सूची और ईवीएम पर उठाए सवाल

जैसे-जैसे मतगणना के रुझान भाजपा के पक्ष में आने लगे, महाविकास अघाड़ी के नेताओं ने आक्रामक रुख अपना लिया है। शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर तीखे प्रहार किए। राउत ने आरोप लगाया कि मुंबई के वोटिंग पैटर्न में कुछ बहुत ही संदिग्ध और चौंकाने वाली चीजें देखने को मिली हैं। उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में शिवसेना (यूबीटी), मनसे और कांग्रेस का प्रभाव है, वहां हजारों मतदाताओं के नाम अचानक सूची से गायब कर दिए गए। राउत के अनुसार, इन लोगों ने पिछले विधानसभा चुनाव में मतदान किया था, लेकिन इस बार उनका नाम सूची में नहीं मिला।

संजय राउत ने केवल मतदाता सूची ही नहीं, बल्कि ईवीएम मशीनों की कार्यप्रणाली पर भी संदेह जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मतदान केंद्रों पर मशीनें ठीक से काम नहीं कर रही थीं और जब शिकायतों के साथ चुनाव आयोग के पास जाया गया, तो वहां कोई सुनने वाला नहीं था। राउत ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद भाजपा के शीर्ष नेताओं और चुनाव आयोग के कर्मचारियों के बीच गोपनीय बैठकें हुई हैं। उन्होंने मतदान प्रतिशत के अंतिम आंकड़े आने से पहले ही एग्जिट पोल्स के नतीजों और भाजपा के जश्न की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए। विपक्ष का मानना है कि यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है ताकि विपक्ष के मनोबल को तोड़ा जा सके।

भाजपा का पलटवार: काम के आधार पर मिला जनता का विश्वास

विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए भाजपा ने इन रुझानों को सुशासन की जीत बताया है। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि जनता ने हमारे काम को देखा है और उसी के आधार पर हमें वोट दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल चुनावी भाषणों और खोखले वादों पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि धरातल पर काम करके दिखाती है। पाटिल ने शिवसेना (यूबीटी) पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब वे सत्ता में थे, तो उन्होंने काम क्यों नहीं किया? उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान भाजपा द्वारा किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुश्किल समय में हम लोगों के साथ खड़े थे।

चंद्रकांत पाटिल ने भाजपा की जीत के आंकड़ों पर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि बीएमसी में भाजपा 90 से कम सीटें नहीं जीतेगी, जबकि उनके सहयोगी करीब 40 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह संख्या बढ़ सकती है, लेकिन इससे कम नहीं होगी। पुणे जैसे महत्वपूर्ण शहर में भाजपा ने 115 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। पाटिल के अनुसार, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का साथ आना या कांग्रेस और एनसीपी का हाथ मिलाना केवल निजी स्वार्थों के लिए है, और जनता यह अच्छी तरह समझती है कि ऐसा गठबंधन लोगों के हित में नहीं हो सकता।

सुधांशु त्रिवेदी का ‘शिवाजी’ संदेश और नेतृत्व का आभार

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने मुंबई के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे एक सांस्कृतिक और रणनीतिक जीत बताया। उन्होंने मराठी भाषा के प्रसिद्ध गीत ‘जय-जय महाराष्ट्र माझा’ का उल्लेख करते हुए राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया। त्रिवेदी ने इस जीत की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज की ऐतिहासिक विजयों से करते हुए कहा कि जिस तरह शिवाजी की चतुरंगिणी सेना मन में उमंग लेकर चलती थी, उसी तरह आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा आगे बढ़ रही है।

त्रिवेदी ने कहा कि मुंबई की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास के उस मॉडल के साथ हैं जो भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित कर रहा है। उन्होंने विपक्ष के आरोपों पर चुटकी लेते हुए कहा कि जब जनता का आशीर्वाद साथ होता है, तो विपक्ष को केवल मशीनों और सूचियों में दोष नजर आने लगता है। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मुंबई जैसे महानगरीय क्षेत्र में मिली सफलता उनकी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर जनता की मुहर है।

तरुण चुघ का प्रहार: ‘आईना साफ करने से कालिख नहीं मिटती’

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने भी विपक्ष और विशेष रूप से कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत की जनता बहुत समझदार है और वह देख रही है कि कौन देश निर्माण के लिए काम कर रहा है और कौन केवल विरोध की राजनीति। चुघ ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक जनता कांग्रेस और उसके ‘इंडी’ गठबंधन को उनके कर्मों की सजा दे रही है।

राहुल गांधी के बयानों पर तंज कसते हुए चुघ ने कहा, “राहुल जी, आप बार-बार आईना साफ करने की कोशिश मत करिए, क्योंकि आईना साफ करने से आपके चेहरे पर लगी राजनीतिक विफलता की कालिख नहीं मिटेगी।” उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए और अपनी गलत नीतियों पर मंथन करना चाहिए। भाजपा का मानना है कि यह जीत उनके उस राष्ट्रवाद और विकास के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है जिसे जनता ने खुले दिल से स्वीकार किया है।

निष्कर्ष: एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत

मुंबई समेत महाराष्ट्र की 29 नगर पालिकाओं के ये रुझान और संभावित नतीजे राज्य की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहे हैं। बीएमसी से ‘मातोश्री’ के प्रभाव का कम होना और भाजपा का मुख्य शक्ति के रूप में उभरना एक बहुत बड़ा उलटफेर है। हालांकि विपक्ष के धांधली के आरोपों ने चुनावी प्रक्रिया पर एक बहस छेड़ दी है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भाजपा गठबंधन इस समय अजेय स्थिति में नजर आ रहा है। आने वाले घंटों में जब सभी सीटों के अंतिम परिणाम आ जाएंगे, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इन आरोपों को कानूनी रूप देता है या फिर अपनी रणनीतियों में बदलाव करके आगे की लड़ाई की तैयारी करता है।

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