• January 19, 2026

अंडर-19 विश्व कप: भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने बांग्लादेशी खिलाड़ी से नहीं मिलाया हाथ; क्रिकेट के मैदान पर फिर दिखा कूटनीतिक तनाव

बुलावायो (जिम्बाब्वे): जिम्बाब्वे के बुलावायो में खेले जा रहे अंडर-19 विश्व कप के दौरान शनिवार को खेल भावना से इतर एक ऐसी घटना घटी, जिसने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। भारत और बांग्लादेश के बीच ग्रुप-ए के महत्वपूर्ण मुकाबले की शुरुआत एक बड़े विवाद के साथ हुई। टॉस के समय भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने बांग्लादेश के उप-कप्तान जवाद अबरार से हाथ मिलाने से साफ इनकार कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब दोनों खिलाड़ी मैच की आधिकारिक शुरुआत के लिए मैदान के बीचों-बीच मौजूद थे। क्रिकेट जैसे ‘जेंटलमैन गेम’ में हाथ न मिलाने की इस घटना को भारत और बांग्लादेश के बीच बढ़ते राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव के सीधे असर के रूप में देखा जा रहा है।

टॉस के दौरान का घटनाक्रम और टीमों की चुप्पी

जिम्बाब्वे के आसमान में छाई घटाओं और बारिश के कारण यह मुकाबला अपने निर्धारित समय से कुछ देरी से शुरू हुआ। जब अंपायरों ने टॉस के लिए सिक्का उछाला, तब बांग्लादेश की ओर से उनके नियमित कप्तान की अनुपस्थिति में उप-कप्तान जवाद अबरार मैदान पर आए। टॉस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद, परंपरा के अनुसार जब जवाद अबरार ने सौजन्यवश हाथ मिलाने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तो भारतीय कप्तान आयुष म्हात्रे ने उसे नजरअंदाज कर दिया और बिना हाथ मिलाए ही वहां से चले गए।

इस घटना के बाद मैदान पर मौजूद अंपायर और मैच रेफरी भी कुछ क्षणों के लिए अवाक रह गए। हालांकि, मैच शुरू होने के बाद भी न तो भारतीय टीम प्रबंधन और न ही बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) की ओर से इस व्यवहार को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि मैदान पर दिखा यह कड़ा रुख केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं और सीमाओं के पार चल रहे तनाव का प्रतिबिंब है।

पाकिस्तान के खिलाफ ‘नो हैंडशेक’ नीति का विस्तार?

भारतीय कप्तान का यह व्यवहार पिछले साल की उस नीति की याद दिलाता है, जिसे भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ अपनाया था। गौरतलब है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए दुखद नरसंहार और उसके बाद भारतीय सेना द्वारा सीमा पार की गई जवाबी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में भारी कड़वाहट आ गई थी। उस घटना के बाद हुए एशिया कप के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम ने आधिकारिक रूप से पाकिस्तानी खिलाड़ियों के साथ हाथ न मिलाने की नीति अपनाई थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब वही ‘नो हैंडशेक’ (No Handshake) नीति संभवतः बांग्लादेश तक विस्तृत होती दिख रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार यह संदेश देने की कोशिश की है कि जब तक आतंक और हिंसा का माहौल बना रहेगा, तब तक ‘मैदान पर सामान्य व्यवहार’ संभव नहीं है। आयुष म्हात्रे द्वारा हाथ न मिलाना इसी कड़े कूटनीतिक संदेश का एक हिस्सा माना जा रहा है।

भारत और बांग्लादेश के बीच बिगड़ते राजनीतिक समीकरण

हाल के कुछ महीनों में भारत और उसके पड़ोसी देश बांग्लादेश के बीच संबंधों में अभूतपूर्व गिरावट आई है। बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां अल्पसंख्यकों पर हुए कथित अत्याचारों और हिंसा की खबरों ने भारत में भारी आक्रोश पैदा किया है। भारत के कई राज्यों में बांग्लादेश सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर रैलियां निकाली गई हैं और कूटनीतिक स्तर पर भी भारत ने अपनी चिंताएं कड़ी भाषा में दर्ज कराई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांग्लादेश में बढ़ती कट्टरपंथी ताकतों और भारत विरोधी भावनाओं ने नई दिल्ली को अपना रुख कड़ा करने पर मजबूर कर दिया है। इसी तनाव का असर अब खेल के मैदान पर भी साफ दिखने लगा है, जहां खिलाड़ी अब केवल एथलीट नहीं, बल्कि अपने देश की भावनाओं के प्रतिनिधि के रूप में व्यवहार कर रहे हैं।

क्रिकेट के गलियारों में तनाव: KKR और टी20 विश्व कप विवाद

क्रिकेट के मैदान पर यह तल्खी रातों-रात पैदा नहीं हुई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने कड़ा रुख अपनाते हुए आईपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) को निर्देश दिया कि वे बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज कर दें। बीसीसीआई के इस फैसले को बांग्लादेश में एक बड़े झटके के तौर पर देखा गया।

जवाब में, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए घोषणा की कि वे भारत में आयोजित होने वाले आगामी टी20 विश्व कप 2026 के लिए अपनी टीम नहीं भेजेंगे। बीसीबी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से औपचारिक अनुरोध किया है कि बांग्लादेश के सभी मुकाबलों को भारत से हटाकर श्रीलंका स्थानांतरित किया जाए। क्रिकेट की दो महाशक्तियों के बीच प्रशासनिक स्तर पर चल रही यह खींचतान अब जूनियर स्तर के विश्व कप में खिलाड़ियों के व्यवहार तक पहुँच गई है।

खेल भावना बनाम राष्ट्रीय स्वाभिमान

आयुष म्हात्रे के इस कदम ने सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। जहां एक वर्ग इसे खेल भावना के विपरीत बता रहा है, वहीं एक बड़ा वर्ग इसे राष्ट्रीय स्वाभिमान और पड़ोसी देश की नीतियों के खिलाफ एक जायज विरोध मान रहा है। प्रशंसकों का कहना है कि जब सीमा पर तनाव हो और पड़ोसी देश में भारतीयों के प्रति विद्वेष का भाव हो, तो मैदान पर सौहार्द दिखाना संभव नहीं है।

बुलावायो की इस घटना ने आईसीसी के लिए भी एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि यह कड़वाहट इसी तरह बनी रही, तो आगामी टूर्नामेंटों में भारत और बांग्लादेश के बीच मैचों का आयोजन सुरक्षा और अनुशासन के लिहाज से एक बड़ी सिरदर्दी बन सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आईसीसी इस मामले में हस्तक्षेप करती है या इसे द्विपक्षीय कूटनीति का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

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