• February 27, 2026

जाली मुद्रा मामले में पटना एनआईए की विशेष अदालत ने नेपाली नागरिक को सुनाई सात साल की सजा

 जाली मुद्रा मामले में पटना एनआईए की विशेष अदालत ने नेपाली नागरिक को सुनाई सात साल की सजा

एनआईए पटना की विशेष अदालत ने पूर्वी चंपारण में जाली नोट तस्करी मामले के दोषी को सात साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उसपर 5000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। उसका नाम अबी मोहम्मद अंसारी है, जो नेपाल के बारा जिले के रहने वाला है।

इस संबंध में एनआईए के एसपी मुकेश सिंह ने मंगलवार सुबह बताया कि 30 सितंबर, 2015 को राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने गति किनतेत्सु एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड नाम की एक कुरियर कंपनी के पास से मोहम्मद अली अख्तर अंसारी को गिरफ्तार किया था। उसकी तलाशी लेने पर उसके पास से 500 रुपये के उत्तम गुणवत्ता वाले 25 लाख 43 हजार के जाली नोट बरामद किए गए थे। सघन पूछताछ में पता चला कि अंसारी इस रुपये को नेपाल के रहने वाले अबी मोहम्मद उर्फ नबी मोहम्मद के पास पहुंचाने वाला था। उसकी निशानदेही पर नबी मोहम्मद को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

बाद में और अधिक जांच हुई तो पता चला कि सैयद मोहम्मद शफी नाम के पाकिस्तानी नागरिक, जो यूएई में रह रहा था, उसी ने इंटरनेशनल कूरियर सर्विस के जरिए इस जाली नोट को रक्सौल की कोरियर कंपनी के पास भेजा था। वहां से मोहम्मद अली अख्तर अंसारी इस नोट को लेकर नबी के पास पहुंचने वाला था। इसकी जानकारी मिलने के बाद एनआईए ने केस को टेकओवर किया और 15 मार्च, 2016 को नए सिरे से प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद इन दोनों के खिलाफ अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की गई।

21 सितंबर, 2016 को अली अख्तर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई जबकि नबी मोहम्मद के खिलाफ 14 अक्टूबर, 2017 को। इसके बाद से ट्रायल चल रहा था। 18 जुलाई, 2022 को मोहम्मद अली अख्तर अंसारी को 20 साल की सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जमाने की सजा सुनाई गई थी। अब नबी को सात साल की सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जमाने की सजा सुनाई गई है।

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