October 6, 2026

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Maharashtra Water Cut: महाराष्ट्र में 16 अक्टूबर से 10% पानी कटौती, जानें सरकार ने क्यों लिया फैसला

मुंबई: कम मानसून और अल-नीनो के संभावित प्रभाव के चलते महाराष्ट्र में सूखे जैसे हालात की आशंका जताई जा रही है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर 2026 से पूरे महाराष्ट्र में 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का फैसला किया है। जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने सोमवार को इसकी जानकारी दी।

सरकार के निर्देश सभी ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों पर लागू होंगे। इनमें महानगरपालिकाएं, नगरपालिकाएं और ग्राम पंचायतें शामिल हैं। सरकार का कहना है कि जल उपलब्धता को देखते हुए अभी से पानी के इस्तेमाल और भंडारण की योजना तैयार की जा रही है।

31 अगस्त 2027 तक की गई पानी की प्लानिंग

जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन के मुताबिक, जल संसाधन विभाग ने राज्य के बांधों में उपलब्ध पानी का बांधवार और उपयोगिता के आधार पर विस्तृत आकलन किया है। इसके आधार पर 31 अगस्त 2027 तक की जल प्रबंधन योजना तैयार की गई है।

इस योजना में कम मानसून, अल-नीनो के संभावित प्रभाव और सूखे जैसी स्थिति की आशंका को ध्यान में रखा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जल आवंटन में सबसे पहली प्राथमिकता पेयजल की जरूरत को दी जाएगी।

पानी के रिसाव पर रोक लगाने के निर्देश

सरकार ने सभी स्थानीय निकायों को पानी की बर्बादी और रिसाव रोकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित करने को कहा गया है, ताकि शोधित पानी का ज्यादा से ज्यादा पुन: उपयोग किया जा सके।

उद्योगों को 30% पानी दोबारा इस्तेमाल करने को कहा

औद्योगिक क्षेत्र में पानी की खपत कम करने के लिए भी सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उद्योगों को उनके इस्तेमाल किए जाने वाले कम से कम 30 प्रतिशत पानी का पुन: उपयोग करने को कहा गया है।

सरकार का उद्देश्य ताजे पानी की मांग कम करना और उपलब्ध जल संसाधनों का अधिक प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

हर बांध में 10% अतिरिक्त आपातकालीन बफर

गिरीश महाजन ने बताया कि राज्य के प्रत्येक बांध में 10 प्रतिशत अतिरिक्त आपातकालीन बफर स्टॉक रखा जाएगा। वाष्पीकरण, गाद और अनधिकृत जल निकासी जैसे संभावित नुकसान को ध्यान में रखते हुए 31 अगस्त 2027 तक पेयजल की जरूरत के लिए पर्याप्त पानी आरक्षित रखने की योजना है।

पेयजल के बाद मवेशी और चारा, फिर सिंचाई

सरकार ने पानी के इस्तेमाल की प्राथमिकता भी तय की है। सबसे पहले पेयजल की जरूरत पूरी की जाएगी। इसके बाद मवेशियों और चारे के लिए पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इन जरूरतों को पूरा करने के बाद ही सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाएगा।

कृषि क्षेत्र के लिए पानी की उपलब्धता बांधों में मौजूद जल भंडार के आधार पर तय की जाएगी।

अवैध पानी निकासी पर होगी कार्रवाई

बांधों, नदियों और नहरों से अवैध तरीके से पानी निकालने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अधिकारी राजस्व और पुलिस विभाग के साथ मिलकर निगरानी और गश्त करेंगे।

अवैध रूप से पानी खींचने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पंप और अन्य उपकरणों को जब्त करने के निर्देश दिए गए हैं।

कई विभाग मिलकर करेंगे जल संकट की निगरानी

जल संसाधन मंत्री के मुताबिक, जल संसाधन, राजस्व, कृषि, उद्योग और शहरी विकास विभाग आपसी समन्वय के साथ स्थिति की निगरानी करेंगे। सरकार ने नागरिकों और सरकारी एजेंसियों से पानी का विवेकपूर्ण इस्तेमाल करने और अधिक से अधिक पानी बचाने की अपील की है।

इससे पहले मुंबई में भी 15 मई से 10 प्रतिशत पानी कटौती लागू करने का फैसला लिया गया था। अब राज्यभर में पानी की उपलब्धता को देखते हुए 16 अक्टूबर से 10 प्रतिशत कटौती लागू की जाएगी।

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