• January 7, 2026

उत्तर प्रदेश मतदाता सूची का महा-शुद्धिकरण: 2.89 करोड़ नाम हटे, अब 12.55 करोड़ वोटरों की ड्राफ्ट लिस्ट जारी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के लोकतांत्रिक इतिहास में मंगलवार का दिन एक बड़े प्रशासनिक मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश की बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट मतदाता सूची (Draft Electoral Roll) जारी कर दी है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद सामने आई इस सूची ने सबको चौंका दिया है, क्योंकि शुद्धिकरण की इस प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट से रिकॉर्ड 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। अब प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया और आगामी चरणों की विस्तृत जानकारी साझा की है।

मतदाता सूची में ऐतिहासिक बदलाव और शुद्धिकरण का आधार

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए चलाया गया यह अभियान अब तक का सबसे बड़ा ‘क्लीनिंग ऑपरेशन’ माना जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया की शुरुआत 27 अक्टूबर 2025 को हुई थी। उस समय प्रदेश में मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 15 करोड़ 30 लाख 92 हजार थी। निर्वाचन आयोग ने घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का वितरण किया और भौतिक सत्यापन सुनिश्चित किया। इस प्रक्रिया के दौरान यह पाया गया कि एक बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता सूची में शामिल थे जो या तो उस स्थान पर अब नहीं रहते, या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, अथवा जिनके नाम एक से अधिक जगहों पर दर्ज थे।

इस गहन छानबीन के बाद लगभग 18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह कटौती केवल डेटा को शुद्ध करने के लिए की गई है ताकि फर्जी मतदान या कागजी मतदाताओं की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके। इस महा-शुद्धिकरण के बाद अब 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 मतदाता आधिकारिक तौर पर ड्राफ्ट सूची का हिस्सा हैं।

क्यों कटे 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम: श्रेणियों का विवरण

वोटर लिस्ट से हटाए गए 2.89 करोड़ नामों के पीछे आयोग ने स्पष्ट सांख्यिकीय कारण दिए हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि नामों की कटौती मुख्य रूप से तीन बड़ी श्रेणियों में हुई है। सबसे बड़ी संख्या उन मतदाताओं की है जो अपने मूल निवास स्थान से ‘शिफ्ट’ हो चुके हैं यानी स्थायी रूप से कहीं और जाकर बस गए हैं। ऐसे मतदाताओं की संख्या लगभग 2.17 करोड़ है। दूसरी महत्वपूर्ण श्रेणी उन लोगों की है जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन उनके नाम रिकॉर्ड से नहीं हटाए गए थे, ऐसे 46.23 लाख नाम सूची से बाहर किए गए हैं। तीसरी श्रेणी ‘डुप्लीकेट’ मतदाताओं की है, जिनके नाम तकनीकी खामियों या जानबूझकर दो अलग-अलग बूथों या विधानसभाओं में दर्ज थे, ऐसे 25.47 लाख नामों को हटाया गया है। इस कवायद का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों में केवल वैध और सक्रिय मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

6 फरवरी तक दावे और आपत्तियां: सुधार का अंतिम मौका

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के साथ ही उन लोगों के लिए अवसर खुल गया है जिनके नाम सूची से हट गए हैं या जो नए मतदाता बनना चाहते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि 6 जनवरी से लेकर 6 फरवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम इस पहली ड्राफ्ट सूची में नहीं है और वह पात्रता रखता है, तो वह ‘फॉर्म-6’ भरकर अपना नाम जुड़वा सकता है। वहीं, यदि किसी के विवरण जैसे नाम, पता या जन्मतिथि में कोई त्रुटि है, तो उसके सुधार के लिए ‘फॉर्म-8’ भरा जाएगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दावे और आपत्तियों की यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है। इसके लिए किसी भी नागरिक को कोई शुल्क देने की आवश्यकता नहीं है। इन सभी आवेदनों का निस्तारण करने के बाद, 6 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश की अंतिम और पक्की मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

नए मतदाताओं के लिए अर्हता और पंजीकरण की शर्तें

आयोग ने युवाओं को मतदाता बनाने के लिए विशेष प्रावधान किए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, जो भी नागरिक 1 जनवरी 2008 से पहले पैदा हुए हैं और 1 जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी कर रहे हैं, वे मतदाता बनने के लिए फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा, जो लोग 1 अक्टूबर तक पात्र हो रहे हैं, उनके लिए भी अग्रिम आवेदन की सुविधा दी गई है। आयोग का प्रयास है कि प्रदेश का हर युवा जो मतदान की कानूनी आयु प्राप्त कर चुका है, उसे इस सूची में जगह मिले। पंजीकरण के लिए लोग ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर सकते हैं या अपने संबंधित बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से संपर्क कर सकते हैं।

डिजिटल माध्यमों से नाम खोजने की आसान प्रक्रिया

आम जनता की सुविधा के लिए चुनाव आयोग ने तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। अब मतदाता घर बैठे ही चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (voters.eci.gov.in) पर जाकर अपना नाम देख सकते हैं। इसके लिए ‘डाउनलोड ई-रोल’ के विकल्प पर जाकर अपने राज्य, जिले और विधानसभा क्षेत्र का चयन करना होगा। इसके बाद अपने संबंधित बूथ की सूची डाउनलोड कर उसमें नाम चेक किया जा सकता है। इसके अलावा, मतदाता अपने ‘एपिक नंबर’ (वोटर आईडी कार्ड नंबर) के माध्यम से भी सीधे अपना नाम सर्च कर सकते हैं। आयोग का ‘ईसीआई नेट ऐप’ (ECI Net App) भी इस दिशा में काफी सहायक सिद्ध हो रहा है, जहां केवल कुछ क्लिक के जरिए मतदाता अपनी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

हेल्पलाइन 1950 और विशेष कैंपों का आयोजन

निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सहायता के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1950’ जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करके कोई भी व्यक्ति मतदाता सूची से संबंधित जानकारी ले सकता है या अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके साथ ही, आयोग ने यह अनुभव किया है कि शहरी क्षेत्रों में मतदाता सूची पुनरीक्षण के प्रति उत्साह थोड़ा कम रहता है। इसे देखते हुए शहरी इलाकों और बहुमंजिला सोसायटियों में विशेष कैंप लगाने की योजना बनाई गई है। इन कैंपों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा और मौके पर ही फॉर्म भरने की सुविधा प्रदान की जाएगी।

मतदान केंद्रों (बूथों) का पुनर्गठन और नई व्यवस्था

मतदाताओं की सुविधा और मतदान के दिन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आयोग ने मतदान केंद्रों की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए हैं। पहले एक मतदान बूथ पर अधिकतम 1500 मतदाता आवंटित किए जाते थे, जिसे अब घटाकर 1200 कर दिया गया है। इस नई सीमा के कारण जहां मतदाताओं की संख्या अधिक थी, वहां नए बूथों का सृजन किया गया है। उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया के तहत कुल 15,030 नए मतदान बूथ बनाए गए हैं। इस कदम से मतदान केंद्रों पर कतारें कम होंगी और वृद्ध व दिव्यांग मतदाताओं को कम समय में वोट डालने की सुविधा मिलेगी।

आधार मैपिंग और सत्यापन की चुनौती

सूची को त्रुटिहीन बनाने के क्रम में आधार मैपिंग एक महत्वपूर्ण कड़ी है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी कि अब तक प्रदेश के 91 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पूरी की जा चुकी है। हालांकि, लगभग 9 प्रतिशत मतदाता (करीब 1.4 करोड़ लोग) ऐसे हैं जिनकी मैपिंग अभी शेष है। इन लोगों को आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा ताकि वे अपना सत्यापन कार्य पूरा कर सकें। आयोग का लक्ष्य अंतिम सूची के प्रकाशन से पहले शत-प्रतिशत मतदाताओं का डेटा सत्यापित करना है ताकि सूची की विश्वसनीयता पर कोई प्रश्न चिह्न न रहे।

निष्कर्ष और अंतिम सूची की ओर कदम

27 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई यह जटिल प्रक्रिया अब अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। गणना के चरण को पूरा करने के लिए आयोग ने समय-सीमा में कई बार विस्तार भी किया, ताकि 26 दिसंबर तक घर-घर जाकर डेटा संग्रह का काम पूर्ण हो सके। अब गेंद जनता के पाले में है। 6 फरवरी तक का समय यह सुनिश्चित करने के लिए है कि किसी भी पात्र व्यक्ति का लोकतांत्रिक अधिकार सूची से बाहर न रहे। 6 मार्च 2026 को जारी होने वाली अंतिम सूची ही उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने वाले मतदाताओं का आधिकारिक दस्तावेज होगी।

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