डब्ल्यूपीएल का महाकुंभ: आरसीबी और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खिताबी जंग आज, क्या दिल्ली का सूखा होगा खत्म या स्मृति की सेना रचेगी इतिहास?
वडोदरा: महिला क्रिकेट की दुनिया के सबसे चर्चित और रोमांचक टूर्नामेंट ‘महिला प्रीमियर लीग’ (WPL) के चौथे संस्करण का आज भव्य समापन होने जा रहा है। वडोदरा के खूबसूरत कोतांबी स्टेडियम में आज गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) और दिल्ली कैपिटल्स के बीच खिताबी भिड़ंत होगी। यह मुकाबला केवल दो टीमों के बीच की जंग नहीं, बल्कि दो अलग-अलग कहानियों का संगम है। एक ओर आरसीबी की टीम है जो अपने दूसरे खिताब पर कब्जा जमाकर मुंबई इंडियंस की बराबरी करना चाहती है, तो दूसरी ओर दिल्ली कैपिटल्स है जो पिछले तीन संस्करणों की नाकामी को पीछे छोड़ते हुए पहली बार चैंपियन बनने का सपना संजोए मैदान में उतरेगी।
दिल्ली कैपिटल्स की कहानी डब्ल्यूपीएल के इतिहास में किसी ‘ट्रेजेडी’ से कम नहीं रही है। यह टीम लगातार चौथी बार फाइनल में पहुंची है, जो अपने आप में एक कीर्तिमान है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि पिछले तीन मौकों पर दिल्ली को फाइनल की दहलीज पर आकर हार का सामना करना पड़ा है। इस बार टीम की कमान युवा और ऊर्जावान जेमिमा रोड्रिग्स के हाथों में है। जेमिमा के नेतृत्व में दिल्ली की टीम ने इस सत्र में न केवल आक्रामक खेल दिखाया है, बल्कि दबाव की स्थितियों में खुद को संभाला भी है। दिल्ली के लिए सबसे बड़ी उम्मीद उनकी गेंदबाजी यूनिट है। तेज गेंदबाज चिनेल हेनरी और युवा नंदनी शर्मा की जोड़ी ने इस सीजन में आग उगलती गेंदों से विपक्षी बल्लेबाजों को घुटने टेकने पर मजबूर किया है। विशेष रूप से नंदनी शर्मा, जिन्होंने इस सत्र में अब तक 16 विकेट झटके हैं, न केवल दिल्ली की जीत की गारंटी मानी जा रही हैं बल्कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय टीम में अपनी जगह के लिए भी एक मजबूत दावा ठोक दिया है।
दिल्ली की बल्लेबाजी में भी अब गहराई और अनुभव का तालमेल नजर आ रहा है। गुजरात जायंट्स के खिलाफ एलिमिनेटर मैच में जिस तरह से लिजेल ली ने अपना अनुभव साझा किया और शेफाली वर्मा ने अपनी पुरानी फॉर्म की झलक दिखाई, वह आरसीबी के लिए खतरे की घंटी है। दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज लॉरा वोलवार्ड्ट ने शीर्ष क्रम में टीम को वह मजबूती दी है जिसकी दिल्ली को पिछले तीन सत्रों में कमी महसूस हो रही थी। दिल्ली के प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि वडोदरा की पिच पर आज जेमिमा की सेना वह करिश्मा कर दिखाएगी जिसका इंतजार उन्हें चार सालों से है।
दूसरी तरफ, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) इस टूर्नामेंट की सबसे जुझारू टीम बनकर उभरी है। स्मृति मंधाना की कप्तानी में आरसीबी ने इस साल वह कर दिखाया जो अब तक डब्ल्यूपीएल के इतिहास में कोई टीम नहीं कर सकी थी—लगातार पांच जीत के साथ टूर्नामेंट की शुरुआत। आरसीबी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं है। जब भी टीम मुश्किल में फंसी, किसी न किसी खिलाड़ी ने संकटमोचक की भूमिका निभाई। मंधाना की टीम पिछले दो मैचों की शानदार जीत के साथ फाइनल में कदम रख रही है, जिससे उनका मनोबल सातवें आसमान पर है।
आरसीबी की स्पिन गेंदबाजी इस फाइनल में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। श्रेयंका पाटिल, जिन्होंने गुजरात जायंट्स के खिलाफ पिछले मैच में पांच विकेट लेकर सनसनी फैला दी थी, दिल्ली के बल्लेबाजों के लिए पहेली बन सकती हैं। ऋचा घोष की विकेट के पीछे की चपलता और ग्रेस हैरिस की आक्रामक बल्लेबाजी आरसीबी को एक ऐसी टीम बनाती है जिसे हराना किसी भी विरोधी के लिए हिमालय चढ़ने जैसा है। स्मृति मंधाना खुद इस खिताबी मुकाबले में एक बड़ी पारी खेलकर अपनी टीम को दूसरा डब्ल्यूपीएल ताज पहनाना चाहेंगी।
कोतांबी स्टेडियम की पिच की बात करें तो यहाँ स्पिनरों और मध्यम गति के तेज गेंदबाजों को मदद मिलने की उम्मीद है। शाम को गिरने वाली ओस भी टॉस जीतने वाले कप्तान के फैसले को प्रभावित कर सकती है। दोनों ही टीमों के पास बेहतरीन ऑलराउंडर्स की फौज है, जो गेंद और बल्ले दोनों से मैच का पासा पलटने का दम रखती हैं। दिल्ली के लिए जहाँ मारिजान काप और अलाना किंग जैसे अंतरराष्ट्रीय सितारे हैं, वहीं आरसीबी के पास एलिसा पेरी (इस सत्र के अन्य मैचों में सक्रिय) और सोफी डिवाइन जैसी दिग्गजों का अनुभव (भले ही टीम सूची में बदलाव हों) हमेशा एक मनोवैज्ञानिक बढ़त देता है।
मैच से पहले वडोदरा में क्रिकेट का बुखार चरम पर है। स्टेडियम के टिकट हफ्तों पहले बिक चुके हैं और क्रिकेट पंडितों की राय भी इस मुकाबले को लेकर बंटी हुई है। एक तरफ दिल्ली की ‘बेताबी’ है तो दूसरी तरफ बेंगलुरु का ‘संतुलन’। यह फाइनल मुकाबला इस मायने में भी खास है कि यह भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत को दुनिया के सामने पेश कर रहा है।
दोनों टीमों की संभावित एकादश और स्क्वाड पर एक नजर:
दिल्ली कैपिटल्स की टीम में कप्तान जेमिमा रोड्रिग्स के साथ तानिया भाटिया (विकेटकीपर), लुसी हैमिल्टन, चिनेले हेनरी, मारिजान काप, अलाना किंग, लिजेल ली, मिन्नू मणि, निकी प्रसाद, स्नेह राणा, शैफाली वर्मा, नंदनी शर्मा, श्री चरणी, प्रगति सिंह, एडडला स्रुजाना और लॉरा वोलवार्ड्ट शामिल हैं।
वहीं आरसीबी की कमान स्मृति मंधाना के पास है और उनके साथ लॉरेन बेल, नादिन डी क्लार्क, ऋचा घोष (विकेटकीपर), ग्रेस हैरिस, दयालन हेमलता, गौतमी नाइक, श्रेयंका पाटिल, कुमार प्रथ्योशा, प्रेमा रावत, अरुंधति रेड्डी, सायली सतघरे, लिन्सी स्मिथ, पूजा वस्त्राकर, जॉर्जिया वॉल और राधा यादव जैसे धुरंधर खिलाड़ी मौजूद हैं।
आज रात जब वडोदरा की रोशनी में ये दोनों टीमें आमने-सामने होंगी, तो इतिहास लिखा जाएगा। क्या दिल्ली अपना पहला सूखा खत्म कर पाएगी या बेंगलुरु की गलियों में एक बार फिर ‘ई साला कप नमदे’ का नारा हकीकत में बदलकर दूसरी ट्रॉफी के साथ गूंजेगा? इसका फैसला अगले कुछ घंटों में हो जाएगा।