• January 19, 2026

भारत का विदेश व्यापार: वैश्विक चुनौतियों के बीच निर्यात में 1.87% की वृद्धि, 850 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर कदम

नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद भारतीय निर्यात क्षेत्र ने दिसंबर 2025 में अपनी मजबूती का परिचय दिया है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज (वस्तु) निर्यात सालाना आधार पर 1.87 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38.51 अरब डॉलर दर्ज किया गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इन आंकड़ों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत का निर्यात क्षेत्र लगातार सकारात्मक प्रदर्शन कर रहा है, जो घरेलू विनिर्माण और वैश्विक मांग के बीच बेहतर तालमेल को दर्शाता है।

हालांकि, निर्यात में इस बढ़त के साथ-साथ आयात में हुई तीव्र वृद्धि ने व्यापार घाटे की स्थिति को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इसके बावजूद, सरकार को भरोसा है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारत अपने निर्यात लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लेगा।

निर्यात में सकारात्मक रुझान और वार्षिक प्रदर्शन

दिसंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक मांग स्थिर बनी हुई है। पिछले वर्ष (दिसंबर 2024) की तुलना में निर्यात का 38.51 अरब डॉलर तक पहुंचना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए बताया कि केवल दिसंबर ही नहीं, बल्कि चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान भी भारत का प्रदर्शन सुदृढ़ रहा है। इस अवधि में कुल निर्यात 2.44 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 330.29 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है।

मंत्रालय को उम्मीद है कि यदि यही गति बनी रही, तो वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात 850 अरब डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर सकता है। यह अनुमान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती पैठ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों के सफल क्रियान्वयन की ओर इशारा करता है।

आयात में वृद्धि और बढ़ता व्यापार घाटा

निर्यात में वृद्धि के सकारात्मक समाचार के बीच आयात के आंकड़ों ने व्यापार संतुलन पर दबाव डाला है। दिसंबर 2025 में भारत का आयात बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया, जबकि दिसंबर 2024 में यह आंकड़ा 58.43 अरब डॉलर था। आयात में हुई इस बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप, दिसंबर माह के लिए व्यापार घाटा 25 अरब डॉलर दर्ज किया गया है।

व्यापार घाटे में इस वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे माल और ऊर्जा संसाधनों की बढ़ती घरेलू मांग को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब देश की आंतरिक अर्थव्यवस्था विकास की ओर अग्रसर होती है, तो औद्योगिक गतिविधियों के लिए आयात में वृद्धि स्वाभाविक है। हालांकि, निर्यात और आयात के बीच के इस बढ़ते अंतर को कम करना आने वाले समय में नीति निर्माताओं के लिए एक प्रमुख प्राथमिकता होगी।

वस्तु एवं सेवा व्यापार का संयुक्त विश्लेषण

यदि हम वस्तुओं और सेवाओं दोनों के संयुक्त व्यापार पर नजर डालें, तो उद्योग मंत्रालय के आंकड़े एक व्यापक तस्वीर पेश करते हैं। दिसंबर 2025 में भारत का कुल संयुक्त निर्यात 74.01 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के इसी महीने (74.77 अरब डॉलर) की तुलना में मामूली रूप से कम है। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक स्तर पर सेवाओं की मांग में आए उतार-चढ़ाव के कारण हो सकती है।

दूसरी ओर, संयुक्त आयात में तीव्र वृद्धि देखी गई है। एक वर्ष पहले जो आयात 76.23 अरब डॉलर था, वह अब बढ़कर 80.94 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस कारण देश का कुल संयुक्त व्यापार घाटा दिसंबर 2025 में बढ़कर 6.92 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जो पिछले वर्ष के इसी महीने में मात्र 1.46 अरब अमेरिकी डॉलर था। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि व्यापार घाटे में वृद्धि का प्राथमिक कारण आयात में हुई तेज बढ़त है, जबकि निर्यात साल-दर-साल आधार पर लगभग स्थिर बना हुआ है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और भविष्य की राह

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने वैश्विक व्यापारिक संबंधों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक वार्ता का दौर निरंतर जारी है। दोनों देश व्यापारिक बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, इसलिए इन वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम आने वाले महीनों में निर्यात के आंकड़ों को और बेहतर बना सकते हैं।

निष्कर्ष के रूप में, दिसंबर 2025 के व्यापारिक आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। जहाँ एक ओर मर्चेंडाइज निर्यात में वृद्धि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सिद्ध करती है, वहीं बढ़ता व्यापार घाटा सतर्क रहने का संकेत देता है। 850 अरब डॉलर के कुल निर्यात लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को आने वाली तिमाही में अपने निर्यात आधार को और अधिक विविधता देने और आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में काम करना होगा।

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