• February 11, 2026

महाराष्ट्र में सियासी पारा गर्म: राज ठाकरे और भगत सिंह कोश्यारी के बीच ‘डर’ को लेकर जुबानी जंग, मोदी और आरएसएस पर भिड़े दोनों नेता

नासिक/मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इस बार आमने-सामने हैं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे और राज्य के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी। दोनों नेताओं के बीच शुरू हुआ यह वाकयुद्ध अब ‘डर’ और ‘आस्था’ के इर्द-गिर्द सिमट गया है। विवाद की जड़ में आरएसएस का एक कार्यक्रम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रभाव है, जिसे लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे कटाक्ष किए हैं। जहां राज ठाकरे ने फिल्मी सितारों की आरएसएस के कार्यक्रम में मौजूदगी को मोदी सरकार का खौफ बताया, वहीं कोश्यारी ने पलटवार करते हुए कहा कि दरअसल राज ठाकरे खुद प्रधानमंत्री से डरे हुए हैं।

इस पूरे विवाद की पटकथा पिछले दिनों नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक बड़े कार्यक्रम से लिखी गई। इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ फिल्म जगत की दिग्गज हस्तियां जैसे सलमान खान, रणबीर कपूर और करण जौहर शामिल हुए थे। इतना ही नहीं, कुछ वर्तमान आईएएस अधिकारियों की मौजूदगी ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी थी। इस जमावड़े पर टिप्पणी करते हुए राज ठाकरे ने दावा किया था कि ये तमाम सितारे और अधिकारी अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार के डर से नागपुर पहुंचे थे। ठाकरे का संकेत था कि वर्तमान शासन में लोगों को अपनी निष्ठा प्रदर्शित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

राज ठाकरे के इस बयान पर पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने नासिक में पत्रकारों से बात करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। कोश्यारी ने ठाकरे के ‘डर’ वाले दावे को सिरे से खारिज करते हुए पासा पलट दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि फिल्म जगत की हस्तियां या अधिकारी किसी दबाव में संघ के कार्यक्रम में गए थे। इसके विपरीत, कोश्यारी ने आरोप लगाया कि राज ठाकरे स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव और उनकी कार्यशैली से डरे हुए हैं। उन्होंने राज ठाकरे को ‘छोटा भाई’ संबोधित करते हुए एक नसीहत भी दे डाली। कोश्यारी ने कहा कि ठाकरे को मोदी से डरने के बजाय उनके करीब आने का प्रयास करना चाहिए।

भगत सिंह कोश्यारी यहीं नहीं रुके, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना भगवान राम से कर दी। उन्होंने कहा कि मोदी जी भगवान राम की तरह हैं, जिनकी दृष्टि में देश का हर नागरिक समान है और वे सबके कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। राज ठाकरे को महाराष्ट्र की विरासत की याद दिलाते हुए कोश्यारी ने कहा कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज की पावन धरती पर हैं, जहां केवल गलत काम करने वालों को डरना चाहिए, नेक राह पर चलने वालों को नहीं। कोश्यारी के इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि उन्होंने एक राजनीतिक व्यक्तित्व को सीधे तौर पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा के साथ जोड़कर पेश किया है।

इस विवाद की एक और कड़ी भाषा और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ी है। दरअसल, यह पूरी तल्खी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के एक हालिया बयान के बाद और बढ़ गई थी। भागवत ने देश में चल रहे भाषा विवाद को एक ‘स्थानीय बीमारी’ करार दिया था। राज ठाकरे, जो अपनी राजनीति की शुरुआत से ही मराठी भाषा और प्रान्तीय गौरव के पैरोकार रहे हैं, ने इस पर तीखा पलटवार किया था। ठाकरे ने कहा था कि अगर अपनी मातृभाषा और अपने राज्य से प्रेम करना ‘बीमारी’ है, तो भारत के लगभग सभी राज्य इस बीमारी की चपेट में हैं। उन्होंने सवाल उठाया था कि संघ प्रमुख केवल महाराष्ट्र के संदर्भ में ही ऐसी बातें क्यों करते हैं और दूसरे राज्यों को ऐसी सलाह क्यों नहीं देते।

राज ठाकरे और भगत सिंह कोश्यारी के बीच की यह जंग केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की आगामी राजनीतिक दिशा की ओर भी संकेत करती है। एक तरफ राज ठाकरे अपनी ‘मराठी मानुष’ की छवि और हिंदुत्व के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा और उसके समर्थक नेता उन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के प्रति समर्पण दिखाने की चुनौती दे रहे हैं। नासिक में कोश्यारी के इस आक्रामक रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा अब राज ठाकरे की आलोचनाओं को सहजता से नहीं लेने वाली है।

वर्तमान में, महाराष्ट्र की जनता इस जुबानी जंग को बड़े ध्यान से देख रही है। राज ठाकरे द्वारा फिल्मी सितारों के ‘डर’ का मुद्दा उठाना और जवाब में कोश्यारी द्वारा उन्हें ‘मोदी भक्त’ बनने की सलाह देना, राज्य में ध्रुवीकरण की नई राजनीति को जन्म दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनसे प्रमुख कोश्यारी की इस ‘नसीहत’ पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह विवाद महाराष्ट्र के आगामी चुनावों के समीकरणों को प्रभावित करेगा। फिलहाल, ‘डर’ बनाम ‘श्रद्धा’ की इस लड़ाई ने महाराष्ट्र के राजनीतिक तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है।

Digiqole Ad

Related Post

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *