इंदौर जल त्रासदी: दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी का सरकार पर करारा हमला, दोषियों पर हत्या का केस दर्ज करने की मांग
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में जानी जाती है, आज दूषित पानी से हुई मौतों के कारण शोक और आक्रोश की लहर में डूबी हुई है। भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में दूषित जल आपूर्ति के कारण हुई लगभग 15 से 16 मौतों के मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और पीसीसी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार को कठघरे में खड़ा किया। दिग्विजय सिंह ने इसे व्यवस्था की विफलता बताते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नैतिकता पर सवाल उठाए, वहीं जीतू पटवारी ने सरकार को चेतावनी दी कि केवल अधिकारियों के तबादले या मामूली मुआवजे से इस पाप को धोया नहीं जा सकता।
दिग्विजय सिंह का प्रहार: महापौर और पार्षदों की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरी घटना को अत्यंत निंदनीय और चौंकाने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार इंदौर को स्मार्ट सिटी और स्वच्छता का रोल मॉडल बताती है, वहीं दूसरी तरफ शहर की घनी बस्तियों में लोग जहर जैसा पानी पीने को मजबूर हैं। दिग्विजय सिंह ने सीधे तौर पर इंदौर के महापौर, क्षेत्रीय पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि “जनप्रतिनिधियों का काम केवल फोटो खिंचवाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि उनके क्षेत्र की जनता को बुनियादी सुविधाएं जैसे साफ पानी मिल रहा है या नहीं।” सिंह ने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षदों और महापौर ने जनता की शिकायतों को नजरअंदाज किया, जिसके कारण आज इतने परिवारों के चिराग बुझ गए। उन्होंने मांग की कि इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और उन सभी जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए जो इस नरसंहार के समय मौन साधे रहे।
जीतू पटवारी का तीखा सवाल: क्या तबादलों से लौट आएंगी मासूमों की जानें?
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले में सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सरकार द्वारा कुछ निचले स्तर के अधिकारियों के तबादले और निलंबन की कार्रवाई को ‘दिखावा’ करार दिया। पटवारी ने गरजते हुए कहा, “क्या अधिकारियों को इधर से उधर भेज देने से उन 16 लोगों की मौत की भरपाई हो जाएगी जिन्होंने सिस्टम के भ्रष्टाचार के कारण दम तोड़ दिया?” पटवारी ने इसे केवल एक प्रशासनिक चूक मानने से इनकार कर दिया और कहा कि यह पूरी तरह से व्यवस्था की विफलता है, जिसकी जड़ में गहरा भ्रष्टाचार व्याप्त है। उन्होंने मांग की कि इस सामूहिक मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर ‘हत्या’ (धारा 302) का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इसके पीछे की बड़ी मछलियों पर हाथ नहीं डाला जाता, तब तक कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।
मुआवजे पर तंज: मंत्री के काजू-बादाम के खर्च और गरीब की जान की कीमत बराबर
जीतू पटवारी ने सरकार द्वारा घोषित 2 लाख रुपये के मुआवजे को “भद्दा मजाक” बताया। उन्होंने सरकार की फिजूलखर्ची और जनता के प्रति उसकी संवेदनहीनता की तुलना करते हुए गंभीर आरोप लगाए। पटवारी ने कहा, “सरकारी अधिकारी और मंत्री जब पंचायतों या जिलों के दौरे पर जाते हैं, तो उनके सुबह के नाश्ते में 1.5 लाख रुपये के फल और 2 लाख रुपये के काजू-बादाम उड़ा दिए जाते हैं। यह कितनी शर्मनाक बात है कि एक तरफ सरकार अपने ऐशो-आराम पर लाखों खर्च कर रही है और दूसरी तरफ एक आम नागरिक की जान की कीमत भी केवल 2 लाख रुपये लगा रही है।” उन्होंने कहा कि 2 लाख रुपये का चेक थमाकर 16 मौतों का हिसाब नहीं चुकाया जा सकता। पटवारी ने मांग की कि मृतक के परिजनों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए और संबंधित विभागीय मंत्री को नैतिकता के आधार पर तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी जल आपूर्ति व्यवस्था
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि इंदौर में नगर निगम के भीतर फैले भ्रष्टाचार के कारण जल निकासी (सीवरेज) और पेयजल आपूर्ति की पाइपलाइनें एक-दूसरे में मिल गई हैं। स्थानीय निवासियों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने के बावजूद ठेकेदारों और अधिकारियों के गठजोड़ ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जीतू पटवारी ने कहा कि अमृत योजना और स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गरीब बस्तियों में आज भी गंदे नालों का पानी पीने की पाइपलाइन में आ रहा है। उन्होंने कहा कि यह भ्रष्टाचार ही है जिसने पाइपलाइन बिछाने में घटिया सामग्री का उपयोग करवाया और आज उसी का परिणाम इंदौर की सड़कों पर मातम के रूप में दिख रहा है।
कांग्रेस का बड़ा ऐलान: 11 तारीख को प्रदेश व्यापी आंदोलन की चेतावनी
इंदौर की इस त्रासदी को लेकर कांग्रेस पार्टी अब सड़क पर उतरने की तैयारी कर चुकी है। जीतू पटवारी ने घोषणा की है कि आने वाली 11 तारीख को कांग्रेस पार्टी इंदौर सहित पूरे मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल इंदौर की मौतों के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश की जर्जर प्रशासनिक व्यवस्था के खिलाफ होगा। कांग्रेस की मांग है कि पूरे मामले में संज्ञान लेकर एफआईआर दर्ज की जाए और जिम्मेदार मंत्री का इस्तीफा लिया जाए। पटवारी ने कहा कि अगर 11 तारीख तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और उग्र होगा। पार्टी के कार्यकर्ता घर-घर जाकर सरकार की विफलता और भ्रष्टाचार को उजागर करेंगे।
निष्कर्ष और जनता की उम्मीदें
इंदौर की इस घटना ने विकास के उन तमाम दावों की पोल खोल दी है जो कागजों पर तो चमकते हैं लेकिन धरातल पर दम तोड़ देते हैं। दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के इन बयानों ने सरकार पर चौतरफा दबाव बना दिया है। जनता अब केवल सांत्वना और तबादलों से संतुष्ट नहीं है; वे ठोस न्याय की मांग कर रहे हैं। इंदौर जैसा आधुनिक शहर अगर अपने नागरिकों को पीने का शुद्ध पानी भी मुहैया नहीं करा सकता, तो यह पूरे सिस्टम के लिए एक आत्मचिंतन का विषय है। अब सबकी निगाहें 11 तारीख को होने वाले कांग्रेस के आंदोलन और उस पर सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।