• February 11, 2026

भारतीय तटरक्षक बल की बड़ी स्ट्राइक: मुंबई तट के पास अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी गिरोह का भंडाफोड़, तीन जहाज जब्त

मुंबई। भारतीय तटरक्षक बल (इंडियन कोस्ट गार्ड) ने अरब सागर में एक बेहद जटिल और खतरनाक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। शुक्रवार को मुंबई तट से दूर गहरे समंदर में चलाए गए एक सघन और सुनियोजित ऑपरेशन के दौरान तीन संदिग्ध जहाजों को घेराबंदी कर पकड़ा गया। ये जहाज भारतीय समुद्री सीमा के भीतर अवैध तरीके से तेल की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण (शिप-टू-शिप ट्रांसफर) के बड़े खेल में शामिल थे। कोस्ट गार्ड की इस कार्रवाई ने न केवल तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त किया है, बल्कि समुद्र के रास्ते होने वाली अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के भारत के संकल्प को भी दोहराया है।

तटरक्षक बल के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा ऑपरेशन खुफिया जानकारी और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र के आधार पर शुरू किया गया था। तटरक्षक बल के अत्याधुनिक जहाजों और हवाई टोही विमानों ने मिलकर इस संयुक्त अभियान को अंजाम दिया। गुरुवार को मुंबई से लगभग 100 नॉटिकल मील पश्चिम में भारतीय विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर संदिग्ध हलचल देखी गई थी। कोस्ट गार्ड के सर्विलांस सिस्टम ने एक मोटर टैंकर की असामान्य गतिविधि को ट्रैक किया। डेटा विश्लेषण से यह संकेत मिले कि यह जहाज अपनी तय गति और मार्ग से हटकर कुछ विशेष बिंदुओं पर रुक रहा है। डिजिटल जांच में आगे यह भी उभरकर सामने आया कि दो अन्य छोटे जहाज भी उसी संदिग्ध मोटर टैंकर की ओर बढ़ रहे थे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि समुद्र के बीचोबीच किसी अवैध माल के हस्तांतरण की तैयारी चल रही है।

जैसे ही कोस्ट गार्ड की टीमों ने संदिग्ध जहाजों की घेराबंदी की, बोर्डिंग टीमों ने तत्काल जहाजों पर धावा बोल दिया। अधिकारियों ने जहाजों पर मौजूद क्रू से पूछताछ की और जहाजों के लॉग बुक, इलेक्ट्रॉनिक नेविगेशन डेटा और संबंधित दस्तावेजों को जब्त कर लिया। गहन तलाशी के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ये जहाज एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हिस्सा हैं जो युद्धग्रस्त देशों से बेहद कम कीमत पर कच्चा या रिफाइंड तेल खरीदते थे। युद्ध की स्थिति वाले देशों में तेल की कीमतें गिर जाती हैं, जिसका फायदा उठाकर यह गिरोह वहां से तेल उठाता था और फिर अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के आसपास छिपते-छिपाते इसे दूसरे मोटर टैंकरों में सप्लाई कर देता था। इस प्रक्रिया में किसी भी देश के कानून या सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) का पालन नहीं किया जाता था, जिससे भारत समेत कई तटीय देशों को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा था।

जांच में यह भी पता चला है कि इस पूरे नेटवर्क को दुनिया के अलग-अलग देशों में बैठे हैंडलर नियंत्रित कर रहे थे। ये हैंडलर डिजिटल माध्यमों से जहाजों की लोकेशन और तेल के खरीदारों के साथ तालमेल बिठाते थे। पकड़े गए जहाजों के मालिकों के तार भी दूसरे देशों से जुड़े होने के प्रारंभिक सबूत मिले हैं। तस्करी के इस खेल को छिपाने के लिए यह गिरोह ‘घोस्ट शिप’ की तकनीक अपनाता था। जहाज अक्सर अपनी पहचान और नाम बदलते रहते थे ताकि किसी भी देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियां उन्हें ट्रैक न कर सकें। वे अपने ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (AIS) को भी अक्सर बंद कर देते थे, जिससे रडार पर उनकी पहचान धुंधली हो जाती थी। हालांकि, भारतीय कोस्ट गार्ड की आधुनिक तकनीक और सतर्कता के सामने उनकी यह चालाकी नाकाम साबित हुई।

पकड़े गए तीनों जहाजों को अब कड़ी सुरक्षा के बीच मुंबई बंदरगाह लाया जा रहा है। वहां सीमा शुल्क विभाग (कस्टम्स), इंटेलिजेंस एजेंसियां और स्थानीय कानून प्रवर्तन अधिकारी मिलकर विस्तृत जांच करेंगे। अधिकारियों का मानना है कि जहाजों के डिजिटल रिकॉर्ड और संचार उपकरणों की फॉरेंसिक जांच से इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सकता है। यह मामला न केवल आर्थिक अपराध से जुड़ा है, बल्कि भारत की तटीय सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत संवेदनशील है, क्योंकि इस तरह के अवैध जहाजों का उपयोग भविष्य में हथियारों या अन्य प्रतिबंधित सामग्री की तस्करी के लिए भी किया जा सकता है।

कोस्ट गार्ड की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए रक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि समुद्र के बीचोबीच तस्करी के इतने बड़े खेल को पकड़ना भारतीय नौसैनिक सुरक्षा की बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां और बड़े खुलासे होने की संभावना है। फिलहाल, मुंबई तट पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है और अरब सागर में गश्त बढ़ा दी गई है।

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