• February 13, 2026

पड़ोसी देश की पाबंदी पर ‘पाइरेसी’ भारी: पाकिस्तान में बैन हुई फिल्म ‘धुरंधर’ की कराची में मची धूम, मात्र 16 रुपये में बिक रही है डीवीडी

कराची/नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा और उसकी कहानियों का जादू सरहद पार पाकिस्तान में किस कदर सिर चढ़कर बोलता है, इसका एक ताजा और हैरान करने वाला उदाहरण सामने आया है। हाल ही में रिलीज हुई भारतीय फिल्म ‘धुरंधर’, जिसे अपनी संवेदनशील कहानी और चित्रण के कारण पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक तौर पर प्रतिबंधित कर दिया है, वहां के बाजारों में धड़ल्ले से बिक रही है। मामला तब सुर्खियों में आया जब एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय ब्लॉगर ने कराची के एक बाजार में इस फिल्म की पाइरेटेड डीवीडी बिकते हुए देखी, वह भी इतनी कम कीमत पर कि सुनकर कोई भी दंग रह जाए।

इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा न्यूजीलैंड मूल के प्रसिद्ध यूट्यूबर और ब्लॉगर कार्ल रॉक ने किया है, जो लंबे समय से भारत में रह रहे हैं और अक्सर दक्षिण एशियाई देशों की यात्रा कर वहां की संस्कृति और जमीनी हकीकत पर वीडियो बनाते हैं। कार्ल रॉक इन दिनों पाकिस्तान के दौरे पर हैं और उनके एक हालिया वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। वीडियो में कार्ल कराची के कुख्यात ‘रेनबो सेंटर’ में नजर आ रहे हैं, जिसे पाइरेटेड कंटेंट और गैर-कानूनी मीडिया का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है।

कार्ल रॉक जब इस बाजार में पहुंचे, तो उन्हें वहां वह चीज दिखी जिसकी उम्मीद एक प्रतिबंधित फिल्म के लिए नहीं की जा सकती थी। कार्ल ने वीडियो में हैरानी जताते हुए कहा कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर सख्त प्रतिबंध होने के बावजूद दुकानों पर भारतीय फिल्में सजी हुई हैं। जब उन्होंने एक दुकानदार से पूछा कि क्या उसके पास कोई नई फिल्म है, तो दुकानदार ने गर्व से ‘धुरंधर’ फिल्म की डीवीडी निकालकर थमा दी। दुकानदार ने कार्ल को बताया कि यह एक भारतीय फिल्म है और हाल ही में रिलीज हुई है।

हैरानी का सिलसिला यहीं नहीं थमा। जब कार्ल रॉक ने उस डीवीडी की कीमत पूछी, तो दुकानदार का जवाब सुनकर वह अपनी हंसी नहीं रोक पाए। दुकानदार ने बताया कि इस फिल्म की डीवीडी की कीमत मात्र 50 पाकिस्तानी रुपये है। अगर भारतीय मुद्रा में इसका हिसाब लगाया जाए, तो यह राशि महज 16 रुपये के आसपास बैठती है। मात्र 16 रुपये में एक ऐसी फिल्म उपलब्ध होना जिसे सरकार ने बैन किया हुआ है, पाकिस्तान के कानून प्रवर्तन और कॉपीराइट कानूनों की पोल खोलने के लिए काफी है।

जैसे ही कार्ल रॉक का यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ, भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पाकिस्तान को जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। भारतीय यूजर्स के लिए यह बात न केवल मनोरंजन का विषय बनी, बल्कि उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति पर भी तंज कसे। यूजर्स का सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर गया कि जहां पूरी दुनिया अब ओटीटी प्लेटफॉर्म और हाई-स्पीड इंटरनेट के दौर में जी रही है, वहीं पाकिस्तान में आज भी फिल्मों के लिए सीडी और डीवीडी का चलन बना हुआ है।

एक सोशल मीडिया यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा कि जिस फिल्म में पाकिस्तान की कमियों या उसके खिलाफ कुछ दिखाया गया है, उसी फिल्म को देखने के लिए वहां के लोग उतावले हैं और पाइरेटेड कॉपी खरीद रहे हैं। एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि भारत में पाइरेटेड सीडी का जमाना 15 साल पहले ही खत्म हो चुका है, लेकिन पाकिस्तान शायद अभी भी उसी दशक में अटका हुआ है। कई लोगों ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि क्या आज के दौर में भी कोई पेनड्राइव या सीडी में फिल्में भरकर बेचता है, जबकि दुनिया के अधिकांश हिस्सों में यह ट्रेंड एक दशक पहले ही लुप्त हो चुका है।

दिलचस्प बात यह है कि ‘धुरंधर’ फिल्म 30 जनवरी को वैश्विक स्तर पर नेटफ्लिक्स जैसे प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। रिलीज के तुरंत बाद ही यह फिल्म भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में नेटफ्लिक्स की साप्ताहिक टॉप 10 सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गई थी। यह अपने आप में एक विरोधाभास है कि एक तरफ पाकिस्तान सरकार ने फिल्म की सामग्री पर आपत्ति जताते हुए इसे आधिकारिक रूप से प्रतिबंधित कर रखा है, वहीं दूसरी तरफ वहां की जनता इसे इंटरनेट और अब पाइरेटेड डीवीडी के माध्यम से बड़े पैमाने पर देख रही है।

यह मामला केवल एक फिल्म के बैन या उसकी बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि कला और मनोरंजन को सीमाओं या पाबंदियों में बांधना कितना मुश्किल है। कराची के रेनबो सेंटर से आई इन तस्वीरों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाइरेसी का बाजार पाकिस्तान में किस कदर जड़ें जमा चुका है कि सरकार के प्रतिबंध भी वहां बेअसर साबित हो रहे हैं। फिलहाल, कार्ल रॉक का यह वीडियो दोनों देशों के इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और पाकिस्तान की ‘डीवीडी संस्कृति’ पर मीम्स की बाढ़ आ गई है।

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