• January 19, 2026

शशि थरूर ने जताई वैश्विक व्यवस्था पर चिंता: बोले- दुनिया में अब ‘जंगल का कानून’, कागजों तक सिमटा यूएन चार्टर

नई दिल्ली: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई और उनके नाटकीय निष्कासन ने पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है। इस घटनाक्रम पर भारत के पूर्व राजनयिक और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अंतरराष्ट्रीय कानून की स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। थरूर ने वैश्विक व्यवस्था में आ रहे बदलावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की दुनिया में ‘ताकत ही सही’ (Might is Right) का सिद्धांत हावी हो गया है और संयुक्त राष्ट्र (UN) के नियम अब केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून की प्रासंगिकता पर थरूर का तीखा हमला

शशि थरूर, जो स्वयं संयुक्त राष्ट्र में उच्च पदों पर रह चुके हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के वर्तमान स्वरूप की तुलना ‘जंगल के कानून’ से करते हुए कहा कि शक्तिशाली देश अब अपने हितों को साधने के लिए स्थापित नियमों और संप्रभुता के सिद्धांतों को दरकिनार करने में जरा भी संकोच नहीं कर रहे हैं।

थरूर की यह टिप्पणी लेखक कपिल कोमिरेड्डी की उस पोस्ट के जवाब में आई, जिसमें अमेरिका द्वारा मादुरो को हटाए जाने की कार्रवाई में ‘दोहरे मानदंडों’ का जिक्र किया गया था। थरूर ने लिखा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में शांति और समानता बनाए रखने के लिए बनाया गया था, आज के दौर में अपनी शक्ति खोता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दुनिया इसी दिशा में आगे बढ़ती रही, तो अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी और छोटे या कमजोर देशों की संप्रभुता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा।

वेनेजुएला में अमेरिकी स्ट्राइक: मार-ए-लागो से लाइव टेलीकास्ट

शशि थरूर की यह चिंता उस घटनाक्रम से उपजी है जिसने शनिवार को पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिकी सेना ने एक बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए वेनेजुएला पर बमबारी की और लंबे समय से सत्ता पर काबिज वामपंथी नेता निकोलस मादुरो को बेदखल कर दिया। इसके बाद अमेरिकी विशेष बलों ने मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया और सीधे न्यूयॉर्क ले आए।

इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद नाटकीय अंदाज में पेश किया। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इस पूरे सैन्य ऑपरेशन को फ्लोरिडा स्थित अपने ‘मार-ए-लागो’ एस्टेट में बैठकर एक टीवी शो की तरह लाइव देखा। उन्होंने सोशल मीडिया पर मादुरो की एक तस्वीर भी साझा की, जिसमें उनके हाथों में हथकड़ी लगी थी और आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी। अमेरिका ने मादुरो पर ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों से जुड़े मामलों में 50 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम इनाम पहले ही घोषित कर रखा था, और अब न्यूयॉर्क की अदालत में उन पर मुकदमा चलाया जाना है।

वेनेजुएला की राजनीति में हलचल और ट्रंप का विरोधाभासी रुख

एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संप्रभुता को लेकर बहस छिड़ी है, वहीं वेनेजुएला के भीतर विपक्षी खेमे में इसे लेकर जश्न का माहौल है। वेनेजुएला की प्रमुख विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो ने इस कार्रवाई को देश के लिए ‘आजादी का क्षण’ करार दिया है। मचाडो ने मांग की है कि 2024 के चुनावों में विपक्ष के उम्मीदवार रहे एडमंडो गोंजालेज को तुरंत राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालना चाहिए।

हालांकि, इस मामले में डोनाल्ड ट्रंप का रुख थोड़ा अलग नजर आया। जहां उन्होंने मादुरो को सत्ता से हटाया, वहीं उन्होंने विपक्षी नेता मचाडो को लेकर भी ठंडी प्रतिक्रिया दी। ट्रंप ने टिप्पणी की कि मचाडो को वेनेजुएला के भीतर पर्याप्त समर्थन और सम्मान हासिल नहीं है। ट्रंप के इस बयान ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या अमेरिका वेनेजुएला में अपनी पसंद की कोई नई व्यवस्था स्थापित करना चाहता है।

निष्कर्ष: ‘ताकत ही सही’ के दौर में भविष्य की चुनौतियां

शशि थरूर के अनुसार, वेनेजुएला की यह घटना केवल एक देश के नेतृत्व परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक संस्थाएं अब अप्रासंगिक होती जा रही हैं। जब कोई महाशक्ति किसी दूसरे संप्रभु राष्ट्र के प्रमुख को बलपूर्वक उठाकर अपने देश की अदालत में पेश करती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्थापित मानकों को पूरी तरह बदल देता है।

थरूर का यह बयान वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। यह सवाल अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कानून केवल ‘सुझाव’ बनकर रह जाएंगे और दुनिया की दिशा केवल वही तय करेंगे जिनके पास सैन्य और आर्थिक शक्ति है? फिलहाल, निकोलस मादुरो न्यूयॉर्क की जेल में हैं और पूरी दुनिया यह देख रही है कि ‘ताकत’ और ‘कानून’ के इस संघर्ष में जीत किसकी होती है।

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