आगरा में भीषण शीतलहर का कहर: 12वीं तक के स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं, कड़ाके की ठंड और कोहरे ने थामी रफ्तार
आगरा: ताजनगरी में नए साल के आगमन के साथ ही शुरू हुआ सर्दी का सितम कम होने का नाम नहीं ले रहा है। हाड़ कंपा देने वाली ठंड और भीषण शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मद्देनजर बड़ा फैसला लिया है। आगरा के जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी के निर्देश पर अब जनपद के कक्षा 12 तक के सभी बोर्डों के स्कूलों में अवकाश की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है। पहले यह स्कूल जल्दी खुलने वाले थे, लेकिन अब संशोधित आदेश के अनुसार ये विद्यालय 10 जनवरी तक बंद रहेंगे और 11 जनवरी को सुचारू रूप से खोले जाएंगे। इस फैसले से यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई और अन्य सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों के हजारों छात्रों को बड़ी राहत मिली है।
कड़ाके की ठंड और जिला प्रशासन का सख्त रुख
पिछले कुछ दिनों से आगरा में न्यूनतम तापमान के गिरने और गलन बढ़ने के कारण सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। विशेष रूप से छोटे बच्चों और सुबह जल्दी स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए यह मौसम काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से अवकाश बढ़ाने का निर्णय लिया। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि यह नियम सभी बोर्डों के स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी विद्यालय इस सरकारी आदेश का उल्लंघन करेंगे या निर्धारित तिथि से पहले कक्षाएं संचालित करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में निरीक्षण करेंगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भीषण ठंड में बच्चों को स्कूलों में न बुलाया जाए। यह आदेश उन निजी स्कूलों के लिए भी एक कड़ा संदेश है जो अक्सर जिला प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी करते हैं।
मौसम का मिजाज: धूप भी रही बेअसर
गुरुवार को आगरा का मौसम मिला-जुला रहा, लेकिन राहत नाममात्र की ही थी। सुबह की शुरुआत घने कोहरे के साथ हुई, जिसके कारण दृश्यता काफी कम रही और सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई। हालांकि, दोपहर के समय सूर्य देव के दर्शन हुए और धूप खिली, लेकिन शीतलहर के साथ चल रही बर्फीली हवाओं ने धूप की तपिश को पूरी तरह बेअसर कर दिया। शहरवासियों को पूरे दिन गलन का अहसास होता रहा।
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ताजनगरी में बृहस्पतिवार को भी ‘कोल्ड-डे’ यानी शीतदिवस जैसी परिस्थितियां बनी रहीं। जब अधिकतम तापमान सामान्य से काफी नीचे चला जाता है और ठंडी हवाएं चलती हैं, तो ऐसी स्थिति को शीतदिवस कहा जाता है। दोपहर में कुछ समय के लिए कोहरा कम जरूर हुआ, लेकिन ठिठुरन बरकरार रही। लोग घरों में दुबके रहे और बाहर निकलने वाले लोग भारी ऊनी कपड़ों, मफलर, टोपी और दस्तानों में पूरी तरह लिपटे नजर आए।
तापमान के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
जनवरी के इस शुरुआती पखवाड़े में आगरा भीषण ठंड की चपेट में है। आंकड़ों पर नजर डालें तो बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। शहर का अधिकतम तापमान 14.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से करीब 6.2 डिग्री कम है। वहीं, न्यूनतम तापमान 7.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम रहा।
तापमान में आई इस भारी गिरावट और आर्द्रता के मेल ने वातावरण में गलन को बढ़ा दिया है। शीतलहर के कारण शरीर के खुले अंगों में काफी दर्द और सिहरन महसूस की जा रही है। ताजनगरी में पर्यटन पर भी इसका आंशिक असर देखा जा रहा है, क्योंकि सुबह के समय स्मारक घने कोहरे की चादर में लिपटे रहते हैं, जिससे पर्यटकों को दीदार करने में कठिनाई हो रही है।
आगामी 24 घंटे और मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के क्षेत्रीय केंद्र के अनुसार, अगले 24 घंटे ताजनगरी के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। पूर्वानुमान जताया गया है कि कोहरा और अधिक गहरा सकता है, जिससे यातायात और रेल सेवाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। हालांकि, तापमान में बहुत बड़े बदलाव के संकेत नहीं हैं, लेकिन गलन यथावत रहेगी। शुक्रवार को हल्की राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि कोहरे की परत कुछ कम हो सकती है, लेकिन यह राहत बहुत अल्पकालिक होगी।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि शनिवार से आगरा में फिर से कड़ाके की ठंड का एक नया दौर शुरू हो सकता है। उत्तर की ओर से आने वाली बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों में तापमान को और नीचे गिराएंगी। ऐसे में प्रशासन ने बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों ने भी किसानों को सलाह दी है कि वे पाले से फसलों को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, क्योंकि आने वाले दिनों में पारा और अधिक लुढ़क सकता है।
जनजीवन पर असर और बचाव के उपाय
भीषण ठंड के कारण बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। शाम होते ही लोग अलाव का सहारा लेते नजर आ रहे हैं। रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर मुसाफिरों की हालत कोहरे और देरी से चल रही ट्रेनों के कारण दयनीय बनी हुई है। सामाजिक संगठनों और नगर निगम ने प्रमुख चौराहों पर अलाव की व्यवस्था करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में ब्लड प्रेशर और अस्थमा के मरीजों को खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक ठंड हृदय की धमनियों पर दबाव डालती है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 11 जनवरी को स्कूल खुलने के समय भी यदि मौसम की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो अवकाश को आगे बढ़ाने पर पुनर्विचार किया जा सकता है। फिलहाल, बच्चों के अभिभावकों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि कड़ाके की ठंड में बच्चों का सुबह स्कूल जाना उनकी सेहत के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा था।