मिजोरम में रेलवे क्रांति और सुरक्षा की चुनौती: सैरांग स्टेशन पर आईएलपी का रिकॉर्ड आंकड़ा और पुलिस बल पर बढ़ता दबाव
आइजोल: पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार मिजोरम में परिवहन के एक नए युग की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक और सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 सितंबर 2025 को बहुप्रतीक्षित बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन के उद्घाटन के बाद से राज्य में आने वाले आगंतुकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उद्घाटन के महज कुछ महीनों के भीतर सैरांग रेलवे स्टेशन पर 22,431 इनर लाइन परमिट (आईएलपी) जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा न केवल मिजोरम में बढ़ते पर्यटन और व्यापारिक आकर्षण को दर्शाता है, बल्कि राज्य की जनसांख्यिकीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
बैराबी-सैरांग रेल लाइन: मिजोरम की नई जीवनरेखा
मिजोरम की राजधानी आइजोल को शेष भारत से जोड़ने वाली 51.38 किलोमीटर लंबी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन राज्य के विकास में एक मील का पत्थर साबित हो रही है। पिछले साल सितंबर में इसके उद्घाटन के साथ ही प्रधानमंत्री ने दिल्ली को जोड़ने वाली मिजोरम की पहली राजधानी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई थी। इसके अलावा, आइजोल-कोलकाता और आइजोल-गुवाहाटी के बीच चलने वाली ट्रेनों ने राज्य के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को बदल दिया है।
रेलवे लाइन के खुलने से पहले मिजोरम काफी हद तक सड़क परिवहन पर निर्भर था, जो कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मानसून के कारण अक्सर बाधित रहता था। अब, ट्रेनों के नियमित संचालन से न केवल माल ढुलाई आसान हुई है, बल्कि पर्यटकों और व्यापारियों के लिए भी राज्य तक पहुंच सुगम हो गई है। हालांकि, इस सुगमता ने राज्य के विशेष सुरक्षा तंत्र यानी ‘इनर लाइन परमिट’ प्रणाली पर काम का बोझ कई गुना बढ़ा दिया है।
इनर लाइन परमिट (ILP): एक अनिवार्य सुरक्षा कवच
मिजोरम में प्रवेश करने वाले किसी भी भारतीय नागरिक (जो राज्य का मूल निवासी नहीं है) के लिए आईएलपी एक अनिवार्य आधिकारिक यात्रा दस्तावेज है। यह व्यवस्था बंगाल पूर्वी सीमांत विनियमन (BEFR), 1873 के तहत लागू है, जिसे मूल रूप से ब्रिटिश सरकार द्वारा 1875 में अधिसूचित किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य संवेदनशील सीमावर्ती राज्यों की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति, भूमि और संसाधनों को बाहरी हस्तक्षेप से बचाना है।
सैरांग स्टेशन पर तैनात पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 13 सितंबर 2025 से लेकर दिसंबर के अंत तक कुल 20,914 परमिट जारी किए गए थे। नए साल की शुरुआत के साथ ही, 1 से 8 जनवरी के बीच 1,517 अतिरिक्त आईएलपी जारी किए गए, जिससे कुल संख्या 22,431 तक पहुंच गई। पुलिस का कहना है कि औसतन हर ट्रेन के आने पर 100 से 200 यात्रियों को मौके पर ही परमिट जारी करने पड़ते हैं। प्रतिदिन दो ट्रेनों के आगमन से स्टेशन पर आईएलपी काउंटर पर भारी भीड़ देखी जा रही है।
आगंतुकों की प्रकृति और पर्यटन में उछाल
आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मिजोरम आने वाले लोगों की प्रकृति मौसम के साथ बदलती रही है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में आने वाले अधिकांश लोग पर्यटक थे, जो मिजोरम की प्राकृतिक सुंदरता और सर्दियों के मौसम का लुत्फ उठाने आए थे। ये पर्यटक मुख्य रूप से दिल्ली, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारतीय राज्यों से पहुंचे, जिनमें सबसे बड़ी संख्या पड़ोसी राज्य असम के नागरिकों की रही।
वहीं, दिसंबर और जनवरी की शुरुआत में आने वालों में प्रवासी श्रमिकों और व्यापारियों की संख्या अधिक दर्ज की गई। रेलवे लाइन ने व्यापारियों के लिए कोलकाता और गुवाहाटी जैसे व्यापारिक केंद्रों से माल लाना आसान बना दिया है, जबकि विकास परियोजनाओं के लिए बाहरी राज्यों से आने वाले श्रमिकों की संख्या भी बढ़ी है। हालांकि, इस भीड़ के बीच पुलिस को कुछ संदिग्ध गतिविधियों का भी सामना करना पड़ा है। कई मौकों पर ऐसे लोगों को पकड़ा गया जो परमिट नियमों का उल्लंघन कर भागने की कोशिश कर रहे थे। इसके अलावा, कुछ बाहरी भिखारियों का भी पता लगाया गया, जिन्हें नियमों के तहत तुरंत उनके पैतृक गांवों में वापस भेज दिया गया।
पुलिस बल की चुनौतियां: संसाधनों और कर्मचारियों की भारी कमी
रेलवे की इस सफलता के पीछे सैरांग पुलिस थाने के कर्मचारियों की कड़ी मशक्कत और थकान भरी दिनचर्या छिपी है। वर्तमान में यह थाना कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। थाने में कुल 20 पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिनके कंधों पर न केवल सामान्य कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, बल्कि उन्हें आईएलपी सत्यापन और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के जटिल कर्तव्यों का भी निर्वहन करना पड़ रहा है।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जीआरपी को अभी तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है, फिर भी पुलिसकर्मी यातायात नियंत्रण, पार्किंग प्रबंधन और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। जब एक साथ 1,500 से 2,000 यात्री स्टेशन पर उतरते हैं, तो मात्र 20 कर्मियों के लिए स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ट्रेनों के अक्सर देरी से आने के कारण पुलिसकर्मियों को रात 2 बजे तक ड्यूटी करनी पड़ती है और फिर सुबह 7 बजे वे वापस ड्यूटी पर लौट आते हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त जीआरपी ड्यूटी के लिए कोई विशेष भत्ता या प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा रही है।
निष्कर्ष और भविष्य की राह
बैराबी-सैरांग रेल लाइन ने निश्चित रूप से मिजोरम के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं, लेकिन इसके साथ ही राज्य सरकार को अपनी प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत करने की आवश्यकता है। सैरांग स्टेशन पर आईएलपी काउंटर का डिजिटलीकरण और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती अब अनिवार्य हो गई है। यदि सुरक्षा जांच और परमिट प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित नहीं किया गया, तो भविष्य में बढ़ती भीड़ के कारण कानून-व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा से समझौता होने का जोखिम बना रहेगा। मिजोरम की पहली राजधानी एक्सप्रेस का चलना गर्व का विषय है, लेकिन इस गौरव को बनाए रखने के लिए धरातल पर काम कर रहे पुलिस बल को उचित संसाधन और विश्राम देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।