रुपये की गिरावट थमने का नाम नहीं: डॉलर के मुकाबले 90.52 पर नया रिकॉर्ड निचला स्तर, ट्रेड डील अनिश्चितता बनी मुसीबत
- रुपये का प्रदर्शन: इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.43 पर खुला, लेकिन जल्द ही फिसलकर 90.52 पर बंद हुआ। गुरुवार को यह 90.32 पर बंद हुआ था, जो 38 पैसे की गिरावट दर्शाता था।
- डॉलर इंडेक्स की मजबूती: डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत मापता है, हल्की बढ़त के साथ 98.37 पर पहुंचा। यह रुपये पर अतिरिक्त दबाव का कारण बना।
- शेयर बाजार का असर: शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 170 अंकों की तेजी के साथ 84,988 पर और निफ्टी 98 अंकों की बढ़त के साथ 25,997 पर खुला। लेकिन मजबूत शेयर बाजार के बावजूद रुपये को कोई खास समर्थन नहीं मिला।
- FII की बिकवाली: गुरुवार को FII ने 2,020 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जो बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला कारक रहा। दिसंबर में FII लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे रुपये पर नकारात्मक असर पड़ा।
ट्रेड डील अनिश्चितता: गिरावट का मुख्य विलेनभारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत में देरी ने रुपये को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। विशेषज्ञों के अनुसार:
- अनिश्चितता का असर: अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत का प्रस्ताव “अब तक का सबसे अच्छा” है, लेकिन “भारत कठिन मेवा है”। दो-दिवसीय बैठक में कोई बड़ा समझौता न होने से अनिश्चितता बनी रही। HDFC बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर जल्द डील न हुई तो रुपया 92 तक गिर सकता है।
- FPI निकासी: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने दिसंबर में शेयरों से निकासी की है, जो रुपये की कमजोरी को बढ़ावा दे रही। 2025 में अब तक रुपया 5% से ज्यादा गिर चुका है, जो एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा है।
- अन्य कारक: सोने-चांदी जैसे कीमती धातुओं के दामों में उछाल से आयातकों की डॉलर मांग बढ़ी। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 0.67% चढ़कर 61.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, जो आयात बिल बढ़ाने वाला है।
एक्सपर्ट्स का अनुमान: 90.10-90.75 के दायरे में उतार-चढ़ावमिराए एसेट शेयरखान के विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, “ट्रेड डील अनिश्चितता रुपये की गिरावट का प्रमुख कारण है। घरेलू बाजार की तेजी और कमजोर डॉलर ने गिरावट सीमित करने की कोशिश की, लेकिन निवेशक सतर्क हैं।” उनका अनुमान:
- निकट अवधि में डॉलर-रुपया 90.10 से 90.75 के बीच रह सकता है।
- RBI का हस्तक्षेप (जैसे डॉलर बिक्री) रुपये को सहारा दे सकता है।
- रॉयटर्स पोल: अगले तीन महीनों में रुपया कुछ सुधार दिखा सकता है, लेकिन ट्रेड डील की घोषणा जरूरी।
2025 में रुपये की यह गिरावट मुद्रास्फीति बढ़ाने और आयात महंगा करने वाली है। RBI की नजर बनी हुई है, लेकिन ट्रेड डील पर प्रगति के बिना राहत मुश्किल। निवेशक सतर्क रहें: विनिमय दर चेक करें और हेजिंग पर विचार करें।