• January 4, 2026

विदा हुए जनप्रिय विधायक: प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद के लिए शनिवार का दिन अत्यंत शोकपूर्ण रहा। फरीदपुर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल, जिनका शुक्रवार को हृदय गति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया था, शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। उनकी अंतिम यात्रा किसी जननायक की विदाई की तरह थी, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग अपनी आंखें नम किए शामिल हुए। राजकीय सम्मान के साथ निकाली गई इस शवयात्रा में बरेली से लेकर फरीदपुर तक की सड़कें लोगों से भर गईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं बरेली पहुंचकर दिवंगत विधायक को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें एक समर्पित जनप्रतिनिधि और विद्वान राजनेता बताया। प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल न केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ थे, बल्कि शिक्षा जगत में भी उनका गहरा सम्मान था, यही कारण है कि उनके जाने से जिले में एक अपूरणीय शून्य पैदा हो गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि: परिजनों को बंधाया ढाढ़स

विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल के निधन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम संक्षिप्त किए और शनिवार दोपहर बरेली पहुंचे। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर विशेष रूप से इस दुखद घड़ी में शामिल होने के लिए बरेली उतरा। वहां से वे सीधे शक्तिनगर कॉलोनी स्थित विधायक के आवास पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत विधायक के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री करीब 15 मिनट तक शोक संतप्त परिवार के साथ रहे। उन्होंने विधायक के परिजनों से बात की, उन्हें सांत्वना दी और ढाढ़स बंधाया कि सरकार और पार्टी इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश सरकार के कई मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन जनता की सेवा और शिक्षा के उत्थान में समर्पित कर दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री लखनऊ के लिए रवाना हो गए।

आवास से फरीदपुर तक: फूलों से सजे वाहन में निकली अंतिम यात्रा

शनिवार दोपहर करीब 12 बजे जब प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की अंतिम यात्रा उनके शक्तिनगर स्थित आवास से शुरू हुई, तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ भारतीय जनता पार्टी के झंडे में लपेटकर एक विशेष वाहन में रखा गया, जिसे सफेद और गेंदे के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया था। जैसे ही ‘स्वर्ग वाहन’ ने कॉलोनी से बाहर कदम रखा, वहां मौजूद हजारों समर्थकों और स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध टूट गया और लोग फूट-फूट कर रोने लगे। पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारियों का एक लंबा काफिला इस वाहन के पीछे चल रहा था। बरेली से फरीदपुर के बीच पड़ने वाले नकटिया और नरियावल जैसे क्षेत्रों में लोग घंटों पहले से सड़क किनारे खड़े थे। कई स्थानों पर जनता ने वाहन को रुकवाकर अपने प्रिय नेता को अंतिम बार नमन किया और उन पर पुष्प वर्षा की।

फरीदपुर में उमड़ी भीड़: कार्यालय पर अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की कर्मभूमि फरीदपुर में तो दृश्य और भी भावुक कर देने वाला था। विधायक के पार्थिव शरीर को सबसे पहले उनके फरीदपुर स्थित कार्यालय ले जाया गया। यहाँ सुबह से ही हजारों की संख्या में क्षेत्रवासी, किसान, व्यापारी और युवा एकत्र थे। लोग छतों पर चढ़कर अपने जनप्रिय विधायक की एक झलक पाने को बेताब दिखे। भाजपा के जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों ने कार्यालय पहुंचकर उन्हें नमन किया। फरीदपुर के व्यापारियों ने उनके सम्मान में स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। लोगों ने बताया कि प्रोफेसर साहब केवल एक विधायक नहीं थे, बल्कि हर व्यक्ति के सुख-दुख के साथी थे। उनके कार्यालय पर उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण थी कि उन्होंने सत्ता में रहते हुए भी जमीन से अपना जुड़ाव कभी कम नहीं होने दिया।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासनिक मुस्तैदी

अंतिम यात्रा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ और वीवीआईपी मूवमेंट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। फरीदपुर में विधायक के कार्यालय से लेकर श्मशान घाट तक के पूरे रास्ते को सुरक्षा घेरे में लिया गया था। जनपद के विभिन्न सर्किलों के पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ), भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी की टुकड़ियों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि अंतिम यात्रा के मार्ग में कोई व्यवधान न आए और लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपने नेता को विदाई दे सकें। बरेली-शाहजहांपुर हाईवे पर यातायात को भी डाइवर्ट किया गया था ताकि शवयात्रा में शामिल हजारों लोगों को कोई असुविधा न हो।

एक शिक्षक और राजनेता का सफर: हर आंख थी नम

प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल की पहचान एक ‘प्रोफेसर विधायक’ के रूप में थी। राजनीति में आने से पहले वे शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय थे और उनकी विद्वता का लोहा विरोधी भी मानते थे। फरीदपुर क्षेत्र के विकास के लिए उनके द्वारा किए गए कार्यों को लोग याद कर रहे थे। अंतिम यात्रा में मौजूद एक बुजुर्ग किसान ने नम आंखों से बताया कि “प्रोफेसर साहब ने कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया, वे बेहद सरल स्वभाव के व्यक्ति थे।” सड़क पर जो जहाँ खड़ा था, उसने वहीं से हाथ जोड़कर अपने नेता को विदाई दी। उनके निधन को फरीदपुर के विकास के एक युग का अंत माना जा रहा है। उनके मृदुभाषी स्वभाव और समस्याओं को सुलझाने के उनके अनोखे तरीके ने उन्हें दलीय राजनीति से ऊपर उठाकर एक सर्वमान्य नेता बना दिया था।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

शाम ढलते-ढलते प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। यहाँ उत्तर प्रदेश पुलिस की टुकड़ी ने उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया और हवा में गोलियां दागकर उन्हें अंतिम सलामी दी गई। मंत्रोच्चार के बीच जब उनके ज्येष्ठ पुत्र ने उन्हें मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक आईं। अंतिम संस्कार में जिले के प्रभारी मंत्री, सांसद, स्थानीय विधायक और विभिन्न राजनैतिक दलों के नेता शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में स्वीकार किया कि प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल जैसे ईमानदार और कर्मठ नेता का जाना न केवल भाजपा के लिए बल्कि पूरे बरेली मंडल के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी अंतिम यात्रा ने यह साबित कर दिया कि जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए पद नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और सेवा की आवश्यकता होती है।

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