पोखरण में भारतीय सेना का ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास: टैंक, तोप, अपाचे हेलीकॉप्टर, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम ने दिखाई एकीकृत युद्ध क्षमता
जोधपुर/पोखरण: राजस्थान के थार रेगिस्तान स्थित पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में भारतीय सेना ने ‘अग्नि वर्षा’ नाम से एक बड़ा एकीकृत युद्ध अभ्यास सफलतापूर्वक पूरा किया। दक्षिण पश्चिम कमांड (दक्षिण कमांड) के तहत आयोजित इस अभ्यास में मैकेनाइज्ड फोर्स, आर्टिलरी, एविएशन और ड्रोन यूनिट्स ने मिलकर रेगिस्तानी इलाके में तेज, सटीक और समन्वित कार्रवाई की क्षमता का प्रदर्शन किया।
अभ्यास में शामिल प्रमुख हथियार और सिस्टम
- टैंक: टी-90 भीष्म और अन्य मुख्य युद्धक टैंक
- तोपखाना: के-9 वज्र स्वचालित तोप, बोफोर्स 155 मिमी हॉवित्जर, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर
- इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV): BMP-2 सारथी और अन्य
- एविएशन: अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर (AH-64E), ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर
- ड्रोन: निगरानी ड्रोन, स्ट्राइक ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम
अभ्यास के दौरान टैंकों और तोपों की जोरदार फायरिंग से पूरा रेगिस्तान गूंज उठा। अपाचे और ध्रुव हेलीकॉप्टरों ने ऊपर से निगरानी और क्लोज एयर सपोर्ट प्रदान किया, जबकि ड्रोन ने दुश्मन की लोकेशन रियल-टाइम में ट्रैक कर तुरंत हमले की सिफारिश की।
डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी तालमेल पर जोरइस अभ्यास की सबसे बड़ी खासियत थी डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम का उपयोग। निगरानी ड्रोन द्वारा प्राप्त जानकारी तुरंत टैंक, तोप और हेलीकॉप्टर यूनिट्स तक पहुंची और सेकंडों में सटीक हमला किया गया। काउंटर-ड्रोन सिस्टम से दुश्मन के संभावित ड्रोन हमलों को रोकने की ट्रेनिंग भी दी गई।
रेगिस्तानी चुनौतियों में सेना की तैयारीथार रेगिस्तान की तेज गर्मी, रेत की आंधी और खराब विजिबिलिटी जैसी कठिन परिस्थितियों में टैंक मैन्यूवर, आर्टिलरी फायर और एविएशन सपोर्ट का समन्वय दिखाना सेना के लिए बड़ी चुनौती था। अभ्यास पूरी तरह वास्तविक युद्ध जैसे हालात में किया गया, जिससे सेना ने साबित किया कि वह किसी भी इलाके में तेज और निर्णायक कार्रवाई के लिए तैयार है।
अंतरराष्ट्रीय नजरें और आत्मनिर्भरता का संदेशइस अभ्यास को 25 से अधिक देशों के डिफेंस पत्रकारों और मिलिट्री अटैची ने देखा। इसमें इस्तेमाल कई हथियार प्रणालियां—जैसे के-9 वज्र, पिनाका, ध्रुव और कुछ ड्रोन—भारत में बने या विकसित किए गए हैं। इससे भारत की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगति स्पष्ट हुई।सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “आज के युद्ध में तेजी, सटीकता और तकनीक सबसे महत्वपूर्ण हैं। ‘अग्नि वर्षा’ अभ्यास इसी नई सोच का हिस्सा है, जो दिखाता है कि भारतीय सेना किसी भी स्थिति में संगठित, तेज और निर्णायक कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।”
यह अभ्यास हाल के वर्षों में सेना द्वारा की गई तैयारियों और ऑपरेशनल अनुभवों (जैसे ऑपरेशन सिंदूर) का नतीजा है, जो रेगिस्तानी और चुनौतीपूर्ण इलाकों में युद्ध क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।