भारत की पहली बुलेट ट्रेन की झलक आई सामने, वडोदरा से मुंबई का सफर होगा सिर्फ 90 मिनट में
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रविवार को भारत की पहली बुलेट ट्रेन की झलक साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “क्या आप तैयार हैं? भारत की पहली बुलेट ट्रेन का निर्माण।” रेल मंत्री के मुताबिक, अगले साल मई या जून तक बुलेट ट्रेन को टेस्टिंग के लिए पटरियों पर उतारने का लक्ष्य है।
बेंगलुरु में आयोजित ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम में अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2 से 4 महीने की टेस्टिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की पहली बुलेट ट्रेन का उद्घाटन करेंगे। ट्रेन शुरू होने के बाद वडोदरा से मुंबई तक का सफर महज 90 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
वडोदरा से मुंबई पहुंचने में लगेंगे सिर्फ डेढ़ घंटे
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन से प्रेरित भारत की बुलेट ट्रेन का पहला बॉडी फ्रेम तैयार हो गया है। इसे ‘स्क्वीज टेस्ट’ यानी दबाव परीक्षण के लिए भेजा गया है।
वैष्णव के मुताबिक, अगले साल मई या जून तक भारत में निर्मित बुलेट ट्रेन टेस्टिंग के लिए पटरियों पर आ जाएगी। इसके बाद 2 से 4 महीने तक परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन शुरू होने पर वडोदरा से मुंबई का सफर सिर्फ डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा।
सूरत-बिलिमोरा सेक्शन अगले साल शुरू करने का लक्ष्य
इससे पहले रेल मंत्री ने बताया था कि सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन का पहला सेक्शन अगले साल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। उनके अनुसार, मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल (MAHSR) कॉरिडोर का निर्माण कार्य उम्मीद से अधिक तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है। इसके शुरू होने से भारत में हाई-स्पीड रेल यात्रा के एक नए दौर की शुरुआत होने की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को दी मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्दर्न बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को भी मंजूरी दे दी है। इससे उत्तर प्रदेश को पहली हाई-स्पीड रेल सेवा मिलने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत दिल्ली से वाराणसी की यात्रा का समय घटकर करीब 3.5 घंटे रह सकता है। इस हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की संभावना है, क्योंकि फिलहाल पारंपरिक ट्रेनों से इस रूट पर सफर में कई घंटे लगते हैं।
