भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच पाकिस्तान को लगा बड़ा कूटनीतिक झटका: अमेरिकी मानचित्र में जम्मू-कश्मीर और PoK को दिखाया भारत का अटूट हिस्सा
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद जहां दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए युग की शुरुआत हुई है, वहीं इस घटनाक्रम ने पड़ोसी देश पाकिस्तान को एक गहरा कूटनीतिक जख्म भी दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने व्यापार समझौते के विवरण साझा करने के लिए सोशल मीडिया पर भारत का एक आधिकारिक मानचित्र जारी किया है, जिसमें संपूर्ण जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत के अभिन्न अंग के रूप में दर्शाया गया है। विशेष बात यह है कि इस मानचित्र में पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भी स्पष्ट रूप से भारतीय सीमा के भीतर दिखाया गया है, जिसने इस्लामाबाद के दशकों पुराने दुष्प्रचार की हवा निकाल दी है।
यह मानचित्र अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय द्वारा साझा किए गए एक विस्तृत ग्राफिक का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य यह बताना था कि इस नए ट्रेड डील के बाद अमेरिकी उत्पादों की पहुंच भारतीय बाजारों तक कितनी सुगम और विस्तृत हो जाएगी। जैसे ही यह ग्राफिक सार्वजनिक हुआ, अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई। नक्शे में उत्तरी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को जिस स्पष्टता और दृढ़ता के साथ भारत के हिस्से के रूप में सीमांकित किया गया है, उसे अमेरिका के दक्षिण एशिया नीति में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पाकिस्तान, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार कश्मीर राग अलाप कर वैश्विक ध्यान खींचने की कोशिश करता है, उसके लिए यह मानचित्र किसी करारे तमाचे से कम नहीं है।
रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जैसे सुपरपावर के एक आधिकारिक सरकारी विभाग द्वारा इस तरह का नक्शा जारी करना महज कोई तकनीकी चूक नहीं हो सकती। यह स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के उस प्रोपेगेंडा को बड़ा झटका है जिसके तहत वह कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है। अमेरिका ने इस कदम के जरिए दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि वह भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का न केवल सम्मान करता है, बल्कि जमीनी हकीकत को भी स्वीकार करता है। व्यापार समझौते के ठीक बाद इस मानचित्र का आना यह भी दर्शाता है कि आर्थिक हितों के साथ-साथ सामरिक हितों में भी भारत और अमेरिका के बीच गजब का तालमेल बैठ रहा है।
जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, यह एक ऐसा तथ्य है जिसे भारत ने हमेशा दुनिया के सामने मजबूती से रखा है। हालांकि, पूर्व में कई पश्चिमी देश और एजेंसियां अपने नक्शों में कश्मीर के कुछ हिस्सों को ‘विवादित’ या ‘डॉटेड लाइन्स’ के साथ दिखाती रही हैं। लेकिन बाइडेन-ट्रंप संक्रमण काल और वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच यूएसटीआर (USTR) का यह कदम भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। इस मानचित्र ने पाकिस्तान द्वारा समर्थित उन तमाम नैरेटिव्स को ध्वस्त कर दिया है जो PoK को भारत से अलग दिखाने की कोशिश करते थे।
पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए भी अधिक दर्दनाक है क्योंकि वह हाल के वर्षों में कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में पूरी तरह विफल रहा है। चीन को छोड़कर दुनिया का कोई भी बड़ा देश अब पाकिस्तान के दावों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। दूसरी ओर, भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और अमेरिका के साथ गहरे होते रक्षा व व्यापारिक संबंधों ने वैश्विक मानचित्र पर भारत की स्थिति को इतना मजबूत कर दिया है कि अब वॉशिंगटन जैसे सत्ता के केंद्र भी भारत की संवेदनशीलता और भौगोलिक स्थिति को स्वीकार करने में संकोच नहीं कर रहे हैं।
इस ग्राफिक पोस्ट के माध्यम से अमेरिका ने न केवल व्यापारिक संभावनाओं को रेखांकित किया, बल्कि अनजाने में या जानबूझकर पाकिस्तान के झूठे दावों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। सोशल मीडिया पर भी भारतीय नागरिकों ने इस मानचित्र का स्वागत करते हुए इसे ‘न्यू इंडिया’ की धमक बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक प्रगति जब कूटनीतिक स्पष्टता के साथ मिलती है, तो परिणाम इसी तरह के होते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान इस मुद्दे पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देता है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी साख पहले ही इतनी गिर चुकी है कि उसकी किसी भी आपत्ति का खास असर होने की उम्मीद नहीं है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की यह रूपरेखा केवल डॉलर और टैरिफ तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भौगोलिक और सामरिक स्पष्टता का एक ऐसा नया पैमाना सेट कर दिया है जिससे दक्षिण एशिया की राजनीति में भारत का कद और ऊंचा हो गया है। अमेरिका का यह नक्शा न केवल व्यापारिक गलियारों में, बल्कि वैश्विक कूटनीति की मेज पर भी भारत की एक बड़ी जीत के रूप में दर्ज किया जाएगा।