• February 11, 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: अंतिम मतदाता सूची और चुनावी तैयारियों पर दिल्ली में बड़ी बैठक, क्या एक ही चरण में होगा मतदान?

नई दिल्ली/कोलकाता: चुनावी आहट के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीतिक सरगर्मियां अब देश की राजधानी दिल्ली स्थानांतरित हो गई हैं। राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का काम लगभग पूरा होने के बाद, अब सबकी नजरें अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन पर टिकी हैं। इसी सिलसिले में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार आज यानी मंगलवार, 10 फरवरी को भारतीय निर्वाचन आयोग (ईसीआई) की फुल बेंच के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। सोमवार देर रात दिल्ली पहुंचे मनोज कुमार इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के साथ मतदाता सूची की नई तारीखों और राज्य में सुरक्षा इंतजामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

इस बैठक की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष पीठ, जिसकी अध्यक्षता न्यायमूर्ति सूर्यकांत कर रहे थे, ने निर्वाचन आयोग को एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) को 14 फरवरी की निर्धारित समय सीमा के बाद कम से कम एक अतिरिक्त सप्ताह का समय दिया जाना चाहिए। न्यायालय का मानना है कि यह अतिरिक्त समय अधिकारियों को मतदाता सूची की बारीकी से जांच यानी स्क्रूटनी पूरी करने में मदद करेगा, ताकि अंतिम वोटर लिस्ट पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी हो सके। अदालत के इस हस्तक्षेप के बाद अब पुरानी समय सारिणी में बदलाव अनिवार्य हो गया है और आज की बैठक में इसी नई समय सीमा पर मुहर लगने की संभावना है।

सीईओ कार्यालय से प्राप्त आंतरिक जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची के प्रकाशन की जो तारीख पहले 14 फरवरी तय की गई थी, वह अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में 21 फरवरी से पहले संभव नहीं लग रही है। जानकारों का कहना है कि प्रशासन और आयोग की कोशिश होगी कि इस महीने के अंत तक, यानी फरवरी के आखिरी दिन तक हर हाल में अंतिम मतदाता सूची सार्वजनिक कर दी जाए। इससे पहले ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट पर दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 7 फरवरी रखी गई थी, लेकिन अब व्यापक जांच प्रक्रिया के कारण इसमें थोड़ा विस्तार दिया गया है। पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का सटीक होना सबसे प्राथमिक शर्त है, और आयोग इसी दिशा में काम कर रहा है।

मतदाता सूची के अलावा इस बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों के चरणों का निर्धारण और सुरक्षा बलों की तैनाती है। पश्चिम बंगाल का चुनावी इतिहास अक्सर सुरक्षा चुनौतियों और राजनीतिक हिंसा की खबरों से घिरा रहा है, ऐसे में चुनाव आयोग के लिए शांतिपूर्ण मतदान कराना एक बड़ी चुनौती है। बैठक में इस बात पर गहन मंथन होगा कि राज्य की भौगोलिक स्थिति और संवेदनशीलता को देखते हुए कितने चरणों में मतदान कराना उचित होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार आयोग की पूरी बेंच को राज्य की जमीनी हकीकत, कानून-व्यवस्था की स्थिति और लॉजिस्टिक तैयारियों के बारे में ब्रीफ करेंगे।

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने निर्वाचन आयोग को पहले ही एक सिफारिश भेजी है, जिसमें राज्य में इस बार केवल एक ही चरण (सिंगल फेज) में चुनाव कराने का प्रस्ताव दिया गया है। आमतौर पर पश्चिम बंगाल जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से सक्रिय राज्य में चुनाव कई चरणों में संपन्न होते रहे हैं, ताकि सुरक्षा बलों का संचलन प्रभावी ढंग से किया जा सके। हालांकि, सीईओ कार्यालय ने अपनी सिफारिश में एक चरण का विकल्प रखा है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतिम निर्णय पूरी तरह से चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करेगा। आयोग को यह तय करना होगा कि क्या एक ही दिन में पूरे राज्य में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती संभव है या फिर सुरक्षा के लिहाज से बहु-चरण चुनाव ही बेहतर विकल्प रहेंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर, बैठक के दौरान सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) की आवश्यकता और उनकी तैनाती के ब्लूप्रिंट पर भी चर्चा होगी। अगर चुनाव एक या दो चरणों में सीमित किए जाते हैं, तो केंद्रीय बलों की बहुत बड़ी संख्या की आवश्यकता होगी। चुनाव आयोग गृह मंत्रालय के साथ समन्वय करके यह तय करेगा कि पश्चिम बंगाल के लिए कितनी कंपनियां उपलब्ध कराई जा सकती हैं। विपक्षी दल अक्सर राज्य पुलिस के बजाय केंद्रीय बलों की निगरानी में चुनाव कराने की मांग करते रहे हैं, ऐसे में सुरक्षा बलों का मुद्दा इस बैठक में केंद्र बिंदु रहेगा।

कुल मिलाकर, आज की यह बैठक न केवल बंगाल चुनाव की तारीखों की पृष्ठभूमि तैयार करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि इस बार का चुनावी रण कितना लंबा खिंचेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश ने प्रशासन को थोड़ा और समय दिया है ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न छूटे और कोई फर्जी नाम शामिल न हो सके। मनोज कुमार और ईसीआई की फुल बेंच के बीच होने वाला यह संवाद आने वाले कुछ हफ्तों में बंगाल की राजनीतिक दिशा और दशा तय करने वाला साबित होगा। राज्य की जनता और राजनीतिक दल अब बेसब्री से उस अंतिम सूची का इंतजार कर रहे हैं, जो इस लोकतांत्रिक उत्सव का आधार बनेगी।

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