‘अयोध्या की मर्यादा से खिलवाड़ नहीं सहेंगे…’, राम मंदिर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश पर बोले इक़बाल अंसारी
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश को लेकर सियासी और सामाजिक हलकों में लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस मामले पर बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इक़बाल अंसारी ने कड़ी नाराज़गी जाहिर करते हुए इसे अयोध्या की धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया है।
इक़बाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की नगरी है, जहां सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर हिंदू समाज की आस्था का केंद्र है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश के मुस्लिम समाज ने इस निर्णय को स्वीकार करते हुए उसका सम्मान किया है।
उन्होंने कहा कि जब अदालत का फैसला आया था, उस समय मुस्लिम समुदाय ने संयम, समझदारी और जिम्मेदारी का परिचय दिया। ऐसे में राम मंदिर परिसर में नमाज़ पढ़ने की कोशिश न सिर्फ अनुचित है, बल्कि इससे समाज में गलत संदेश भी जाता है। इक़बाल अंसारी ने इस कदम को जानबूझकर माहौल खराब करने की कोशिश बताया।
इक़बाल अंसारी ने यह भी कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के लिए इबादत के लिए पर्याप्त स्थान मौजूद हैं, जहां नियमित रूप से नमाज़ अदा की जाती है। ऐसे में राम मंदिर परिसर में इस तरह की कोशिश करना न तो जरूरी है और न ही उचित।
उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि इस तरह की घटनाओं पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति अयोध्या की शांति, सौहार्द और धार्मिक संतुलन को बिगाड़ने का प्रयास न कर सके।
इक़बाल अंसारी ने कहा कि इस घटना से केवल हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज भी आहत हुआ है, क्योंकि मुस्लिम समाज ने हमेशा राम मंदिर और न्यायालय के फैसले का सम्मान किया है और शांति बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई है।
अपने बयान के अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि अयोध्या की असली पहचान आपसी सम्मान, भाईचारे और सद्भाव की नगरी के रूप में है। इस पहचान को किसी भी सूरत में नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाना चाहिए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।