हिजाब पर बहस नहीं, महिलाओं की आज़ादी पर हो चर्चा: कैराना सांसद इकरा हसन का स्पष्ट संदेश
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Madhulika- December 16, 2025
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नई दिल्ली। कैराना से लोकसभा सांसद इकरा हसन का हिजाब को लेकर दिया गया बयान इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि हिजाब पहनना या न पहनना मुस्लिम महिलाओं की व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इसे न तो राजनीतिक बहस का मुद्दा बनाया जाना चाहिए और न ही सामाजिक विवाद का। उनके अनुसार, यह निर्णय पूरी तरह महिलाओं पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
मंगलवार को एक न्यूज़ चैनल पर प्रसारित एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एंकर ने देश में हिजाब को लेकर चल रही बहस पर सवाल उठाया। इस सवाल के जवाब में सांसद इकरा हसन ने जिस बेबाकी से अपनी बात रखी, उसने कई लोगों का ध्यान खींचा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधता वाले देश में हिजाब जैसे मुद्दों पर अनावश्यक बहस करना समय और ऊर्जा की बर्बादी है, जबकि देश इससे कहीं अधिक गंभीर समस्याओं का सामना कर रहा है।
“यह बहस का विषय ही नहीं होना चाहिए”
इकरा हसन ने स्पष्ट किया कि हिजाब को लेकर जो राजनीतिक और मीडिया बहस चल रही है, वह न केवल गैर-ज़रूरी है, बल्कि महिलाओं की आज़ादी के मूल सिद्धांत के भी खिलाफ जाती है। उन्होंने कहा,
“हिजाब पहनना या न पहनना किसी महिला की निजी इच्छा पर निर्भर करता है। इसे ओपन छोड़ा जाना चाहिए। अगर कोई किसी को हिजाब पहनने या न पहनने के लिए मजबूर करता है, तो वह लोकतंत्र नहीं है।”
उनके इस बयान को कई लोग महिलाओं के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के समर्थन के रूप में देख रहे हैं। सांसद ने यह भी कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में व्यक्ति की पसंद और स्वतंत्रता सर्वोपरि होनी चाहिए, चाहे वह पहनावे से जुड़ा मामला ही क्यों न हो।
महिलाओं की आज़ादी का सवाल
इकरा हसन ने हिजाब के मुद्दे को महिलाओं की आज़ादी से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी महिला पर उसकी पसंद के खिलाफ दबाव डालना गलत है। चाहे वह दबाव परिवार, समाज या सरकार की ओर से हो, यह महिलाओं के अधिकारों का हनन है।
उन्होंने कहा कि यह बहस अक्सर महिलाओं की आवाज़ को दरकिनार कर देती है और उनके जीवन से जुड़े असली मुद्दों को पीछे धकेल देती है।
“अगर हम सच में महिलाओं के अधिकारों की बात करते हैं, तो हमें उनकी पसंद का सम्मान करना होगा,” उन्होंने कहा।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला
सांसद इकरा हसन ने अपने बयान में अंतरराष्ट्रीय संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई देशों में इस तरह के मुद्दों को अनावश्यक तूल नहीं दिया जाता। वहां सरकारें और समाज शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसे वास्तविक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
उन्होंने कहा,
“विदेशों में इस तरह के मुद्दों पर बहस नहीं होती। वहां यह माना जाता है कि व्यक्ति को अपनी पहचान और पहनावे का अधिकार है। हमें भी उसी दिशा में सोचने की ज़रूरत है।”
संस्कृति और परंपरा पर संतुलित दृष्टिकोण
इकरा हसन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संस्कृति और परंपरा के महत्व को नकार नहीं रही हैं। उन्होंने बताया कि वह स्वयं एक मुस्लिम महिला हैं और ऐसे क्षेत्र से आती हैं, जहां सभी समुदायों की महिलाएं सिर ढकती हैं।
उन्होंने कहा,
“यह हमारी संस्कृति का हिस्सा है। लेकिन संस्कृति का मतलब यह नहीं कि उसे किसी पर थोपा जाए। परंपरा तभी सार्थक होती है, जब वह स्वेच्छा से अपनाई जाए।”
उनका यह बयान इस बात को रेखांकित करता है कि संस्कृति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है।
अन्य अहम मुद्दों पर फोकस की जरूरत
सांसद इकरा हसन ने समाज और सरकार से अपील की कि वे हिजाब जैसे मुद्दों से आगे बढ़कर देश की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, महंगाई और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
उन्होंने दो टूक कहा,
“देश में बेरोजगारी बढ़ रही है, महंगाई आम आदमी की कमर तोड़ रही है, महिलाओं की सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। इन मुद्दों पर बहस होनी चाहिए, न कि किसी के पहनावे पर।”
उनके अनुसार, मीडिया और राजनीतिक दलों को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और उन विषयों पर चर्चा करनी चाहिए, जो आम लोगों के जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
इकरा हसन का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई लोगों ने उनके विचारों का समर्थन करते हुए कहा कि यह वक्त महिलाओं की पसंद का सम्मान करने का है, न कि उन्हें किसी खांचे में बांधने का।
कुछ यूज़र्स ने इसे साहसिक बयान बताते हुए कहा कि इस तरह की स्पष्ट राय राजनीति में कम देखने को मिलती है। वहीं, कुछ आलोचकों का कहना है कि हिजाब एक सामाजिक मुद्दा है और इस पर चर्चा जरूरी है। हालांकि, समर्थकों का तर्क है कि चर्चा और थोपने के बीच फर्क समझना जरूरी है।
राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इकरा हसन का यह बयान उन्हें एक प्रगतिशील और संतुलित नेता के रूप में पेश करता है। उन्होंने न तो हिजाब का समर्थन किया और न ही विरोध, बल्कि इसे व्यक्तिगत पसंद का मामला बताया। यह रुख उन्हें व्यापक वर्गों में स्वीकार्यता दिला सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बयान उन मतदाताओं को भी आकर्षित कर सकता है, जो धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को अहम मानते हैं।
कैराना सांसद इकरा हसन का हिजाब को लेकर दिया गया बयान एक महत्वपूर्ण संदेश देता है—कि महिलाओं के पहनावे को राजनीति और सामाजिक बहस का हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि लोकतंत्र की असली पहचान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विकल्पों के सम्मान में है।
उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि हिजाब पहनना या न पहनना किसी भी महिला का निजी निर्णय है और इसे उसी तरह स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने सरकार और समाज को यह याद दिलाया कि देश में इससे कहीं बड़े और गंभीर मुद्दे मौजूद हैं, जिन पर ध्यान देना कहीं ज्यादा जरूरी है।
इकरा हसन का यह बयान न केवल हिजाब पर चल रही बहस को नई दिशा देता है, बल्कि महिलाओं की आज़ादी, अधिकार और सम्मान पर भी एक व्यापक चर्चा को जन्म देता है।