• January 4, 2026

मुरादाबाद मतदाता सूची में बड़ी कटौती: एसआईआर अभियान के बाद 3.87 लाख वोटर लिस्ट से बाहर

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में मतदाता सूची के शुद्धिकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान ने जिले के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलट-पुलट कर दिया है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मुरादाबाद जिले की मतदाता सूची से कुल 3.87 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। यह संख्या कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की सभी छह सीटों पर जीत-हार के कुल अंतर को मिला दिया जाए, तो कटे हुए वोटों की संख्या उस अंतर से दोगुने से भी अधिक है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 24.59 लाख थी, लेकिन एसआईआर अभियान के तहत केवल 20.63 लाख मतदाताओं के गणना-प्रपत्र ही सही पाए गए। शेष मतदाताओं के नाम अलग-अलग श्रेणियों के आधार पर सूची से विलोपित कर दिए गए हैं।

नगर विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक: 1.12 लाख नाम हटे

एसआईआर अभियान का सबसे व्यापक असर मुरादाबाद नगर विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला है। यह वही सीट है जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले का सबसे कड़ा मुकाबला हुआ था। उस समय भाजपा के रितेश गुप्ता ने समाजवादी पार्टी के हाजी यूसुफ अंसारी को मात्र 782 मतों के मामूली अंतर से शिकस्त दी थी। अब इसी विधानसभा सीट से रिकॉर्ड 1.12 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले 2027 के चुनाव में जीत-हार का फैसला पूरी तरह से बदल सकता है। 782 वोटों के अंतर वाली सीट पर 1 लाख से अधिक वोटों का कटना किसी भी दल की चुनावी रणनीति को ध्वस्त करने के लिए पर्याप्त है।

एएसडी श्रेणी और अनकलेक्टिव वोटरों पर रहा प्रशासन का ध्यान

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नाम काटने की यह प्रक्रिया नियमानुसार पूरी की गई है। इस अभियान के अंतिम चरणों में जिला प्रशासन का मुख्य ध्यान ‘अनकलेक्टिव मतदाताओं’ (एएसडी) पर केंद्रित रहा। एएसडी श्रेणी में उन मतदाताओं को शामिल किया गया है जो या तो अनुपस्थित (Absent) पाए गए, या जो दूसरी जगह शिफ्ट (Shifted) हो चुके हैं। इसके अलावा इस सूची में डुप्लीकेट नाम और मृतक वोटरों के नाम भी शामिल थे। आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए 3.87 लाख नामों में से लगभग 73 हजार नाम ऐसे थे, जो मतदाता की मृत्यु होने के बावजूद वर्षों से सूची में बने हुए थे। वहीं, लगभग 2.10 लाख मतदाता ऐसे भी पाए गए जिनकी ‘मैपिंग’ नहीं हो पाई। इन मतदाताओं ने गणना-प्रपत्र भरते समय अपने साक्ष्य या आवश्यक ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया था। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि यदि ये मतदाता वैध साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, तो इनका नाम पुनः सूची में शामिल किया जा सकता है।

जीत के अंतर और कटे हुए वोटों का तुलनात्मक विश्लेषण

मुरादाबाद जिले की सभी छह विधानसभा सीटों का विश्लेषण करें तो चुनावी मुकाबला हमेशा से दिलचस्प रहा है। 2022 में इन सभी सीटों पर जीत का कुल योग 1.71 लाख मतों का रहा था। तुलनात्मक रूप से देखें तो देहात विधानसभा क्षेत्र में 90,937 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जबकि वहां 2022 में जीत का अंतर 56,820 रहा था। इसी तरह बिलारी में 95,649 नाम कटे, जबकि जीत का अंतर केवल 7,610 था। ठाकुरद्वारा में 43,667, कांठ में 49,803 और कुंदरकी में 41,302 वोटरों के नाम सूची से बाहर हुए हैं। यह स्पष्ट है कि लगभग हर सीट पर जितने वोटों से प्रत्याशी की हार-जीत हुई थी, उससे कहीं अधिक संख्या में अब मतदाता सूची से नाम गायब हो चुके हैं। इस विसंगति ने समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी दोनों ही खेमों में चिंता की लहर पैदा कर दी है।

कुंदरकी का बदला मिजाज: उपचुनाव ने दिए नए संकेत

जिले के भीतर राजनीतिक बदलाव की बयार कुंदरकी उपचुनाव में भी देखने को मिली। 2022 के आम चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुंदरकी सीट पर 43,162 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। लेकिन 2024 में हुए उपचुनाव में यह समीकरण पूरी तरह बदल गया और भाजपा उम्मीदवार रामवीर सिंह ने 1,44,791 मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की। उपचुनाव के इन नतीजों और अब एसआईआर अभियान के तहत हुई कटौती ने यह संकेत दे दिया है कि जिले के मतदाता आधार में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है। अगर नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो 2027 के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।

राजनीतिक दलों की चिंता और आगामी चुनौतियां

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से राजनीतिक दलों में खलबली मचना स्वाभाविक है। विपक्ष का आरोप है कि नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है, जबकि सत्ता पक्ष और प्रशासन इसे सूची के ‘शुद्धिकरण’ की एक अनिवार्य प्रक्रिया बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि कटे हुए नाम समय रहते वापस नहीं जुड़े और नए पात्र मतदाताओं के नाम नहीं बढ़ाए गए, तो यह मुरादाबाद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता अब घर-घर जाकर यह चेक कर रहे हैं कि उनके समर्थकों के नाम सूची में बरकरार हैं या नहीं।

मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन: 28 फरवरी की तारीख महत्वपूर्ण

जिला प्रशासन ने मतदाता सूची के अपडेशन के लिए एक विस्तृत समय सारणी जारी की है। दावे और आपत्तियां प्राप्त करने की प्रक्रिया 31 दिसंबर से शुरू होकर 30 जनवरी तक चली। अब प्रशासन के पास इन दावों और आपत्तियों के निस्तारण की जिम्मेदारी है, जिसके लिए 21 फरवरी तक की समय सीमा तय की गई है। समस्त प्रक्रियाओं और जांच के बाद 28 फरवरी को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। यह अंतिम सूची ही तय करेगी कि मुरादाबाद जिले की राजनीति किस दिशा में मुड़ेगी। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अपना नाम सूची में सुनिश्चित करें ताकि लोकतंत्र के महापर्व में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

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