पीएम मोदी का विकास मंत्र: तकनीक और इनोवेशन का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए तकनीक, डेटा, ज्ञान और इनोवेशन के सही इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके पास है, बल्कि यह है कि उस ताकत का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। तकनीक का लाभ केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होने चाहिए और उनकी क्षमताओं को बढ़ावा मिलना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की भूमिका नागरिकों को व्यवस्था पर निर्भर बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की होनी चाहिए। भारत इसी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में देश के 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। यह संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है।
तकनीक और ज्ञान का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना जरूरी
प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार आज विकास के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इनका फायदा समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। तकनीक की असली सफलता तभी है, जब वह लोगों के जीवन को बेहतर बनाए और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर उपलब्ध कराए।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तकनीक का इस्तेमाल केवल कुछ लोगों की प्रगति के लिए होना चाहिए या इससे लाखों लोगों की क्षमता को भी बढ़ाया जाना चाहिए। पीएम मोदी के मुताबिक, ज्ञान और संसाधनों का उपयोग व्यापक जनहित में होना चाहिए, ताकि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों को मिल सके।
भारत को बताया लोकतंत्र की जननी
पीएम मोदी ने भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अलग-अलग भाषाएं बोली जाती हैं और लोगों को अपने विचार खुलकर रखने का अवसर मिलता है। उन्होंने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए देश के विशाल मीडिया और डिजिटल इकोसिस्टम का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत में 100 से अधिक भाषाएं, करीब 80 हजार पंजीकृत अखबार और प्रकाशन तथा 1,000 से अधिक सैटेलाइट टीवी चैनल हैं। इसके अलावा, देश में 50 करोड़ से अधिक यूट्यूब और 50 करोड़ से अधिक इंस्टाग्राम यूजर्स होने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भारत में विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बहस होती है और अलग-अलग विचारों को जगह मिलती है। डिजिटल तकनीक ने इस संवाद को और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
AI का इस्तेमाल मानवता के साथ पशुओं के हित में भी
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट का जिक्र करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल मानवता के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए जानवरों के हितों की रक्षा और उनके जीवन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की क्षमताओं में होने वाली वृद्धि का लाभ केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरी दुनिया और मानवता को भी फायदा पहुंच सकता है।
जलवायु परिवर्तन के लक्ष्य को समय से पहले हासिल करने का दावा
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत की प्रतिबद्धताओं का उल्लेख करते हुए पेरिस जलवायु समझौते के तहत निर्धारित लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2015 में 2030 तक अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 40 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से हासिल करने का लक्ष्य रखा था।
पीएम मोदी के अनुसार, भारत ने नवंबर 2021 में ही यह लक्ष्य हासिल कर लिया था, यानी निर्धारित समय से करीब नौ साल पहले। उन्होंने इसे जलवायु परिवर्तन से मुकाबले की दिशा में भारत की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
भारतीय परंपरा में भी निहित है विकास का यह विचार
पीएम मोदी ने कहा कि किसी व्यक्ति या संस्था के पास कितना ज्ञान, धन या शक्ति है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। शक्ति का वास्तविक महत्व उसके सही और जनहितकारी उपयोग में है।
उन्होंने कहा कि भारत की हजारों साल पुरानी परंपराएं भी इसी विचार पर जोर देती हैं। देश ने अपने शासन और कार्यप्रणाली में इस सोच को अपनाने का प्रयास किया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों और क्षमताओं का इस्तेमाल लोगों के कल्याण के लिए किया जा सके।
पहली बार भारत में आयोजित हुआ ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के भारत में पहली बार आयोजित होने पर खुशी जताई। उन्होंने ब्लूमबर्ग और उसकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह मंच हर साल दुनिया के प्रमुख विचारकों को एक साथ लाता है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीक और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है।
पीएम मोदी के संबोधन का मुख्य संदेश रहा कि तकनीक, ज्ञान और आर्थिक संसाधनों की वास्तविक उपयोगिता तभी है, जब उनका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे और वे लोगों को अधिक सक्षम, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में मदद करें।
