प्रेमिका ने दरोगा से महिला थाने में रचाई शादी, प्रेमी ने पहले किया था शादी से इन्कार
दरोगा बनने के बाद शादी से इन्कार करने वाले मनोज ने अंततः वंदना से शादी कर ली। मंगलवार देर रात भागलपुर के महिला थाना में घंटों चले हाई वोल्टेज ड्रामे का पटाक्षेप हो गया और भागलपुर एकचारी टपुआ थाना क्षेत्र के रहने वाले रुदल पासवान के बेटे मनोज कुमार उर्फ गौरव कुमार जो वर्तमान में मुजफ्फरपुर में सब इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने उसी गांव की रहने वाली जमुनी मंडल की 20 वर्षीय बेटी वंदना कुमारी से संविधान निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की तस्वीर को साक्षी मानकर शादी कर ली। एक तरफ जहां थाने की महिला पुलिस ने ही प्रेमिका को दुल्हन की तरह सजाया और दूसरी तरफ एससी एसटी थाने की पुलिस ने प्रेमी को दूल्हे की तरह सेहरा पहनाया और दोनों ने बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को साक्षी मानकर उनसे आशीर्वाद लेकर प्रेमी ने प्रेमिका के मांग में सिंदूर भरा और जन्म जन्मांतर के लिए एक हो गए।
महिला थाना पुलिस और एससी-एसटी थाना पुलिस के जितने भी जवान थे। सबों ने वर वधू को आशीर्वाद दिया और शगुन के तौर पर दुल्हन को पैसे भी दिए। चारों तरफ खुशी का माहौल था। मिठाइयां बांटी गई। लोगों ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर शादी का जश्न मनाया। उल्लेखनीय हो कि प्रेमिका वंदना कुमारी 16 वर्ष की जब थी तब से उसे मनोज से प्यार हो गया थऔ। प्यार इतना हद तक बढ़ गया कि दोनों शारीरिक संबंध तक बनाना शुरू कर दिया। फिर लड़के की नौकरी हो गई और वह लड़की से शादी करने से इनकार कर दिया।
लड़की अपने प्यार को पाने के लिए हर जगह मिन्नतें करने लगी। यहां तक कि वरीय पुलिस अधीक्षक के कार्यालय के चक्कर काटने लगी। इस दौरान मीडिया में इसकी खबरें प्रकाशित होनी शुरू हो गई। इसकी चर्चा प्रशासनिक खेमे में भी जोर शोर से होने लगी। अंततः प्रेमी को इसके आगे झुकना पड़ा। प्रेमिका की जीत हुई। आज दोनों ने एक साथ जीने मरने की कसमें खाई।
डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को साक्षी मानकर भागलपुर के महिला थाने में प्रेमी ने प्रेमिका के मांग में सिंदूर भरा। जबकि दोनों ने अंतर्जातीय विवाह किया। समाज की अवधारणा बदलने के लिए दोनों ने थाने में बिना दान दहेज के अंतर्जातीय विवाह किया।




