• January 4, 2026

हिजाब विवाद पर इम्तियाज जलील का कड़ा रुख: ‘बहन की गरिमा पर हाथ उठाया तो हाथ काट दूंगा’

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के कद्दावर नेता इम्तियाज जलील ने हिजाब विवाद और मुस्लिम महिलाओं की गरिमा को लेकर एक अत्यंत आक्रामक और विवादास्पद बयान दिया है। महाराष्ट्र के जालना में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए जलील ने सीधे तौर पर चेतावनी दी कि यदि किसी ने मुस्लिम महिलाओं को गलत इरादे से छूने या उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने की कोशिश की, तो वे कानून को हाथ में लेने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने जनसमूह के सामने गरजते हुए कहा, “अगर कोई भी शख्स किसी मुस्लिम बहन को गलत नीयत से छूने की हिम्मत करेगा, तो मैं उसका हाथ काट दूंगा।” जलील का यह बयान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एक महिला का हिजाब हटाने की घटना और उसके बाद उत्तर प्रदेश के एक मंत्री की विवादित टिप्पणी की पृष्ठभूमि में आया है। इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज होने की संभावना है।

नीतीश कुमार और संजय निषाद पर सीधा हमला: बयानबाजी की मर्यादा पर सवाल

इम्तियाज जलील ने अपने संबोधन के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद को जमकर आड़े हाथों लिया। विवाद तब शुरू हुआ था जब नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान एक महिला के चेहरे से हिजाब हटाने की कोशिश की थी, जिसे एआईएमआईएम ने महिला की निजता और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया। इस घटना पर टिप्पणी करते हुए यूपी के मंत्री संजय निषाद ने एक आपत्तिजनक बयान दिया था। निषाद ने कथित तौर पर कहा था, “अगर उन्होंने कहीं और छू लिया होता तो क्या होता?”

जलील ने इस टिप्पणी को महिला शक्ति का अपमान और मानसिक विकृति करार दिया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग करना शर्मनाक है। हालांकि, संजय निषाद ने बाद में सफाई देते हुए दावा किया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, लेकिन जलील ने इस सफाई को खारिज करते हुए इसे सत्ता का अहंकार बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब मुस्लिम महिलाओं की गरिमा पर टिप्पणी करना राजनीति का नया मानदंड बन गया है?

सेक्युलर पार्टियों पर बरसे जलील: ‘मुसलमानों को नेतृत्व देने से डरते हैं ये दल’

चुनावी सभा के दौरान इम्तियाज जलील का निशाना केवल सत्ताधारी गठबंधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कांग्रेस और राकांपा (शरद पवार गुट) जैसी खुद को सेक्युलर कहने वाली पार्टियों पर भी तीखा प्रहार किया। जलील ने आरोप लगाया कि ये पार्टियां केवल दिखावे के लिए धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़ती हैं। उन्होंने कहा, “जो पार्टियां खुद को सेक्युलर कहती हैं, वे गुंडों और आपराधिक तत्वों को गले लगाने में तो नहीं हिचकिचातीं, लेकिन जब बात मुसलमानों के साथ खड़े होने या उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व देने की आती है, तो वे तुरंत पीछे हट जाती हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि यही तथाकथित सेक्युलर दल एआईएमआईएम को सांप्रदायिक और ‘अछूत’ बताते हैं ताकि मुस्लिम समुदाय का अपना स्वतंत्र नेतृत्व न उभर सके। जलील के अनुसार, ये दल चाहते हैं कि मुसलमान केवल एक ‘वोट बैंक’ बनकर रहें और कभी भी निर्णय लेने वाली भूमिका में न आएं। उन्होंने जालना की जनता से अपील की कि वे इन पार्टियों के दोहरे चरित्र को पहचानें और अपने हक के लिए एआईएमआईएम को मजबूत करें।

चुनावी बिसात और ‘पतंग’ बनाम ‘घड़ी’ का विवाद

जालना में 15 जनवरी को होने वाले नगर निगम चुनाव एआईएमआईएम के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गए हैं। पार्टी ने शहर में 17 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है और इम्तियाज जलील खुद चुनाव प्रचार की कमान संभाले हुए हैं। इस दौरान उन्होंने शिवसेना (शिंदे गुट) और भाजपा के नेताओं पर भी चुटकी ली। हाल ही में महाराष्ट्र के सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने मांग की थी कि मकर संक्रांति के त्योहार को देखते हुए एआईएमआईएम के चुनाव चिन्ह ‘पतंग’ पर रोक लगा देनी चाहिए।

इस पर तंज कसते हुए जलील ने हल्के-फुल्के लेकिन मारक अंदाज में कहा कि अगर पतंग से डर लगता है, तो महायुति के नेताओं को भी कुछ त्याग करने चाहिए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “मैं शिवसेना और भाजपा नेताओं से अपील करता हूँ कि वे अगले एक महीने तक हाथ में ‘घड़ी’ न पहनें।” गौर करने वाली बात यह है कि ‘घड़ी’ अजीत पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का चुनाव चिन्ह है, जो महायुति गठबंधन का हिस्सा है। जलील ने इस कटाक्ष के जरिए गठबंधन के भीतर के अंतर्विरोधों और चुनाव चिन्हों को लेकर चल रही राजनीति पर निशाना साधा।

नगर निकाय चुनाव: जालना में एआईएमआईएम की बढ़ती ताकत

जालना नगर निगम के चुनाव परिणामों का असर राज्य की भविष्य की राजनीति पर पड़ना तय है। इम्तियाज जलील ने जिस तरह से हिजाब और महिला अस्मिता के मुद्दे को स्थानीय निकाय चुनाव से जोड़ा है, उससे साफ है कि पार्टी मुस्लिम बहुल इलाकों में अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। जलील ने अपने भाषण के अंत में समर्थकों से कहा कि यह चुनाव केवल नाली और सड़क का नहीं है, बल्कि यह पहचान और सम्मान की लड़ाई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और विपक्षी दल मिलकर एआईएमआईएम के उम्मीदवारों को परेशान कर रहे हैं, लेकिन जनता इसका जवाब बैलट बॉक्स के जरिए देगी। जलील के “हाथ काट देने” वाले बयान ने जहाँ उनके समर्थकों में जोश भरा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे भड़काऊ बताते हुए चुनाव आयोग से संज्ञान लेने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि 15 जनवरी को जालना की जनता ‘पतंग’ को कितनी ऊंचाई तक ले जाती है।

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