• February 15, 2026

दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: बिहार के गया में फर्जी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़, 5 करोड़ से ज्यादा के ट्रामाडोल पाउडर सहित भारी मात्रा में नकली दवाएं जब्त; मास्टरमाइंड अरुण समेत 9 गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी और नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। बिहार के गया जिले में चल रही एक फर्जी दवा फैक्ट्री पर छापेमारी में गिरोह के मास्टर कोऑर्डिनेटर अरुण (59) को गिरफ्तार किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 9 कार्टेल सदस्यों की गिरफ्तारी हो चुकी है। यह कार्रवाई एफआईआर संख्या 273/25, धारा 22 एनडीपीएस एक्ट के तहत थाना क्राइम ब्रांच में दर्ज की गई है।
ऑपरेशन का नेतृत्व और विवरणडीसीपी/एएनटीएफ संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में, एसीपी सतेंद्र मोहन की निगरानी और इंस्पेक्टर नितेश कुमार की टीम ने यह सफलता हासिल की। पिछले सप्ताह गिरफ्तार आरोपी तनीष्क से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर टीम गया पहुंची। एसआई विकासदीप के नेतृत्व में छापेमारी की गई, जहां अरुण को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि अरुण बिना किसी वैध लाइसेंस या योग्य फार्मासिस्ट के फर्जी फैक्ट्री चला रहा था। मौके पर बिहार ड्रग विभाग की टीम भी शामिल हुई और भारी जब्ती की गई।
बरामदगी का विवरण

  • नकली टैबलेट: 1,19,800 जिंक टैबलेट और 42,480 एज़िथ्रोमाइसिन टैबलेट
  • कच्चा माल: 27 किलोग्राम पैरासिटामोल पाउडर और 5 किलोग्राम से अधिक अवैध ट्रामाडोल पाउडर
  • अन्य: 444 डिलोना एक्वा एम्प्यूल्स और दवा निर्माण की भारी मशीनरी ट्रामाडोल पाउडर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

कैसे चलता था गोरखधंधा?

जांच में खुलासा हुआ कि यह गिरोह अवैध रूप से ओपिओइड्स, साइकोट्रोपिक पदार्थ, नकली दवाएं और सिरप तैयार कर फर्जी मेडिकल स्टोर्स तथा क्षेत्रीय सप्लायरों के माध्यम से बाजार में सप्लाई कर रहा था। अरुण की फैक्ट्री में तस्करी से लाए गए ट्रामाडोल पाउडर को प्रोसेस कर टैबलेट बनाई जाती थीं, जिन्हें हेरोइन के विकल्प के रूप में अवैध बाजार में ऊंची कीमत पर बेचा जाता था। पूरी प्रक्रिया—कच्चे माल की खरीद से लेकर उत्पादन और वितरण तक—गैरकानूनी थी।दूसरी फैक्ट्री का भी भंडाफोड़यह कार्रवाई एक सप्ताह में बिहार में दूसरी फर्जी फार्मास्यूटिकल यूनिट का भंडाफोड़ है। इससे पहले पटना में भी एक ऐसी ही इकाई का पर्दाफाश किया गया था। अब तक दो फर्जी फैक्ट्रियों को ध्वस्त किया जा चुका है। पुलिस ने तकनीकी निगरानी, विभिन्न राज्यों में छापेमारी, हजारों किलोमीटर की यात्रा और हाई-स्पीड चेज के बाद इस नेटवर्क को तोड़ा है।
आरोपी का प्रोफाइलअरुण (59), मूल निवासी गया (बिहार), कम समय में भारी मुनाफा कमाने के लालच में बड़े पैमाने पर अवैध दवा निर्माण में लगा था। वह अन्य सदस्यों के साथ कच्चा माल मंगवाता और फैक्ट्री में ओपिओइड्स व नकली दवाएं बनाकर अन्य राज्यों में सप्लाई करता था। एएनटीएफ टीम बाकी फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और जांच जारी है।
यह कार्रवाई नकली दवाओं और नशीले पदार्थों के खिलाफ दिल्ली पुलिस की सख्ती को दर्शाती है, जो आम जनता के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि संदिग्ध दवाओं की खरीद-फरोख्त से बचें और ऐसी जानकारी तुरंत सूचित करें।
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