• February 11, 2026

भारत की मिट्टी में कम हैं नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कॉर्बन, जानें इस स्टडी ने क्यों उड़ाए होश

नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025: भारत की मिट्टी में गहरा संकट पैदा हो गया है। एक नई स्टडी ने खुलासा किया है कि हमारे खेतों की उर्वरता तेजी से घट रही है। नाइट्रोजन और ऑर्गेनिक कॉर्बन जैसे जरूरी तत्वों की भारी कमी मिली है। खाद डालने के बावजूद मिट्टी की सेहत सुधर नहीं रही। यह स्थिति खेती की पैदावार, किसानों की कमाई और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई को कमजोर कर रही है। स्टडी क्या कहती है? कौन से तत्व कम हो रहे हैं? खाद क्यों बेकार साबित हो रही? क्या इससे फसलें प्रभावित होंगी? क्या मिट्टी कार्बन सोखने की क्षमता खो रही है? एक्सपर्ट्स क्या सलाह दे रहे हैं? आगे जानिए पूरी रिपोर्ट और संभावित समाधान।

भारत की मिट्टी में भारी कमी: CSE की चौंकाने वाली स्टडी

दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) ने सरकारी सॉइल हेल्थ कार्ड के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट जारी की है। 2015 से चल रही इस योजना में मिट्टी के 12 रासायनिक गुणों की जांच होती है। 2023-2025 के बीच 1.3 करोड़ नमूने जांचे गए। रिपोर्ट ‘सस्टेनेबल फूड सिस्टम्स: एन एजेंडा फॉर क्लाइमेट-रिस्क्ड टाइम्स’ राजस्थान के निमली में AAETI कॉन्क्लेव में लॉन्च हुई। स्टडी में पाया गया कि 64% मिट्टी में नाइट्रोजन और 48.5% में ऑर्गेनिक कॉर्बन कम है। ये तत्व पौधों की बढ़त, मिट्टी की उर्वरता और कार्बन संग्रहण के लिए जरूरी हैं। भारत की मिट्टी दुनिया में उर्वरा मानी जाती है, लेकिन लगातार कमी चिंता बढ़ा रही है। यह खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण के लिए खतरा है।

खाद डाल रहे हैं, लेकिन फायदा क्यों नहीं?

स्टडी का सबसे चौंकाने वाला नतीजा यह है कि नाइट्रोजन खाद डालने के बावजूद मिट्टी में यह तत्व नहीं बढ़ रहा। एनपीके खादों से ऑर्गेनिक कॉर्बन में भी सुधार नहीं हो रहा। यानी अरबों रुपये की खाद बेकार जा रही है। इससे फसल उत्पादकता घटेगी। लंबे समय तक कमजोर मिट्टी से पैदावार कम होगी। जलवायु परिवर्तन से लड़ाई प्रभावित हो रही है, क्योंकि स्वस्थ मिट्टी सालाना 6-7 टेराग्राम कार्बन सोख सकती है। लेकिन कमी से यह क्षमता घट रही है। CSE के अमित खुराना कहते हैं कि सिर्फ 12 रासायनिक मापदंड पूर्ण सेहत नहीं दिखाते। FAO की GLOSOLAN भौतिक-जैविक संकेतक जोड़ने की सिफारिश करती है। पिछले दो साल में सिर्फ 1.1 करोड़ किसानों को ही कार्ड मिला।

समाधान के रास्ते: अभी से करें सुधार

एक्सपर्ट्स बायोचार को प्रभावी समाधान बता रहे हैं। बायोमास से पायरोलिसिस द्वारा बनने वाला बायोचार उर्वरता बढ़ाता है, नमी रोकता है और कार्बन जमा करता है। लेकिन भारत में इसके उत्पादन के मानक नहीं हैं। जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है, हालांकि सरकारी योजनाओं में क्षेत्र सीमित है। मिट्टी जांच में रासायनिक के साथ भौतिक-जैविक मापदंड शामिल करें। खाद प्रबंधन सुधारें, बिना सोचे डालना बंद करें। अपूर्व ओझा कहते हैं कि 14 करोड़ किसान परिवारों के लिए सवाल है- क्या मापा जा रहा, क्यों और कौन माप रहा? भारत की मिट्टी खाद्य और जलवायु सुरक्षा का आधार है। अभी सुधार न हुआ तो आने वाली पीढ़ियां भारी कीमत चुकाएंगी। तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।

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