• January 31, 2026

केशव प्रसाद मौर्य ने फिर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को ‘भगवान’ कहकर संबोधित किया, अनशन खत्म करने की अपील दोहराई

लखनऊ/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सम्मानजनक संबोधन देते हुए ‘भगवान’ कहा है। उन्होंने शंकराचार्य से अनुरोध किया कि वे अपना विरोध समाप्त करें और स्नान कर लें। माघ मेले में चल रहे विवाद पर केशव मौर्य ने कहा, “मेरा निवेदन है कि वो स्नान कर लें। सरकार इस मामले में पहल कर रही है। अभी मैं शंकराचार्य जी के पास नहीं जा रहा हूं, लेकिन मुख्यमंत्री जी संज्ञान ले रहे हैं।”

मुलाकात की चर्चा के बाद भी नहीं हुई बैठक
इससे पहले खबरें आई थीं कि डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य रविवार शाम को प्रयागराज के माघ मेला में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर सकते हैं और उनके अनशन को समाप्त कराने की कोशिश कर सकते हैं। शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि डिप्टी सीएम शाम को मुलाकात के लिए पहुंचेंगे। हालांकि, केशव मौर्य प्रयागराज पहुंचे लेकिन मुलाकात नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब उच्च स्तर से निर्देश मिलेगा तो बातचीत करेंगे, अन्यथा प्रार्थना जारी रहेगी।

पहले भी अनशन खत्म करने की विनती, जांच की बात कही
केशव प्रसाद मौर्य ने पहले भी शंकराचार्य के अनशन पर बयान देते हुए विरोध समाप्त करने और संगम स्नान की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि अधिकारियों की ओर से हुई किसी गलती की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने शंकराचार्य को ‘पूज्य संत’ और ‘जगद्गुरु’ बताते हुए उनके अपमान करने वालों की जांच का वादा किया था।

शंकराचार्य ने की केशव मौर्य की तारीफ, कहा- उन्हें ही सीएम बनना चाहिए था
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी केशव प्रसाद मौर्य के बयानों की सराहना की थी। उन्होंने कहा था कि डिप्टी सीएम समझदार हैं और उन्होंने अधिकारियों की गलती को स्वीकार किया है। शंकराचार्य ने आगे कहा, “केशव प्रसाद मौर्य को ही उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए था।” यह बयान विवाद के बीच राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया था। माघ मेले में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर प्रशासन और शंकराचार्य के बीच गतिरोध जारी है। डिप्टी सीएम का बार-बार नरम रुख और अपील से संकेत मिलता है कि सरकार संवाद के रास्ते मामले को सुलझाने की कोशिश में जुटी है।

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