सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल SIR में ओडिशा-झारखंड के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स भी शामिल, 28 फरवरी तक फाइनल रोल पब्लिश होगा
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को तेज करने के लिए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को अनुमति दी है कि वे कम से कम तीन साल के अनुभव वाले सिविल जजों के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के ज्यूडिशियल ऑफिसर्स (सर्विंग या रिटायर्ड) को भी इस काम में लगा सकते हैं। यह फैसला मंगलवार (24 फरवरी 2026) को आया, जब कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की 22 फरवरी की लेटर पर गौर किया, जिसमें बताया गया कि मौजूदा 250 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स से काम पूरा होने में करीब 80 दिन लग सकते हैं।
SIR में भारी बैकलॉग, 80 लाख क्लेम पेंडिंगपश्चिम बंगाल में SIR के तहत लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी और अनमैप्ड कैटेगरी में करीब 50-80 लाख क्लेम और आपत्तियां पेंडिंग हैं। कोर्ट ने माना कि अगर हर जज रोजाना 250 फॉर्म्स की जांच भी करे, तो भी इतना समय लगेगा जो 28 फरवरी की डेडलाइन से बहुत आगे है। इसलिए कोर्ट ने अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था की है। चुनाव आयोग (ECI) इन अतिरिक्त ऑफिसर्स के ट्रैवल, बोर्डिंग और लॉजिंग खर्च वहन करेगा। ओडिशा और झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध पर तुरंत विचार करने को कहा गया है।
अतिरिक्त दस्तावेज मान्य, पुराने फॉर्म स्वीकारकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब आधार कार्ड, हाईस्कूल एडमिट कार्ड और सर्टिफिकेट भी वैध दस्तावेज माने जाएंगे। साथ ही, 14 फरवरी से पहले ऑनलाइन या फिजिकल रूप से जमा किए गए दस्तावेजों को स्वीकार करना होगा।फाइनल रोल की डेडलाइन 28 फरवरी, सप्लीमेंट्री लिस्ट की भी मंजूरीसुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि 28 फरवरी 2026 तक तय क्लेम्स के साथ फाइनल वोटर लिस्ट पब्लिश की जाए। इसके बाद भी सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी करने की अनुमति होगी, और दोनों को मिलाकर अंतिम इलेक्टोरल रोल तैयार किया जाएगा।
TMC और BJP की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
- तृणमूल कांग्रेस (TMC): पार्टी खुश है। TMC नेता कुणाल घोष ने कहा कि ममता बनर्जी पहले से कह रही थीं कि इतनी जल्दी काम नहीं होगा। चुनाव आयोग की जिद से कई BLO की जान गई और काम भी अधूरा रहा।
- बीजेपी: बंगाल बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि दूसरे राज्यों से ऑफिसर्स लाने का मतलब है कि कोर्ट को बंगाल सरकार पर भरोसा नहीं है।
यह फैसला पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर चल रही सियासी विवाद पर विराम लगाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि अब वोटर लिस्ट रिवीजन समय पर पूरा हो जाएगा और विधानसभा चुनाव की तैयारियां सुचारू रूप से आगे बढ़ेंगी।