यूपी में सिंचाई क्रांति: योगी सरकार की नलकूपों के आधुनिकीकरण की मुहिम
लखनऊ, 4 अक्टूबर 2025: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किसानों की समृद्धि के लिए सिंचाई सुविधाओं को मजबूत करने का बीड़ा उठाया है। शनिवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने राजकीय नलकूपों के जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण पर जोर दिया। गुणवत्ता और पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए, योगी ने पानी के दुरुपयोग को रोकने और जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के निर्देश दिए। क्या यह कदम यूपी के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाएगा? आइए, इस पहल की पूरी कहानी जानते हैं।
नलकूपों का आधुनिकीकरण: किसानों की समृद्धि का रास्ता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सिंचाई विभाग की समीक्षा बैठक में साफ कहा कि किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। राजकीय नलकूपों का जीर्णोद्धार और आधुनिकीकरण इस दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्राथमिकता के आधार पर काम हो। नलकूपों को आधुनिक तकनीक से लैस करने से पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और खेती की लागत कम होगी। योगी ने जोर दिया कि इन कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। नए उपकरण और तकनीक से नलकूपों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, जिससे सूखे क्षेत्रों में भी खेती संभव हो सकेगी। यह कदम 2027 तक यूपी को कृषि उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक नलकूप न केवल पानी की बचत करेंगे, बल्कि भूजल स्तर को भी बनाए रखेंगे। योगी ने डार्क जोन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने को कहा, जहां भूजल की कमी चिंता का विषय है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
जल संरक्षण की नई पहल: वैज्ञानिक दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री ने नलकूपों से पानी के दुरुपयोग को रोकने के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण की मजबूत व्यवस्था जरूरी है, खासकर बारिश के मौसम में, जब भूजल रिचार्ज करने का सबसे अच्छा समय होता है। ड्रिप इरिगेशन और स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट जैसे तरीकों को लागू करने के निर्देश दिए गए। योगी ने डार्क जोन क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने के लिए विशेष योजनाएं बनाने को कहा। इससे न केवल किसानों को फायदा होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। नलकूपों के आधुनिकीकरण से पानी का सही उपयोग होगा, जिससे खेतों में सिंचाई की कमी नहीं रहेगी। योगी ने अधिकारियों को हर स्तर पर मॉनिटरिंग करने और समयबद्ध तरीके से प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए कहा। यह कदम यूपी के उन लाखों किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है, जो पानी की कमी से जूझ रहे हैं। सोशल मीडिया पर किसान संगठनों ने इस पहल की तारीफ की, लेकिन समय पर अमल की मांग भी की।
प्रमुख परियोजनाओं पर जोर: तराई और सिल्ट प्रबंधन
योगी ने सरयू नहर, बाण सागर और मध्य गंगा जैसी प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं की कमियों को दूर करने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का मजबूत क्रियान्वयन ग्रामीण और शहरी इलाकों में पानी की समस्या हल करेगा। विशेष रूप से तराई क्षेत्र के किसानों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए, योगी ने जलाशयों की डीसिल्टिंग पर जोर दिया। इससे जलाशयों की क्षमता बढ़ेगी और ज्यादा किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही, नदियों के कटान को रोकने के लिए सिल्ट का उपयोग करने की रणनीति बनाई गई। यह न केवल पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि लागत भी कम करेगा। योगी ने अधिकारियों से हर प्रोजेक्ट की प्रगति की साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी, ताकि कोई देरी न हो। यह कदम यूपी को कृषि और जल प्रबंधन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। क्या यह पहल यूपी के किसानों की तकदीर बदलेगी? यह सवाल हर खेत की मिट्टी में गूंज रहा है।