पुंछ में नए साल पर पाकिस्तान की बड़ी साजिश नाकाम: ड्रोन से गिराया गया आईईडी और नशीला पदार्थ बरामद
पुंछ: साल 2026 के पहले ही दिन सीमा पार से भारत में अशांति फैलाने की एक और नापाक कोशिश को भारतीय सुरक्षा बलों ने पूरी तरह विफल कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) के करीब पाकिस्तान की ओर से भेजे गए एक ड्रोन ने संदिग्ध बैग गिराया, जिसे मुस्तैद जवानों ने समय रहते बरामद कर लिया। इस बैग से भारी मात्रा में विस्फोटक और नशीले पदार्थ मिले हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि पड़ोसी देश नए साल के जश्न के बीच जम्मू-कश्मीर में किसी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था।
नियंत्रण रेखा पर ड्रोन की दस्तक और सुरक्षाबलों की मुस्तैदी
नए साल की पूर्व संध्या और पहले दिन को लेकर जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुंछ जिले के खड़ी सेक्टर में नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सेना के जवानों ने तड़के आसमान में एक उड़ती हुई संदिग्ध वस्तु देखी। यह एक पाकिस्तानी ड्रोन था जो भारतीय सीमा के काफी करीब आ चुका था। ड्रोन की हरकत पर नजर रखते हुए जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाला। अंधेरे का फायदा उठाकर ड्रोन ने एक बैग नीचे गिराया और वापस पाकिस्तान की सीमा में लौट गया। ड्रोन द्वारा सामान गिराए जाने की पुष्टि होते ही पूरे इलाके में अलर्ट घोषित कर दिया गया और सेना ने स्थानीय पुलिस व विशेष अभियान समूह (SOG) के साथ मिलकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया।
पुलस्त्य नदी के पास मिला संदिग्ध बैग: विस्फोटक और ड्रग्स बरामद
सुबह की पहली किरण के साथ ही सुरक्षाबलों ने खड़ी सेक्टर और उसके आसपास के जंगली इलाकों की घेराबंदी कर ली। पुलस्त्य नदी के किनारे सघन तलाशी के दौरान जवानों को वह बैग मिल गया जिसे ड्रोन के जरिए गिराया गया था। जब बम निरोधक दस्ते की मौजूदगी में उस बैग की जांच की गई, तो सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ गए। बैग के भीतर से तीन अलग-अलग पैकेट बरामद हुए। इनमें से एक पैकेट में घातक आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) मौजूद था, जिसका इस्तेमाल किसी बड़े धमाके के लिए किया जाना था। इसके अलावा अन्य पैकेटों में भारी मात्रा में नशीला पदार्थ और गोलियां (पिस्तौल के कारतूस) मिली हैं। माना जा रहा है कि इन हथियारों और ड्रग्स की खेप को सीमा पर सक्रिय आतंकियों के मददगारों (ओजीडब्ल्यू) तक पहुंचाया जाना था।
खुफिया इनपुट के बाद हाई अलर्ट पर थी सेना
यह सफलता केवल संयोग नहीं थी, बल्कि पुख्ता खुफिया जानकारी का परिणाम थी। सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों को पहले से ही इस बात की जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई नए साल के मौके पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ या हथियारों की तस्करी के लिए ड्रोन तकनीक का सहारा ले सकते हैं। इसी इनपुट के आधार पर पुंछ और राजौरी जैसे संवेदनशील जिलों में नियंत्रण रेखा पर गश्त बढ़ा दी गई थी। आधुनिक रडार और निगरानी उपकरणों की मदद से ड्रोन की गतिविधि को समय रहते ट्रैक कर लिया गया, जिसके कारण आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके।
नार्को-टेररिज्म का बढ़ता खतरा
बरामद किए गए सामान में नशीले पदार्थों की मौजूदगी ‘नार्को-टेररिज्म’ (Narco-Terrorism) के खतरनाक पैटर्न की ओर इशारा करती है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि आतंकी संगठन ड्रग्स की तस्करी के जरिए मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण (Funding) के लिए कर रहे हैं। ड्रोन के जरिए ड्रग्स और आईईडी भेजना यह दर्शाता है कि दुश्मन अब बिना सीमा पार किए भारतीय युवाओं को नशे की गर्त में धकेलने और साथ ही साथ आतंक फैलाने की दोहरी साजिश रच रहा है। बरामद आईईडी की क्षमता की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इसे रिमोट कंट्रोल से उड़ाया जाना था या इसमें टाइमर लगा था।
सेना, एसओजी और पुलिस का संयुक्त ऑपरेशन
इस ऑपरेशन की सबसे खास बात विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच का समन्वय रहा। ड्रोन की सूचना मिलते ही सेना की यूनिट ने तुरंत जम्मू-कश्मीर पुलिस और एसओजी को लूप में लिया। पुंछ जैसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों और नदी के तटों पर तलाशी अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन संयुक्त टीम ने पेशेवर तरीके से पूरे क्षेत्र को खंगाला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बरामद किए गए सामान की विस्तृत फॉरेंसिक जांच की जाएगी और यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि इस खेप को हासिल करने के लिए भारतीय सीमा के भीतर कौन से लोग सक्रिय थे।
पाकिस्तान की बौखलाहट और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तनाव
पुंछ की यह घटना पाकिस्तान की उस बौखलाहट को दर्शाती है जो वह कश्मीर में सामान्य होते हालातों और सफल पर्यटन सीजन के बाद महसूस कर रहा है। सर्दी के मौसम में जब बर्फबारी के कारण घुसपैठ के पारंपरिक रास्ते बंद होने लगते हैं, तब पाकिस्तान ड्रोन जैसे वैकल्पिक तरीकों का सहारा लेता है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईईडी का उपयोग भीड़भाड़ वाले इलाकों या सुरक्षाबलों के काफिले को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता था। हालांकि, सतर्कता के कारण एक संभावित त्रासदी को समय रहते टाल दिया गया।
क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की चुनौतियां
फिलहाल पुंछ जिले में तलाशी अभियान अभी भी जारी है। सुरक्षाबल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि क्या ड्रोन ने कहीं और भी कुछ सामान तो नहीं गिराया है। नियंत्रण रेखा से सटे गांवों में भी विशेष तलाशी ली जा रही है और ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे किसी भी अज्ञात वस्तु को हाथ न लगाएं और तुरंत पुलिस को सूचित करें। आने वाले गणतंत्र दिवस समारोह को देखते हुए पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को पहले से कहीं ज्यादा सख्त कर दिया गया है। सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम की तैनाती को भी और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की हवाई घुसपैठ को हवा में ही खत्म किया जा सके।