• January 19, 2026

पहाड़ों पर लौटने वाली है ‘सफेद चांदी’ की चमक: पश्चिमी विक्षोभ ने दी दस्तक, गणतंत्र दिवस तक भारी बर्फबारी और बारिश का अलर्ट

नई दिल्ली/शिमला: उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों में लंबे समय से बना हुआ सूखे का सन्नाटा अब टूटने वाला है। प्रकृति ने अपनी करवट लेनी शुरू कर दी है और पहाड़ों की खामोश वादियों में मौसम की धड़कनें फिर से सुनाई देने लगी हैं। एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों की ओर रुख कर लिया है, जिसके प्रभाव से ऊंचाई वाले इलाकों में बादलों का डेरा जमना शुरू हो गया है। करीब 12 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर ठंडी हवाओं के साथ नमी की खुशबू घुलने लगी है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उत्तर भारत की पहाड़ियां जल्द ही बर्फ की सफेद चादर से ढकने वाली हैं।

इस साल शीत ऋतु का आधा सफर लगभग सूखा ही बीता है। दिसंबर और जनवरी के शुरुआती पखवाड़े में बर्फबारी की भारी कमी ने न केवल पर्यटकों को निराश किया, बल्कि खेती और पर्यावरण के लिहाज से भी चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी थी। लेकिन मौसम विभाग और निजी पूर्वानुमान एजेंसियों के ताजा अनुमान बताते हैं कि अगले सप्ताह से तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। 22 जनवरी से मौसम का मिजाज काफी सख्त होने के आसार हैं, जिसका चरम प्रभाव गणतंत्र दिवस 2026 के आसपास दिखाई देगा।

सूखे की मार झेल रहे पहाड़ों को मिलेगी बड़ी राहत

इस वर्ष की सर्दियों ने पहाड़ों पर सूखे का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर का पूरा महीना लगभग सूखा गुजर गया, जिससे पहाड़ी राज्यों में मौसमी वर्षा और बर्फबारी का घाटा 90 प्रतिशत से भी अधिक दर्ज किया गया। जनवरी 2026 के पहले दो हफ्तों में भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ और कई क्षेत्रों में तो बर्फबारी की कमी 100 प्रतिशत तक पहुंच गई। लंबे समय से रूखी पड़ी पहाड़ियों और खाली पड़े स्की-रिजॉर्ट्स अब एक बार फिर गुलजार होने की उम्मीद कर रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी पश्चिमी विक्षोभ इतना सक्रिय है कि यह लंबे समय से चले आ रहे सूखे के असर को काफी हद तक कम कर सकता है। अगले सप्ताह से शुरू होने वाला यह सिलसिला करीब एक हफ्ते तक जारी रहने की संभावना है। विशेष रूप से वीकेंड के आसपास पहाड़ों पर भारी हिमपात (Heavy Snowfall) की उम्मीद जताई गई है। यह बदलाव न केवल पर्यटन उद्योग के लिए संजीवनी साबित होगा, बल्कि गर्मियों के लिए ग्लेशियरों के पुनर्भरण और सेब की फसल के लिए भी अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।

22 जनवरी से शुरू होगा मौसम का महासंग्राम

निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के अनुसार, 22 या 23 जनवरी से उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में एक साथ बदलाव दिखेगा। इस मौसम प्रणाली की शुरुआत सबसे पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के क्षेत्रों से होगी। शुरुआत में हल्की बारिश और बर्फबारी होगी, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेंगे, इसकी तीव्रता और भौगोलिक दायरा दोनों में भारी वृद्धि दर्ज की जाएगी।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 24 से 26 जनवरी के बीच उत्तर भारत के सभी पर्वतीय राज्यों—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड—को एक साथ कठोर मौसम का सामना करना पड़ सकता है। इस दौरान ऊंची चोटियों पर भारी से बहुत भारी बर्फबारी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में तेज बारिश की संभावना है। बादलों की चादर कश्मीर घाटी से लेकर तराई के क्षेत्रों तक फैल चुकी है, जो आने वाले बड़े मौसमी परिवर्तन की प्रस्तावना लिख रही है।

चक्रवाती परिसंचरण और पश्चिमी विक्षोभ का दोहरा हमला

इस बार मौसम केवल एक दिशा से प्रभावित नहीं हो रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने राजस्थान के मध्य हिस्सों के ऊपर एक ‘प्रेरित चक्रवाती परिसंचरण’ (Induced Cyclonic Circulation) बनने की संभावना भी जताई है। जब पहाड़ों पर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है और मैदानी इलाकों में ऐसा चक्रवाती सिस्टम बनता है, तो मौसम की गतिविधियां कई गुना तेज हो जाती हैं। इन दोनों प्रणालियों के संयुक्त असर से न केवल पहाड़ों पर बर्फ गिरेगी, बल्कि मैदानी राज्यों में भी बारिश का दायरा काफी बढ़ जाएगा।

चक्रवाती परिसंचरण के कारण नमी वाली हवाएं तेजी से उत्तर-पश्चिम भारत की ओर बढ़ेंगी। इसका सीधा असर राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर पर पड़ेगा। इन दोनों प्रणालियों के टकराव से गरज-चमक के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि मौसम विभाग ने अगले 4 से 5 दिनों के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

मैदानी इलाकों में कोहरा, गलन और गणतंत्र दिवस पर बारिश के आसार

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने बुलेटिन में कहा है कि 22 से 24 जनवरी के बीच उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों में बारिश की प्रबल संभावना है। बारिश के इस दौर से पहले, यानी अगले 2 से 3 दिनों तक उत्तर-पश्चिमी भारत और बिहार के इलाकों में घना कोहरा छाए रहने की आशंका है। कोहरे के कारण दृश्यता कम रहेगी और ठंडी हवाओं के चलते ठिठुरन में जबरदस्त इजाफा होगा।

पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने का सीधा असर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों पर भी पड़ेगा। इन राज्यों में 24 जनवरी के बाद हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। बारिश के कारण वातावरण में मौजूद प्रदूषण के कण तो साफ होंगे, लेकिन हवा में नमी बढ़ने से गलन और ठिठुरन बढ़ जाएगी। गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर होने वाले कार्यक्रमों पर भी बादलों और हल्की बूंदाबांदी का साया रह सकता है। मौसम विभाग ने सलाह दी है कि लोग ठंड और बारिश के इस दोहरे हमले से बचने के लिए उचित इंतजाम रखें, क्योंकि इस हफ्ते न्यूनतम तापमान में गिरावट और शीत लहर जैसी स्थिति फिर से पैदा हो सकती है।

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